Bawana Assembly Seat: आप लगाएगी जीत की हैट्रिक या किसी और को चुनेगा बवाना, ऐसा है इस सीट का चुनावी इतिहास
Bawana Seat: दिल्ली में बवाना विधानसभा सीट पर अभी आप के जय भगवान विधायक हैं। भाजपा ने रवीन्द्र कुमार तो कांग्रेस ने तीन बार विधायक रह चुके सुरेंदर कुमार को टिकट दिया है। आइये इस सीट का चुनावी इतिहास जानते हैं...
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दिल्ली में विधानसभा चुनावों की तारीखों का एलान हो चुका है। दिल्ली में 5 फरवरी को विधानसभा के चुनाव होने है। सभी पार्टियां चुनाव प्रचार में लगी हुई हैं। इस कड़ी में हम आपको दिल्ली की सभी सीटों का हाल बता रहे हैं। आज बात बवाना विधानसभा सीट की करेंगे।
दिल्ली विधानसभा चुनाव के इतिहास में बवाना में कब कौन जीता? पिछले चुनाव में कैसे नतीजे रहे थे? इस बार कैसा मुकाबला है? आइये जानते हैं…
सबसे पहले दिल्ली को विधानसभा मिलने की कहानी जान लीजिए
दिल्ली को विधानसभा कैसे मिली, इसकी कहानी 1952 से शुरू हुई। 1952 पार्ट-सी राज्य के रूप में दिल्ली को एक विधानसभा दी गई। 1956 में उस विधानसभा को भंग कर दिया गया। 1966 में दिल्ली को एक महानगर परिषद दी गई।
दिल्ली राज्य विधानसभा 17 मार्च 1952 को पार्ट-सी राज्य सरकार अधिनियम, 1951 के तहत अस्तित्व में आई। 1952 की विधानसभा में 48 सदस्य थे। मुख्य आयुक्त को उनके कार्यों के निष्पादन में सहायता और सलाह देने के लिए एक मंत्रिपरिषद का प्रावधान था, जिसके संबंध में राज्य विधानसभा को कानून बनाने की शक्ति दी गई थी।
राज्य पुनर्गठन आयोग (1955) की सिफारिशों के बाद दिल्ली 1 नवंबर 1956 से भाग-सी राज्य नहीं रही। दिल्ली विधानसभा और मंत्रिपरिषद को समाप्त कर दिया गया और दिल्ली राष्ट्रपति के प्रत्यक्ष प्रशासन के तहत केंद्र शासित प्रदेश बन गया। दिल्ली में एक लोकतांत्रिक व्यवस्था और उत्तरदायी प्रशासन की मांग उठने लगी। इसके बाद दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के तहत महानगर परिषद बनाई गई। यह एक सदनीय लोकतांत्रिक निकाय था जिसमें 56 निर्वाचित सदस्य और 5 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे।
इसके बाद भी विधानसभा की मांग उठती रही। 24 दिसंबर 1987 को भारत सरकार ने सरकारिया समिति (जिसे बाद में बालकृष्णन समिति कहा गया) नियुक्त की। समिति ने 14 दिसंबर 1989 को अपनी रिपोर्ट पेश की और सिफारिश की कि दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश बना रहना चाहिए, लेकिन आम आदमी से जुड़े मामलों से निपटने के लिए अच्छी शक्तियों के साथ एक विधानसभा दी जानी चाहिए। बालाकृष्णन समिति की सिफारिश के अनुसार, संसद ने संविधान (69वां संशोधन) अधिनियम, 1991 पारित किया, जिसने संविधान में नए अनुच्छेद 239AA और 239AB डाले, जो अन्य बातों के साथ-साथ दिल्ली के लिए एक विधानसभा की व्यवस्था करते हैं। लोक व्यवस्था, पुलिस और भूमि के मुद्दों पर विधानसभा को कानून बनाने का अधिकार नहीं था। 1992 में परिसीमन के बाद 1993 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव बाद दिल्ली को एक निर्वाचित विधानसभा और विधायक मिला।
कैसा रहा बवाना में चुनावों का इतिहास?
