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Delhi: 15 हजार करोड़ खर्च नहीं कर पाई थी केजरीवाल सरकार, सीएजी रिपोर्ट से खुलासा

Fri, 08 Aug 2025 07:22 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Fri, 08 Aug 2025 07:22 PM IST
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Delhi: Kejriwal government could not spend 15 thousand crores, CAG report reveals
कैग - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

दिल्ली की सत्ता में रहने पर आम आदमी पार्टी सरकार ने लगातार यह आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार से आर्थिक सहयोग न मिलने के कारण उसे सरकार चलाने में परेशानी हो रही है। एमसीडी और दिल्ली सरकार द्वारा संचालित कॉलेज के स्टाफ को वेतन न दे पाने के मामले में भी आम आदमी पार्टी और उसके नेताओं ने यही आरोप लगाया था। लेकिन दिल्ली सरकार द्वारा विधानसभा में पेश किए गए सीएजी रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि तत्कालीन आम आदमी पार्टी सरकार वर्ष 2023-2024 के दौरान 15,327 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं कर पाई। इसमें से 8376.40 करोड़ रुपये सरेंडर करने में देरी के कारण लैप्स हो गए। 

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सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2022-23 में 14,457 करोड़ रुपये के सरप्लस बजट से 2023-24 में दिल्ली सरकार का बजट 6462 करोड़ रुपये नकारात्मक हो गया। यदि केंद्र सरकार ने पेंशन देनदारियों और दिल्ली पुलिस पर 11,123 करोड़ रुपये का खर्च वहन नहीं किया होता तो यह राजस्व घाटे में बदल जाता। राजकोषीय घाटा वर्ष 2019-20 में 416 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2023-24 में 3,934 करोड़ रुपये हो गया। 
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निर्माण क्षेत्र में श्रमिकों की संख्या पर खड़ा हो सकता है नया विवाद
अरविंद केजरीवाल ने अपने कार्यकाल में दिल्ली के निर्माण श्रमिकों के लिए कई कल्याणकारी योजनाओं की शुरुआत की थी। इसमें श्रमिकों को निःशुल्क इलाज से लेकर उन्हें नकद आर्थिक सहयोग करना शामिल था। लेकिन सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार श्रमिकों की सही पहचान नहीं कर पाई है। श्रमिकों का रिकॉर्ड दो लाख श्रमिकों से भी कम पाया गया है, जबकि तत्कालीन दिल्ली सरकार के अनुसार दिल्ली में छः लाख से अधिक श्रमिकों को सहायता दी गई थी। आरोप है कि बड़ी संख्या में श्रमिकों की सही पहचान नहीं किया जा सका है। यह मामला दिल्ली में एक नए राजनीतिक विवाद को पैदा कर सकता है।
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बिल जमा न करना बेहद गंभीर विषय- विजेंद्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि सरकारी विभागों ने बिल जमा नहीं किए थे जिस कारण 346.82 करोड़ रुपये की राशि बकाया थी। उनके अनुसार, इसका अर्थ केवल इतना ही है कि इसको कन्फर्म करने का कोई तरीका नहीं था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022-2023 में यह राशि 574.89 करोड़ रुपये थी। 31 मार्च 2024 तक 3760.84 करोड़ रुपये की राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र जमा न करने को बेहद गंभीर विषय बताया गया है। 

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