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पुणे: ओशो आश्रम नष्ट करने की सीबीआई जांच की मांग, साजिश का लगाया आरोप
Wed, 28 Jul 2021 06:50 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: देव कश्यप
Updated Wed, 28 Jul 2021 06:50 AM IST
सार
- पुणे स्थित ओशो ब्लेसिंग मेडिटेशन कम्यून के स्वामी बोध का आरोप, आश्रम नष्ट करने की साजिश
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सदगुरु ओशो
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पुणे स्थित सदगुरु ओशो के आश्रम को नष्ट करने की साजिश की जा रही है। यह आरोप लगाते हुए ओशो ब्लेसिंग मेडिटेशन कम्यून के प्रवक्ता डॉ. अजय गव्हाणे उर्फ स्वामी बोधि जागरण ने कहा कि समाज को सक्रिय होकर ओशो की विरासत और समाधि बचानी होगी। उन्होंने ओशो आश्रम नष्ट करने या उसे बेचने से बचाने के साथ-साथ सभी संबंधित मामलों की जांच सीबीआई से करवाने की मांग की।
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उन्होंने कहा कि ओशो की विरासत को लेकर जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं। उनकी विरासत भारत ही नहीं, समस्त विश्व की है। उन्हें मानने वालों के लिए उनकी समाधि प्रिय है। फिर भी धार्मिक अधिकारों से वंचित कर उन्हें समाधि पर जाने से रोका जा रहा है। ओशो के कई बयानों और तस्वीरों को भी जनसामान्य में विरूपित कर फैलाया जा रहा है। कम्यून के सचिव महेंद्र देशमुख ने सवाल उठाया कि ओशो की किताब में 60 भाषाओं में पूरे विश्व में प्रकाशित हो रही हैं, लेकिन इनकी रॉयल्टी की किसे मिल रही है? इसकी जांच की जानी चाहिए।
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राज्यपाल से भी की थी मदद की मांग
कुछ समय पूर्व मुंबई और पुणे के ओशो के अनुयायियों ने राज्यपाल भगतसिंह कोश्यारी से भी मुलाकात कर मदद मांगी थी। उनका कहना है कि ओशो को मानने वालों का एक समूह पुणे में कोरेगांव पार्क स्थित ओशो इंटरनेशनल फाउंडेशन के आश्रम का करीब 10,000 वर्ग मीटर हिस्सा 107 करोड़ रुपये में बेचने की कोशिश कर रहा है। आश्रम बेचने की वजह महामारी से हुआ नुकसान बताया गया है।
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वहीं, विरोध करने वालों को कहना है कि आश्रम का घाटा करीब पौने चार करोड़ रुपए का है, इसके लिए 107 करोड़ रुपये की संपत्ति बेचना तर्कसंगत नहीं है। यह भी आरोप लगाए गए कि आश्रम को बेचने का समर्थन करने वाले फाउंडेशन के कुछ ट्रस्टी ओशो के नाम पर प्राइवेट लिमिटेड कंपनियां बना चुके हैं। वे इन्हीं को आश्रम की कीमत पर आगे बढ़ाना चाहते हैं।