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मुहिम: भारत से अफ्रीकी बच्चों के लिए उठी न्याय की मांग, कैलाश सत्यार्थी के नेतृत्व में चलाया जा रहा हस्ताक्षर अभियान

Wed, 16 Feb 2022 03:15 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Wed, 16 Feb 2022 03:15 PM IST
सार

Laureates and Leaders For Children:अफ्रीकी बच्चों को संकट से निकालने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी की पहल पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता दलाई लामा, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, दिग्गज उद्योगपति नारायण मूर्ति सहित दुनियाभर के 86 नोबेल पुरस्कार विजेताओं और वैश्विक नेताओं ने हस्ताक्षर अभियान चलाया है।

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Laureates and Leaders For Children, Demand for justice for African children, Dalai Lama, Kailash Satyarthi, Manmohan singh and many other veterans launched a signature campaign
अफ्रीकी बच्चे - फोटो : unicef

विस्तार

Laureates and Leaders For Children: अफ्रीका में बच्चों की बदहाल स्थिति को लेकर भारत में भी न्याय की मांग उठने लगी है। बच्चों को संकट से निकालने के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी की पहल पर प्रसिद्ध आध्यात्मिक नेता दलाई लामा, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और दिग्गज उद्योगपति नारायण मूर्ति सहित दुनियाभर के 86 नोबेल पुरस्कार विजेताओं और वैश्विक नेताओं ने एकजुट होकर “लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रेन” के बैनर तले अफ्रीकी बच्चों के लिए प्रत्यक्ष सामाजिक सुरक्षा देने का आह्वान किया है। 

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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता लिमाह जबोई की अध्यक्षता में यूरोपीय संघ और अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन की पूर्व संध्या पर हुई अफ्रीकी नेताओं के साथ बैठक के बाद एक बयान जारी कर यह मांग की गई। अफ्रीकी बच्चे कोविड-19 महामारी से बुरी तरह से प्रभावित हुए हैं और चार सालों में दुनिया में बाल श्रमिकों की संख्या में 16 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है। जिनमें आधे से अधिक (यानी 8 करोड़ 86 लाख) बाल श्रमिक उप-सहारा अफ्रीका में कार्यरत हैं। यह अफ्रीका के खिलाफ नस्लीय और व्यवस्थागत भेदभाव का परिणाम है।
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इस अवसर पर लॉरियेट्स एंड लीडर्स फॉर चिल्ड्रेन के संस्थापक नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने वैश्विक नेताओं से अपील करते हुए कहा कि अफ्रीका के बच्चों को हमारी जरूरत है। अफ्रीका में दुनिया के आधे से अधिक बाल श्रमिक हैं। हम दुनिया के प्रत्येक नेता से अपने बच्चों के अधिकारों, सपनों और भविष्य को पूरा करने के लिए उनके साथ खड़े होने और कार्य करने का आह्वान करते हैं। सत्यार्थी ने कहा कि हर बच्चे को स्कूल पहुंचाने के लिए पर्याप्त धन है। इसके बावजूद बच्चों को जिंदा रहने के लिए काम करना पड़ता है। इस स्थिति में यह सवाल पैदा होता है कि हम उस धन को कैसे और किनके लिए खर्च करना चाहते हैं? मैं दुनिया की सरकारों से आग्रह करता हूं कि वे इस पर ध्यान दें और इस दिशा में उचित कार्रवाई करें। इसके लिए हमें अफ्रीका से शुरुआत करनी चाहिए। 
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बैठक की अध्यक्षता करते हु लिमाह जबोई ने कहा कि अफ्रीका को बदला जा सकता है। यह हम पर निर्भर करता है कि अफ्रीका को एक समावेशी और जन-केंद्रित वास्तविकता में फिर से आकार देकर अपने पूर्वजों को गौरवान्वित करें। बच्चे इस महाद्वीप की जान और भविष्य हैं। हम उनका शोषण करके, उनके योगदान को प्राप्त नहीं करने की भूल नहीं कर सकते। 


अफ्रीका में लाखों बच्चों का जीवन दांव पर है। कोविड-19 के आगमन के साथ इन असमानताओं ने नए आयाम ग्रहण किए हैं। वे तेजी से बढ़ रहे हैं। कोविड से बचाव के लिए दी जा रही वैक्सीन के वितरण में जिस तरह का भेदभाव बरता जा रहा है वह शर्ममाक है। जिसका सामना अफ्रीका के सबसे गरीब और हाशिए के बच्चे कर रहे हैं। स्थिति की भयावहता तब और बढ़ जाती है जब अफ्रीका में सामाजिक सुरक्षा के मद में सबसे कम धन आवंटित किए जाते हैं। शिक्षा, स्वास्थय, महिलाओं और बच्चों को लाभ, बेरोजगारी संरक्षण और पेंशन लाभ तक वहां के लोगों की सबसे कम पहुंच है।

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