Delhi Education Model: दिल्ली के शिक्षा मॉडल पर गुजरात में घमासान, भाजपा-कांग्रेस ने केजरीवाल को घेरा
Delhi Education Model: दिल्ली सरकार के स्कूलों में प्रधानाचार्यों, उपप्रधानाचार्यों और अध्यापकों की भारी कमी है। 84 फीसदी स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं हैं तो एक तिहाई से कुछ अधिक स्कूलों में उपप्रधानाचार्य नहीं हैं। इसी प्रकार 40 फीसदी स्कूलों में टीजीटी और 22 फीसदी स्कूलों में पीजीटी टीचर्स नहीं हैं...
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आम आदमी पार्टी गुजरात में भी अपने चुनाव प्रचार के लिए दिल्ली की बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और अच्छी क्वॉलिटी की शिक्षा का सहारा ले रही है। आम आदमी पार्टी नेता अपनी चुनावी सभाओं में गुजरात में सत्ता आने पर गुजरात के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और अच्छी शिक्षा देने का दावा कर रहे हैं। लेकिन अरविंद केजरीवाल अब दिल्ली के बेहतर शिक्षा मॉडल पर ही गुजरात में घिर गए हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों ने आम आदमी पार्टी के बेहतर शिक्षा मॉडल को झूठ का पुलिंदा करार दिया है।
दिल्ली सरकार के स्कूलों में प्रधानाचार्यों, उपप्रधानाचार्यों और अध्यापकों की भारी कमी है। 84 फीसदी स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं हैं तो एक तिहाई से कुछ अधिक स्कूलों में उपप्रधानाचार्य नहीं हैं। इसी प्रकार 40 फीसदी स्कूलों में टीजीटी और 22 फीसदी स्कूलों में पीजीटी टीचर्स नहीं हैं। आरोप है कि भारी संख्या में स्कूलों में विज्ञान और गणित की पढ़ाई नहीं हो रही है। केजरीवाल सरकार के सात साल से ज्यादा शासन के दौरान दिल्ली में कोई स्कूल-कॉलेज न बनाए जाने के भी आरोप हैं। इन आंकड़ों के सामने आने से केजरीवाल के बेहतर शिक्षा देने के दावों पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
बच्चों की पूरी नहीं हो रही पढ़ाई- भाजपा
दिल्ली भाजपा प्रवक्ता नेहा शालिनी दुआ ने अमर उजाला से कहा कि केजरीवाल सरकार हर जगह अपने स्कूलों के सबसे बेहतर होने का दावा करती है, लेकिन उनके दावों की पोल इन तथ्यों के सामने आने के बाद खुल गई है कि सरकारी स्कूल प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के बिना ही चल रहे हैं। सरकार केवल ठेके पर शिक्षकों को रखकर पढ़ाई करा रही है, जबकि फुल टाइम टीचरों के न होने से बच्चों का भविष्य अंधेरे में पड़ गया है। उन्होंने कहा कि ज्यादा चिंताजनक बात है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में विज्ञान और गणित की पढ़ाई नहीं हो रही है। इससे इन बच्चों के विकास पर गहरा असर पड़ रहा है।
भाजपा नेता ने कहा कि उन्हें बच्चों की ओर से इस बात की शिकायतें मिल रही हैं कि उनकी कक्षाएं पूरी नहीं चलाई जा रही हैं। कई जगहों पर एक ही कक्षा में भारी संख्या में बच्चों को बिठाकर कोर्स पूरे किये जा रहे हैं, जबकि बच्चों को इस तरह की पढ़ाई कराने से कोई लाभ नहीं हो रहा है। उन्होंने कहा कि पूरा देश दिल्ली के इस खराब शिक्षा व्यवस्था को देख रहा है, इसलिए अब अऱविंद केजरीवाल को अपने स्कूलों को बेहतर बताने का दावा नहीं करना चाहिए।
नेहा शालिनी दुआ ने कहा कि दिल्ली सरकार ने कक्षाओं के निर्माण के नाम पर टॉयलेट्स बनाकर पैसों की धोखाधड़ी की है। कमजोर स्तर के कमरों के निर्माण में बाजार मूल्य से ज्यादा पैसा लगाकर भ्रष्टाचार किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पैसा अरविंद केजरीवाल सरकार अपने विज्ञापन पर खर्च कर रही है। उन्होंने कहा कि यह दिल्ली के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है और अरविंद केजरीवाल को दिल्ली के बच्चों को जवाब देना चाहिए कि उनकी शिक्षा के साथ यह खिलवाड़ क्यों हो रहा है।
कम हो रही बच्चों की संख्या- कांग्रेस
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल की बेहतर शिक्षा मॉडल की कलई खुल गई है। उन्होंने कहा है कि यदि दिल्ली सरकार के स्कूल बेहतर होते तो ज्यादा से ज्यादा लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए इन्हीं स्कूलों का सहारा लेते। लेकिन देखने में आ रहा है कि दिल्ली सरकार के स्कूलों में एडमिशन लेने वाले बच्चों की संख्या में लगातार गिरावट आ रही है। उन्होंने कहा कि केवल यह आंकड़ा ही दिल्ली सरकार के बेहतर शिक्षा के दावे को खोखला साबित कर देता है।
संदीप दीक्षित ने कहा कि दिल्ली में पिछले सात-आठ सरकारी स्कूलों में एक भी नया स्कूल नहीं बना है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूलों को बेहतर दिखाने के लिए केवल कुछ स्कूलो की दीवारों को रंगने-पोतने का काम किया गया है, इसी को दिखाकर बड़े-बड़े विज्ञापन किए जा रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि दिल्ली में शीला दीक्षित सरकार के बाद गरीबों के बच्चों को पढ़ाई कराने के लिए कोई नया काम नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि अब अरविंद केजरीवाल के शिक्षा मॉडल की कलई खुल गई है।