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नोटबंदी: पाकिस्तान के बाद अन्य देशों ने भी जताई नाराजगी

Tue, 06 Dec 2016 02:11 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Tue, 06 Dec 2016 02:11 PM IST
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 Demonetisation: Diplomats of different country show anger on Cashless Situation

नोटबंदी का असर भारत स्तिथ दूसरे देशों के दूतावासों के अधिकारियों पर भी हो रहा है। पाकिस्तान के दूतावास के अधिकारियों के तय रकम निकालने को लेकर नाराजगी जताई थी, उसे देखते हुए कई और देशों के दूतावासों के अधिकारियों ने भी तय की गई कैश लिमिट के लिए गुस्सा जाहिर किया है। अधिकारियों की तल्खी यहां तक पहुंच गई है कि उन्होंने उनके देशों में भारतीय दूतावासों के अधिकारियों से भी ऐसा ही व्यवहार करने की मांग की है। मसलन, उनके देश में भारतीय दूतावासों के अधिकारियों की नकदी निकासी पर सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है। 

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रूस, यूक्रेन, कजाकिस्तान, इथियोपिया और सूडान के दूतावास के अधिकारियों ने तो विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है। ऐसे में इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि उनकी देखादेखी और देश भी ऐसी ही शिकायत कर सकते हैं। 
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कजाकिस्तान के दूतावास ने पिछले हफ्ते नैशनल डे मनाया था, जिसे लेकर कैश की कमी की शिकायत की गई है।

सूत्रों की मानें तो पाक उच्चायोग के अधिकारियों को कैश निकालने की दिक्कत उच्चायोग और एक निजी बैंक के बीच पनपी गड़बड़ी की वजह से हुई थी। जिसे सरकार ने सुलझा लिया है।

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हर हफ्ते 50 हजार रुपए कैश निकाल सकते हैं दूसरे देशों के राजनयिक

 Demonetisation: Diplomats of different country show anger on Cashless Situation

एक उच्चायुक्त ने शिकायत की है कि नोटंबदी को लेकर तकरीबन एक महीना हो चुका है। विदेश मंत्रालय से समाधान निकालने के लिए कहा गया था, जो नहीं हुआ। दूसरे देशों के उच्चायुक्तों ने कहना शुरू कर दिया है कि उनके फंड पर लिमिट तय करना विएना कन्वेंशन का उल्लंघन है। 

कैश लिमिट को लेकर पाकिस्तान ने तो भारत को चेतावनी तक दे डाली थी कि इसका खामियाजा पाक स्थित भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों को भुगतना पड़ सकता है। 

रूस के राजदूत एलेक्जेंडर कदाकिन ने 2 दिसंबर को विदेश मंत्रालय को लिखे एक पत्र में कहा कि भारतीय स्टेट बैंक ने दूतावास को जानकारी दी है कि भारत सरकार के निर्देशों के तहत दूतावास को हर हफ्ते 50,000 रुपये कैश निकालने की अनुमति है। एलेक्जेंडर ने कहा कि इतनी रकम न तो सैलरी के हिसाब से और न ही दूतावास के खर्चों के लिए भी पर्याप्त है। 

एलेक्जेंडर ने चेन्नई और कोलकाता में रूसी दूतावासों को इस वजह से हो रही दिक्कतों का भी जिक्र किया था। उन्होंने समस्या का जिक्र करते हुए कहा था कि उच्चायुक्त टैक्स-फ्री सैलरी डॉलर में ले सकते हैं, लेकिन भारत में उन्हें बैंक से 5000 डॉलर से ज्यादा निकालने के लिए उससे जुड़ा डॉक्युमेंट भी देना होता है।

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