दिल्ली विधानसभा चुनावः शाह, नड्डा और जावडे़कर की तिकड़ी ने संभाला चुनावी मोर्चा
- महज चुनाव प्रचार तक सीमित किए गए स्थानीय नेता
- चुनाव को राष्ट्रवाद के पिच पर लाने की हो रही मशक्कत
विस्तार
दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने स्थानीय नेताओं की भूमिका सिर्फ चुनाव प्रचार तक सीमित कर दी है। चुनाव रणनीति की कमान गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर ने संभाल ली है। पार्टी की रणनीति बेहतर बूथ प्रबंधन के जरिये चुनाव को राष्ट्रवाद की पिच पर लाने की है। इसके लिए सभी नेता राम मंदिर निर्माण, नागरिकता संशोधन कानून और अनुच्छेद 370 को निरस्त करने जैसे मुद्दे उठा रहे हैं।
इस बार का विधानसभा चुनाव भाजपा बीते चुनाव के मुकाबले नई रणनीति के तहत लड़ रही है। इसमें स्थानीय नेतृत्व की भूमिका केंद्रीय नेतृत्व द्वारा तय की गई रणनीति के तहत महज चुनाव प्रचार और जनसंपर्क तक सीमित कर दी गई है। स्थानीय नेताओं को कहां जाना है और क्या बोलना है इसके दिशा निर्देश भी पहले से तय हैं।
शाह, नड्डा और जावड़ेकर का सबसे अधिक ध्यान बूथ प्रबंधन पर है। इनकी रणनीति दिल्ली के सभी 2,689 से जुड़ी बूथ कमेटियों को उन मतदाताओं के लगातार संपर्क में रखना है जिन्होंने लोकसभा चुनाव में भाजपा को वोट दिए थे। इस क्रम में संघ की ओर से उतारे गए करीब 40,000 कार्यकर्ता भी इसी रणनीति के तहत घर-घर लोगों से संपर्क कर रहे हैं। गौरतलब है कि बीते लोकसभा चुनाव में भाजपा को राजधानी में करीब 56 फीसदी मत हासिल हुए थे।
नुक्कड़ सभाओं, छोटी रैलियों और जनसंपर्क पर जोर
लोकसभा चुनाव का वोट बरकरार रखने के लिए पार्टी की रणनीति बड़ी की जगह छोटी रैलियां, नुक्कड़ सभाएं और सर्वाधिक घर-घर संपर्क करने की है। यही कारण है कि खुद शाह और नड्डा भी बड़ी के बदले छोटी रैलियां कर रहे हैं। बड़ी रैलियों की जगह इनके अधिक से अधिक रोडशो कराने के कार्यक्रम तय किए जा रहे हैं। स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं को भी घर घर संपर्क करने के लिए कहा गया है।
आखिरी दौर में पीएम को भी मैदान में उतारने की तैयारी
बीते विधानसभा चुनाव में पीएम मोदी ने पहले ही मोर्चा संभाल लिया था। इस बार पार्टी की रणनीति उन्हें अंतिम समय में मैदान में उतारने की है। पीएम की तीन से चार रैलियां हो सकती हैं। इसके अलावा उनके रोड शो कराने के विकल्प पर भी विचार हो रहा है। पार्टी के रणनीतिकारों को उम्मीद है कि अंतिम समय में पीएम के चुनाव प्रचार में उतरने से पार्टी के पक्ष में एकाएक माहौल तैयार होगा।