फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Delhi Pollution index crosses 500, with no respite expected from toxic air

Delhi Pollution: 500 अंक के पार पहुंचा दिल्ली का प्रदूषण सूचकांक, फिलहाल इस जहरीली हवा से राहत की संभावना नहीं

Fri, 31 Oct 2025 04:46 PM IST
शिव शुक्ला डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शुक्ला Updated Fri, 31 Oct 2025 04:46 PM IST
विज्ञापन
Delhi Pollution index crosses 500, with no respite expected from toxic air
दिल्ली में प्रदूषण - फोटो : अमर उजाला
दिल्ली का वायु प्रदूषण अभी भी अपने शीर्ष स्तर पर बना हुआ है। इस सीजन में पहली बार वायु प्रदूषण सूचकांक 500 के अंक को भी पार कर गया। शुक्रवार को दिल्ली के झिलमिल इलाके में पीएम 2.5 का पैमाना 512 अंक और आनंद विहार में 501 अंक तक पहुंच गया। मदर डेयरी पर पीएम 2.5 का स्तर 448 तक पहुंच गया था। यहां पीएम 10 भी 564 अंक रिकॉर्ड किया गया। इसी तरह आईटीओ पर पीएम 2.5 का उच्चतम स्तर 381 तक पहुंच गया।     
विज्ञापन


कृत्रिम बारिश के उपायों के बाद भी दिल्ली के प्रदूषण में कमी आने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अभी भी हवा की गति दो से तीन किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक होने की उम्मीद नहीं है। ऐसे में वायु प्रदूषण के प्रदूषणकारी तत्वों के बहकर दिल्ली की सीमा के बाहर जाने की संभावना काफी कम बनी हुई है। ऐसे में दिल्ली में लगभग एक सप्ताह तक वायु प्रदूषण इसी तरह बना रह सकता है।   
विज्ञापन


वाहनों का धुआं और पराली सबसे महत्त्वपूर्ण कारक
दिल्ली के प्रदूषण में पड़ोसी राज्यों में जलाई जा रही पराली इस बार भी अपना कहर ढा रही है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी यूपी के हिस्सों में जलाई जा रही पराली दिल्ली के लोगों के लिए मुसीबत बन रही है। आंकड़े बता रहे हैं कि सरकार के तमाम उपायों के बाद भी पराली जलाने की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं जिससे दिल्ली के सांसों पर संकट बना हुआ है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इस बार दिल्ली की सरकार ने वाहनों पर व्यावसायिक वाहनों के चलने पर रोक को छोड़कर अतिरिक्त कोई प्रतिबंध नहीं लगाया हुआ है। इससे लोगों को आवाजाही में सुविधा हुई है, लेकिन सड़कों पर चलने वाले वाहनों से निकलने वाला धुआं भी कुल प्रदूषण में अपनी अच्छी खासी भूमिका निभा रहा है। प्रदूषण के आंकड़ों में स्थानीय वाहनों के द्वारा होने वाला प्रदूषण भी सबसे महत्त्वपूर्ण कारकों में से एक है।   

अस्पतालों में बढ़े सांसों के मरीज, घर से बाहर निकलने से बचने की सलाह
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने से सांस के मरीजों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। विशेषकर बुजुर्गों, बच्चों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों के लिए परेशानी बढ़ गई है। लोगों को सबसे ज्यादा परेशानी सांस लेने से संबंधित आ रही है। दमा जैसी परेशानी से गुजर रहे लोगों के लिए इस मौसम में परेशानी बढ़ गई है। चिकित्सकों की सलाह है कि इस दौरान लोग बाहर निकलने से बचें।   

डॉ. प्रदीप कुमार बरनवाल ने अमर उजाला से कहा कि जिन लोगों को पहले से किसी तरह की बीमारी है, या जिनका कोई ऑपरेशन हुआ है, उन्हें इस मौसम में बहुत सावधान रहना चाहिए। उन्हें बाहर निकलने से हर हाल में बचना चाहिए। इस दौरान बाहर निकलने से सांस संबंधी परेशानी बढ़ सकती है जो पहले से बीमार लोगों की मुश्किलें बढ़ा सकती है। यदि बाहर निकलना बहुत अनिवार्य हो तो इस दौरान मास्क लगाकर ही बाहर निकलना चाहिए। यदि संभव हो तो लोगों को मेट्रो या बंद कैब में यात्रा करनी चाहिए जिससे वे बाहरी हवा के सीधे संपर्क में कम से कम आएं।  

'व्यावसायिक वाहनों पर दुबारा अध्ययन करे सरकार'
वहीं, व्यावसायिक वाहनों से जुड़े ट्रांसपोर्ट संगठनों का कहना है कि इस समय व्यावसायिक वाहनों का आवागमन बहुत हद तक कम हो गया है। दीवाली, छठ से लेकर अन्य त्योहारों के कारण ड्राइवर और मजदूरों के साथ-साथ सपोर्टिंग स्टाफ भी दिल्ली से बाहर गया है। इससे सड़कों पर ट्रकों का संचालन बहुत कम हो गया है। इस समय एक अनुमान है कि 20 से 25 प्रतिशत व्यावसायिक वाहन ही दिल्ली के अंदर चल रहे हैं। दिल्ली के लुटियन जोन में हमेशा व्यावसायिक वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहता है। लेकिन इसके बाद भी दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में वायु  प्रदूषण का स्तर 400-500 अंक पर बना हुआ है। ट्रांसपोर्ट संगठनों की मांग है कि ऐसे में सरकार को इस बात की वैज्ञानिक जांच करनी चाहिए कि इस प्रदूषण का असली कारण क्या है। 


आल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेन्द्र कपूर ने कहा कि सरकार और शोध संस्थानों को चाहिए कि वे वास्तविक परिस्थितियों का ज़मीनी अध्ययन करें। प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों, जैसे निर्माण कार्य, धूल, कचरा प्रबंधन, बायोमास जलाना, जनरेटरों का उपयोग आदि, से होने वाले प्रदूषण की निष्पक्ष जांच करें और उसके अनुसार उपाय सुझाएं। उन्होंने कहा कि बिना किसी अध्ययन के हर प्रदूषण के लिए केवल वाहनों को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed