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Sultanpur Majra Seat: कभी कांग्रेस का गढ़ रही सुल्तानपुर माजरा से किसे चुनेगी जनता, ऐसा है इसका चुनावी इतिहास

Thu, 23 Jan 2025 08:01 PM IST
संध्या कुमारी इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला
इलेक्शन डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या कुमारी Updated Thu, 23 Jan 2025 08:01 PM IST
सार

Sultanpur majra seat: सुल्तानपुर माजरा से अब तक पांच बार कांग्रेस और दो बार आम आदमी पार्टी को जीत मिली है।  भाजपा यहां से अब तक जीत नहीं सकी है। इस बार आप से मुकेश कुमार अहलावत, कांग्रेस से जय किशन और भाजपा से कर्म सिंह कर्मा मैदान में हैं। 

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Delhi Assembly Election 2025 Sultanpur Majra Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। नामांकन दाखिल करने की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। अब तय हो चुका है कि कि किस सीट पर किन प्रत्याशियों के बीच मुकाबला होगा। दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में से एक सुल्तानपुर माजरा विधानसभा सीट भी है। सुल्तानपुर माजरा कभी कांग्रेस का गढ़ रही। 2015 और 2020 में इस सीट पर आम आदमी पार्टी को जीत मिली। सुल्तानपुर माजरा उन सीटों में शामिल है जहां अब तक भाजपा को जीत नहीं मिली है।

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कांग्रेस ने इस बार यहां से चार बार जीत चुके जय किशन को फिर से टिकट दिया है। आप ने मौजूदा विधायक मुकेश कुमार अहलावत पर फिर से विश्वास जताया है। वहीं, भाजपा के टिकट पर कर्म सिंह कर्मा मैदान में हैं। 
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दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में सुल्तानपुर माजरा में कब कौन जीता? कब कितने वोट पड़े? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला हो सकता है? आइये जानते हैं…

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दिल्ली को विधानसभा मिलने की ऐसी है कहानी
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई। 

दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी। 

राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।

इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्ण समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालकृष्ण समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और विधायक मिला। 

1993 में सुल्तानपुर माजरा में पहली बार चुनाव
1993 में दिल्ली को विधानसभा मिलने के बाद ही यहां पहली बार चुनाव हुए। इस चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय रहा। लड़ाई कांग्रेस, जनता दल और भाजपा के बीच हुई। इस त्रिकोणीय मुकाबले में जीत कांग्रेस को मिली। कांग्रेस के जय किशन में जनता दल के नन्द राम बागड़ी को 7412 वोटों से हराया था। भाजपा उम्मीदवार भगवान दास तीसरे स्थान पर रहे।

Delhi Assembly Election 2025 Sultanpur Majra Assembly Seat Profile and History News In Hindi
दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

दूसरी बार जीते कांग्रेस की जीत 
साल 1998 में हुए विधानसभा चुनाव में सुल्तानपुर माजरा का नतीजा एक फिर कांग्रेस के पक्ष में रहा। इस बार मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच था। कांग्रेस की सुशीला देवी ने  भाजपा के कैलाश को 16933 वोटों से हराया। 

2003 में जय किशन की वापसी 
2003 में हुए विधानसभा चुनाव में सुल्तानपुर माजरा के नतीजे लगातार तीसरी बार कांग्रेस के पक्ष में रहे। इस बार कांग्रेस ने पूर्व विधायक जय किशन को मैदान में उतारा था। जय किशन यहां से अपनी दूसरी और पार्टी को तीसरी जीत दिलाई। कांग्रेस के जय किशन ने भाजपा के सतीश कुमार को 18921 वोटों से हराया। 

2008: कांग्रेस ने लगातार चौथी बार दर्ज की जीत
2008 में भी इस सीट पर नतीजों में कोई बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली की सत्ता में कांग्रेस लगातार तीसरी बार वापसी की। वहीं, सुल्तानपुर माजरा में पार्टी ने जीत का चौका लगाया। यहां से एक बार  फिर कांग्रेस के जय किशन  जीतने में सफल रहे। उन्होंने भाजपा के नन्द राम बागड़ी को हराया। बागड़ी और जय किशन के बीच 1993 में भी मुकाबला हुआ था। तब भी जय किशन ही जीतने में सफल रहे थे। कांग्रेस के जय किशन ने भाजपा के नंद लाल को 18675 वोटों से हरा दिया। 

2013: चौैथी बार जीते जय किशन
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक टर्निंग पाइंट साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। सुल्तानपुर माजरा विधानसभा सीट पर मुकाबला आप और कांग्रेस के बीच ही था। लेकिन कांग्रेस के जय किशन को यहां से एक बार फिर जीत मिली। कांग्रेस के जय किशन ने आप के संदीप कुमार को 1112 वोटों से हराया। 

2015: आप के संदीप कुमार को सफलता 
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव कराने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की। 

इस चुनाव में सुल्तानपुर माजरा सीट पर पहली बार आप और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला हुआ। 64439 वोट के भारी अंतर से चुनाव जीतकर आप ने यहां अपना खाता खोला। पिछली बार इस सीट पर हारे संदीप कुमार ने बड़ी जीत दर्ज की। आप को 80269 वोट मिले, जबकि भाजपा को 15830 वोट मिले। 

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दिल्ली चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला

2020: आप को फिर से सफलता 
2020 के विधानसभा चुनाव में आप आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। सुल्तानपुर माजरा के नतीजों की बात करें तो यहां से आप के मुकेश कुमार अहलावत को बड़ी जीत मिली। मुकेश कुमार अहलावत ने भाजपा के राम चंद्र चावरिया को 48,052 वोटों से हराया था। आप को 74573 वहीं  भाजपा को 26521 वोट मिले। 

अबकी बार कैसे हैं समीकरण? 
2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने सुल्तानपुर माजरा सीट से मौजूदा विधायक मुकेश कुमार अहलावत को ही टिकट दिया गया है। 2020 में आप के टिकट पर वो पहली बार विधायक बने। इसके पहले वह बीएसपी से जुड़े थे और 2008 और 2013 में दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़े थे, लेकिन दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।
कांग्रेस ने चार बार इस सीट पर विधायक रहे जय किशन को मैदान में उतारा है। भाजपा ने यहां से कर्म सिंह कर्मा को टिकट दिया है। सुल्तानपुर माजरा सीट पर इस बार कुल 12 उम्मीदवार मैदान में हैं।   

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