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सीलिंग मामले में अधिकारियों का रवैया ऐसा ही रहा तो ध्वस्त हो जाएगी दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट

Fri, 02 Nov 2018 04:58 AM IST
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली Updated Fri, 02 Nov 2018 04:58 AM IST
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Delhi will collapse if officers will not change their working style : Supreme Court

सीलिंग मामले पर विभिन्न अथॉरिटी के रवैये से नाराज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर दिल्ली ध्वस्त होती है तो हो जाने दो। कोर्ट ने कहा कि अगर अधिकारियों का ऐसा ही रवैया रहा तो एक दिन दिल्ली ध्वस्त हो जाएगी। सख्त नाराजगी भरे लहजे में अदालत ने कहा कि जब अथॉरिटी ही कुछ नहीं करना चाहती तो कोर्ट को क्यों परवाह करनी चाहिए? कोर्ट ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अवैध निर्माण से संबंधित मामले पर सुनवाई के दौरान की।

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बृहस्पतिवार को जस्टिस मदन बी लोकुर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ को बताया गया कि अमर कॉलोनी में अवैध कब्जा है। सरकारी जमीन, यहां तक कि लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस की जमीन पर भी कब्जा है। इस पर पीठ ने कहा कि सरकारी जमीन पर कब्जा है, लेकिन उसे हटाने के लिए सरकारी एजेंसी कदम नहीं उठा रही है। क्या सरकार अवैध निर्माण को संरक्षण देना चाहती है। 
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केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एएनएस नादकर्णी ने बताया कि अवैध निर्माण को लेकर अमर कॉलोनी में सर्वे का काम पूरा हो चुका है। इस पर पीठ ने एएसजी से पूछा कि कितने घरों का सर्वे किया गया और सर्वे अगस्त में पूरा हो गया है तो अब तक रिपोर्ट क्यों नहीं दाखिल की गई है? इसके बाद कोर्ट को बताया गया कि 800 घरों का सर्वे किया गया है। इस पर पीठ ने सर्वे की जानकारी मांगी।

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जवाब के इंतजार में 15 मिनट रुकी रही कार्यवाही

इसके बाद एक वक्त ऐसा भी आया जब अधिकारी के जवाब के इंतजार में करीब 15 मिनट तक पीठ को इंतजार करना पड़ा। इस पर एएसजी ने पीठ से माफी मांगी। इस बात से नाराज पीठ ने कहा कि ‘डू नॉट बी सॉरी’। नादकर्णी ने कहा कि अगर अफसरों ने समय पर काम पूरा किया होता तो आज यह नहीं होता। 

कोर्ट ने यह भी कहा, ‘आप अपने अधिकारियों की क्षमता देखिए। इन्हें जानकारी तक नहीं मिल पा रही है। इसलिए दिल्ली ऐसी है। आपको डाटा को अंतिम रूप देने में महीने लग जाते हैं और उसके बाद विश्लेषण करने में और कुछ महीने। इसके बाद कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता जाएगा और उसके बाद कार्रवाई होगी। ऐसे में तो दिल्ली ध्वस्त हो जाएगी। तब आप कहेंगे कि अब याचिका का कोई मतलब नहीं रह गया है। पीठ ने एएसजी को शुक्रवार को इस संबंध में निर्देश लाने का आदेश दिया है।

सीलिंग की कार्रवाई से पहले 48 घंटे का नोटिस क्यों?

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर दोहराया कि सीलिंग या अवैध निर्माण पर कार्रवाई के लिए 48 घंटे का नोटिस क्यों दिया जाना चाहिए। केंद्र सरकार और दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की ओर से कहा गया कि नोटिस देना जरूरी है, क्योंकि दस्तावेजों की जांच करनी होती है। बिना दस्तावेजों की जांच के कार्रवाई नहीं की जा सकती है।

इसके बाद पीठ ने कहा, ‘2006 में सुप्रीम कोर्ट ने रिहायशी इलाके में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को बंद करने का निर्देश दिया था, लेकिन अब तक डीडीए और निगम सुस्त है। आप दावा कर रहे हो कि उनके पास लाइसेंस है। लाइसेंस तो एक पन्ने का होता है। ऐसे में कार्रवाई में देरी करने का क्या कारण है।’ डीडीए की ओर से पेश एएसजी पीएस नरसिंहा ने कहा कि बिना दस्तावेजों को वेरिफाई किए कार्रवाई कैसे की जा सकती है। यही कारण है कि 48 घंटे का वक्त दिया जाता है।

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