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Delhi Elections: 'मेरी टक्कर BJP से, मनीष सिसोदिया तीसरे नंबर पर होंगे', कांग्रेस प्रत्याशी फरहाद सूरी का दावा

Fri, 03 Jan 2025 06:48 PM IST
Amit Sharma Digital अमित शर्मा
Updated Fri, 03 Jan 2025 06:48 PM IST
सार

दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का अभी तक एलान नहीं हुआ है, लेकिन इससे पहले ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोपों का दौर राजनीतिक दलों के नेताओं की ओर से शुरू हो गया है। कई नेता अपने प्रतिद्वंदियों को लेकर तमाम तरह के दावे कर रहे हैं। इसी बीच अमर उजाला से खास बातचीत में जंगपुरा विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी फरहाद सूरी ने कई दावे किए हैं।

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Delhi Elections: 'I am competing with BJP, Manish Sisodia will be at third place', claims Congress candidate
दिल्ली विधानसभा चुनाव- जंगपुरा के सियासी समीकरण - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया केवल अरविंद केजरीवाल के सबसे भरोसेमंद साथी ही नहीं हैं, वे उस दिल्ली मॉडल के सबसे अहम किरदार भी हैं जिनके सहारे आम आदमी पार्टी अपनी राजनीति चलाती है। आम आदमी पार्टी उन्हें दिल्ली की शिक्षा क्रांति के 'हीरो' के तौर पर पेश करती है। लेकिन इस बार उनकी जीत में बड़ा रोड़ा बनकर उभरे हैं जंगपुरा विधानसभा सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार फरहाद सूरी। फरहाद सूरी दिल्ली के पूर्व मेयर भी रह चुके हैं और विकास कार्य करने के लिए अपने क्षेत्र में जाने जाते हैं। उनका स्वयं का मानना है कि उनकी टक्कर सिसोदिया से नहीं, बल्कि भाजपा से होगी। कांग्रेस की क्या संभावनाएं हैं, इसे लेकर हमारे संवाददाता ने फरहाद सूरी से विस्तृत बातचीत की। प्रस्तुत है वार्ता के प्रमुख अंश-
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प्रश्न- फरहाद सूरी जी, आपका सामना मनीष सिसोदिया से है। वे आम आदमी पार्टी के बड़े चेहरे हैं। दिल्ली के शिक्षा मॉडल को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका बहुत महत्त्वपूर्ण रही है। ऐसे में उनके सामने आपकी लड़ाई कितनी मजबूत रहने वाली है?

उत्तर- सबसे पहले तो आपको मैं यह बताना चाहता हूं कि मेरी टक्कर भाजपा से होने वाली है। मनीष सिसोदिया जी यहां पर लड़ाई में ही नहीं हैं। वे तीसरे नंबर की लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी जमानत भी जब्त हो जाए तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा। आप जिसे दिल्ली के शिक्षा मॉडल का हीरो कह रही है, वे शिक्षा मंत्री रहने के साथ-साथ दिल्ली के शराब मंत्री भी रहे हैं। उनके शिक्षा मॉडल का असर दिल्ली में कहीं दिखाई नहीं पड़ा, लेकिन उन्होंने दिल्ली की हर गली में शराब की दुकानें जरूर खुलवा दीं और यह सबको दिखाई दे रहा है। 

आप उनके शिक्षा मॉडल की बात कर रहे हैं, लेकिन मेरे यहां आइये, मैं आपको दिखाता हूं कि एक सरकारी मिडिल स्कूल केवल इसलिए बंद हो गया क्योंकि उसमें पढ़ने के लिए कोई छात्र ही नहीं आया। दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 21000 पद खाली पड़े हुए हैं। आधे स्कूलों में प्रिंसिपल नहीं हैं। दिल्ली की आबादी बढ़ रही है तो छात्र भी बढ़ने चाहिए थे, लेकिन उलटा हो रहा है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या घट रही है। दिल्ली सरकार के स्कूलों का रिजल्ट बेहतर दिखाने के लिए नवीं-ग्यारहवीं में लाखों बच्चों को जानबूझकर फेल किया जा रहा है। क्या यही अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया का शिक्षा मॉडल है? क्या इसे आप एक आदर्श सिस्टम कहेंगे?       
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प्रश्न- मनीष सिसोदिया का दावा है कि उन्होंने पटपड़गंज में बहुत काम किया है। अब जंगपुरा को वे विकास की पटरी पर ले जाएंगे?

