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केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, दिल्ली न तो राज्य और न ही राज्य सरकार

Wed, 22 Nov 2017 04:08 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 22 Nov 2017 04:08 AM IST
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Delhi is neither a state nor a state government, Centre to Supreme Court
सुप्रीम कोर्ट

केंद्र सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दिल्ली सरकार खुद को पीड़ित बताकर सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रही है। दिल्ली न तो राज्य और न ही राज्य सरकार। केंद्र ने दिल्ली सरकार के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया कि उसे काम नहीं करने दिया जा रहा।

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हकीकत यह है कि पिछले तीन वर्षों में 650 फाइलों में से सिर्फ तीन फाइलों को ही राष्ट्रपति के पास भेजा गया बाकी सभी का निपटारा कर दिया गया। दिल्ली बनाम उपराज्यपाल मामले में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष केंद्र की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) मनिंदर सिंह ने बहस की शुरुआत करते हुए कहा, दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है।
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दिल्ली न तो राज्य है और न ही राज्य सरकार। दिल्ली को राज्य बनाने के लिए कई बार प्रस्ताव भेजा गया लेकिन संविधान निर्माताओं ने इसे नकार दिया। विधानसभा होने का यह मतलब यह नहीं है कि दिल्ली राज्य है और उसे दूसरे राज्यों की तरह अधिकार प्राप्त है। मनिंदर सिंह ने कहा कि जो चीज संविधान में ही नहीं है उसके लिए बहस करना संविधान के प्रावधानों के विपरीत है।

उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार की दलील है कि वह दिल्ली को राज्य का दर्जा नहीं मांग रही है लेकिन उसे राज्य सरकार वाले अधिकार चाहिए। सिंह ने कहा कि दिल्ली सरकार को संविधान में कार्यकारी अधिकारों में प्रमुखता नहीं दी गई है और न ही ऐसा सोचा गया है। अगर ऐसा हुआ तो अराजकता फैल जाएगी। यहां निगम के जरिये लोगों को लोकतांत्रिक अधिकार दिए गए हैं और वह ही रोजमर्रा के कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं। 

उपराज्यपाल की हर बैठक में शामिल हुए राज्य सरकार के प्रतिनिधि...

Delhi is neither a state nor a state government, Centre to Supreme Court
मनिंदर सिंह ने दिल्ली सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया कि उसे काम करने नहीं दिया जा रहा। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में उपराज्यपाल ने 650 में से सिर्फ तीन फाइलों को राष्ट्रपति के पास भेजा जबकि बाकी का निपटारा कर दिया गया।

दिल्ली सरकार का यह कहना कि दिल्ली से संबंधित मामलों में उपराज्यपाल सरकार के लोगों को आमंत्रित नहीं करते, यह बिल्कुल गलत है। सच्चाई यह है कि अब तक उपराज्यपाल की एक भी ऐसी बैठक नहीं हुई जिसमें दिल्ली सरकार के प्रतिनिधि को शामिल न किया गया हो। 

दिल्ली सरकार की ओर से धुरंधरों ने रखी दलीलें...
 दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील शेखर नाफडे ने संविधान पीठ के समक्ष दलीलें पेश की। दिल्ली सरकार की ओर से इस मामले में वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मणयम, पी चिदंबरम, इंदिरा जय सिंह, राजीव धवन ने संविधान पीठ के समक्ष दलीलें रखी। 
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