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Delhi: महंगी बिजली के विरोध में भाजपा का बड़ा विरोध प्रदर्शन, PPAC वापस लेने की मांग
Sun, 14 Jul 2024 06:14 PM IST
अभिषेक दीक्षित
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Sun, 14 Jul 2024 06:14 PM IST
सार
भाजपा के अनुसार, अब आम उपभोक्ताओं पर PPAC का बोझ 2015 में 1.5 फ़ीसदी से बढ़कर 37.5 फ़ीसदी हो चुका है। अलग-अलग कम्पनियों के द्वारा लगभग 8.75 फ़ीसदी की नई बढ़ोतरी के बाद यह 45 फीसदी तक हो जाएगा।
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भाजपा करेगी प्रदर्शन
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
दिल्ली भाजपा ने राजधानी में बिजली महंगी होने के खिलाफ सोमवार को बड़े विरोध प्रदर्शन का एलान किया है। पार्टी का कहना है कि दिल्लीवासियों को महंगी बिजली दी जा रही है, लेकिन इसका कारण बिजली खपत में बढ़ोतरी होना नहीं है। उसका आरोप है कि बिजली महंगी होने का सबसे बड़ा कारण समय रहते अतिरिक्त बिजली की खरीद न किया जाना है, जबकि इसी की आड़ में छिपकर PPAC के जरिए हर साल अप्रत्यक्ष तरीके से बिजली बिल में बढ़ोतरी की जा रही है। पार्टी सोमवार को दिल्ली के सभी जिलों में बने बिजली दफ्तरों पर प्रदर्शन करेगी।
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भाजपा के अनुसार, अब आम उपभोक्ताओं पर PPAC का बोझ 2015 में 1.5 फ़ीसदी से बढ़कर 37.5 फ़ीसदी हो चुका है। अलग-अलग कम्पनियों के द्वारा लगभग 8.75 फ़ीसदी की नई बढ़ोतरी के बाद यह 45 फीसदी तक हो जाएगा। पार्टी के अनुसार एक बार PPAC बढ़ाने के बाद इसे कभी वापस नहीं लिया जाता, जिससे इसकी मार बढ़ती जा रही है। दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने चेयरमैन को पत्र लिखकर PPAC पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
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टकराव के बिंदु
- पत्र में कहा गया है कि 1.5 फ़ीसदी बिजली खरीद समझौता शुल्क (पी.पी.ए.सी.) पहली बार दिल्ली में 2011 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाया गया था। 2014 में राष्ट्रपति शासन के दौरान केन्द्रीय बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने इसे वापस ले लिया था। अगस्त 2014 से सितंबर 2015 के बीच शुल्क वापस नहीं लगा।
- 2015 में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार सत्ता में आई। उसने बिजली वितरण कम्पनियों की पीपीएसी और पेंशन अधिभार को फिर से लागू करने की मांग का समर्थन किया और पी.ए.सी. वैध हो गया। डीईआरसी ने पीपीएसी को वितरण कम्पनियों के लिए स्वीकृत व्यवसाय विनियामक योजना का एक घटक बना दिया। भाजपा इसे वापस लेने की मांग कर रही है।
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