उत्तर- इससे ज्यादा हास्यास्पद बात और कुछ नहीं हो सकती कि उन्होंने पटपड़गंज में बहुत काम किया और इसी कारण उनकी पार्टी ने उनकी विधानसभा सीट बदल दी। जनता जानती है कि उन्होंने अपनी विधानसभा पटपड़गंज में कोई काम नहीं किया। उनकी पार्टी जानती थी कि उनका हारना तय है और इसलिए उन्हें वहां से भगा दिया गया। लेकिन जंगपुरा पटपड़गंज से बहुत दूर नहीं है। जंगपुरा की जनता जानती है कि उन्होंने वहां भी कोई काम नहीं किया है और वे यहां भी कोई काम नहीं करेंगे। जंगपुरा की जनता एक भगोड़े का साथ देने वाली नहीं है।  
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प्रश्न- कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक (मुसलमान, दलित और पिछड़ा) उसके पास आ रहा है?  

उत्तर- देखिए, कई बार चुनाव राजनीतिक दलों से होते हैं। लेकिन कई बार चुनाव जनता लड़ने लगती है। सच्चाई यही है कि अरविंद केजरीवाल की असलियत का सबको पता चल चुका है। कोई भी वर्ग केजरीवाल के मॉडल से खुश नहीं है। वे केवल बड़ी-बड़ी घोषणाएं कर चुनाव जीतना चाहते हैं। लेकिन मेरा मानना है कि अब हर वर्ग की जनता ने यह चुनाव अपने हाथ में ले लिया है। लोग जब किसी सरकार के खिलाफ हो जाते हैं तो वे उसे हर हाल में हराना चाहते हैं। केजरीवाल का दिल्ली में समय खत्म हो चुका है। आप देख लेना, केजरीवाल और सिसोदिया दोनों अपना चुनाव हारेंगे। 

प्रश्न- लेकिन आम आदमी पार्टी का कहना है कि उसके पास केजरीवाल का चेहरा है, जबकि भाजपा और कांग्रेस के पास कोई चेहरा ही नहीं है। 

उत्तर- आम आदमी पार्टी के पास चेहरा है, लेकिन सच्चाई यह है कि उनके चेहरे पर बहुत कालिख लग गई है। अब कोई उस चेहरे को देखना नहीं चाहता। आप देख लेना, आम आदमी पार्टी जिस केजरीवाल को अपनी ताकत समझ रही है, वही उसके लिए सबसे बड़े अभिशाप साबित होंगे। मेरा मानना है कि केजरीवाल के कारण ही लोग इस बार आम आदमी पार्टी को वोट नहीं देंगे।

प्रश्न- आप कह रहे हैं कि आपकी टक्कर भाजपा से है। तो क्या आप भाजपा को बेहतर मानते हैं? 

उत्तर- यदि आप दिल्ली की बात कर रहे हैं तो दिल्ली को बर्बाद करने में भाजपा ने भी बराबर का योगदान दिया है। आज पूरे देश में सबसे ज्यादा अपराध  दिल्ली में होते हैं। इसकी जिम्मेदारी भाजपा किसी दूसरे पर नहीं डाल सकती। इसके अलावा हर अल्पसंख्यक जानता है कि भाजपा सत्ता में आएगी तो 'बांटने-काटने' का काम करेगी। ऐसे में दिल्ली का कोई नागरिक भाजपा को लाना नहीं चाहता। 

प्रश्न- कांग्रेस ने इस बार बहुत अच्छे टिकट दिए हैं। आपने भाजपा और आम आदमी पार्टी के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं?

उत्तर- आप ठीक कह रहे हैं। पार्टी ने बहुत अच्छे लोगों को मैदान में उतारा है और मेरा विश्वास है कि कांग्रेस इस बार चुनाव में बहुत शानदार प्रदर्शन करेगी 

प्रश्न- चूंकि, आप इस बार मैदान में मजबूती से लड़ रहे हैं, यदि दिल्ली में त्रिशंकु विधानसभा वाली स्थिति बनती है तो क्या कांग्रेस एक बार फिर केजरीवाल को समर्थन देगी?

उत्तर- मुझे लगता है कि ऐसी स्थिति ही नहीं आएगी। कांग्रेस अपने दम पर सरकार में वापसी करने में सफल रहेगी।
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