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El Nino: 2024 में जलवायु परिवर्तन के कारण भीषण तबाही मचा सकता है अल नीनो, दुनिया का बढ़ सकता है तापमान
Wed, 18 Jan 2023 12:37 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 18 Jan 2023 12:37 AM IST
सार
अल नीनो एक जलवायु परिस्थिति है, जो कि प्रशांत क्षेत्र में समुद्र के तापमान और हवाओं द्वारा संचालित एक प्राकृतिक दोलन का हिस्सा है। अल नीनो उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों के दौरान होता है।
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जलवायु परिवर्तन सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पेक्सेल्स
विस्तार
जलवायु परिवर्तन से होने वाले दुष्प्रभाव के कारण ‘अल नीनो’ 2024 में भीषण तबाही मचा सकता है। इसके कारण दुनियाभर का तापमान बढ़ सकता है। हाल ही में दुनिया के तापमान को लेकर वैज्ञानिकों ने फिर से चेतावनी जारी की है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, अनुमानित अल नीनो का प्रभाव इस साल के अंत से शुरू हो जाएगा। इसके कारण वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती और इससे भीषण लू चलेगी। इसका प्रभाव 2016 में भी देखने को मिला था। वह इतिहास में सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया था।
अल नीनो एक जलवायु परिस्थिति है, जो कि प्रशांत क्षेत्र में समुद्र के तापमान और हवाओं द्वारा संचालित एक प्राकृतिक दोलन का हिस्सा है। अल नीनो उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों के दौरान होता है।
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अमेरिका और यूरोप में भीषण गर्मी
पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ के कारण अमेरिका और यूरोप में भीषण गर्मी से लेकर पाकिस्तान और नाइजीरिया में विनाशकारी बाढ़ तक, लाखों लोगों को नुकसान हो रहा है।
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वैज्ञानिकों के मुताबिक, अनुमानित अल नीनो का प्रभाव इस साल के अंत से शुरू हो जाएगा। इसके कारण वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती और इससे भीषण लू चलेगी। इसका प्रभाव 2016 में भी देखने को मिला था। वह इतिहास में सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया था।
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अल नीनो एक जलवायु परिस्थिति है, जो कि प्रशांत क्षेत्र में समुद्र के तापमान और हवाओं द्वारा संचालित एक प्राकृतिक दोलन का हिस्सा है। अल नीनो उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों के दौरान होता है।
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अमेरिका और यूरोप में भीषण गर्मी
पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ के कारण अमेरिका और यूरोप में भीषण गर्मी से लेकर पाकिस्तान और नाइजीरिया में विनाशकारी बाढ़ तक, लाखों लोगों को नुकसान हो रहा है।