बवाना सीट पर पहला चुनाव 1972 में हुआ था। उस समय यहां से निर्दलीय उम्मीदवार टेक चंद ने जीत दर्ज की थी। निर्दलीय उम्मीदवार टेक चंद ने कांग्रेस के राम सिंह को 4,958 वोट से हराया था। इसके बाद बवाना सीट पर साल 1977 में चुनाव हुआ। इस चुनाव में जनता पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच मुकाबला हुआ। नतीजा जनता पार्टी के टिकट पर उतरे रोहतास के पक्ष में रहा। उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार करतार सिंह को 6,543 मत से शिकस्त दी।
इसके बाद 1983 में भी इस सीट पर चुनाव हुआ था, जिसमें लोकदल के रोहताश सिंह को जीत मिली थी। रोहताश सिंह ने कांग्रेस के करण सिंह को 5,432 वोटों से हराया था।
दिल्ली के विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद 1993 में फिर से विधानसभा के चुनाव हुए। इस चुनाव में बवाना सीट पर भारतीय जनता पार्टी के चांद राम ने सफलता हासिल की।
1998: कांग्रेस का सीट पर कब्जा
1998 में हुए चुनावों में कांग्रेस के सुरेंद्र कुमार को जीत मिली। इस चुनावों में दूसरे नंबर पर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे ओम प्रकाश रंग रहे। कांग्रेस के सुरेंद्र कुमार ने निर्दलीय उम्मीदवार को 25,698 वोटों से हरा दिया था। 1998 इस चुनाव में भाजपा ने बवाना समेत तीन सीटें अपने इंडियन नेशनल लोकदल के लिए छोड़ी थीं। बवाना सीट पर इनेलो उम्मीदवार हेम चंद्र तीसरे स्थान पर रहे। उन्हें कुल 8588 वोट मिले। हेम चंद्र अपनी जमानत भी नहीं बचा सके।
2003: कांग्रेस ने बरकरार रखी सीट
इस चुनाव में बवाना के नतीजे में कुछ नहीं बदला। कांग्रेस के मौजूदा विधायक सुरेंद्र कुमार ने एक और सफलता के साथ यहां लगातार दूसरी जीत दर्ज की। सुरेंद्र कुमार ने भाजपा उम्मीदवार राजकुमार को 14,522 मत से शिकस्त दी।
2008: कांग्रेस के सुरेंद्र कुमार की हेडट्रिक
परिसीमन के बाद बवाना विधानसभा सीट पर हुए चुनावों में कांग्रेस और भाजपा के बीच मुकाबला हुआ। कांग्रेस से मौजूदा विधायक सुरेंद्र कुमार और भाजपा ने पूर्व विधायक चांद राम को टिकट दिया। हालांकि, चुनावी नतीजा तीसरी बार भी सुरेंद्र कुमार के पक्ष में रहा। कांग्रेस के सुरेंद्र कुमार ने भाजपा के चांद राम को 17,142 वोट से हराया।
2013: भाजपा-आप में हुआ मुकाबला
दिल्ली की राजनीति के लिए साल 2013 एक अहम कड़ी साबित हुआ। इस चुनाव में मुकाबले में कांग्रेस-भाजपा के अलावा इस बार भ्रष्टाचार आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी भी थी। बवाना विधानसभा सीट पर मुकाबला पिछले चुनावों से अलग रहा। चुनाव नतीजे आए तो भाजपा को जीत मिली लेकिन उसे चुनौती नई आम आदमी पार्टी से मिली। 2013 के विधानसभा चुनावों के नतीजों में भाजपा के गुगन सिंह ने आप के मनोज को 25639 वोटों से हराया था। आप को मनोज को 42768 वोट मिले थे। वहीं, लगातार तीन बार बवाना से जीते सुरेंद्र कुमार इस बार तीसरे स्थान पर खिसक गए। सुरेंद्र कुमार को 42,054 वोट से संतोष करना पड़ा।
2015: आप को मिली पहली सफलता
2015 में फिर से दिल्ली में विधानसभा चुनाव करवाने पड़े। 2014 में मात्र 49 दिन सरकार चलाने के बाद केजरीवाल ने इस्तीफा दे दिया था। फरवरी 2014 में जब लोकपाल विधेयक पारित नहीं हो पाया तो अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 2015 में फिर से चुनाव कराए गए और केजरीवाल ने 70 में से 67 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी की।
इस चुनाव में बवाना सीट पर आप और भाजपा के बीच मुख्य मुकाबला हुआ। आप ने 50,557 वोट के भारी अंतर से चुनाव जीतकर यहां अपना खाता खोला। आप के टिकट पर चुनाव लड़े वेद प्रकाश को यहां से जीत मिली। आप उम्मीदवार वेद प्रकाश को 1,08,928 वोट मिले, जबकि भाजपा गुगन सिंह को केवल 58,371 वोट मिले।
2020: आप को दूसरी सफलता
2020 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने फिर जबरदस्त जनादेश हासिल किया। आप को 70 में से कुल 62 सीटों पर जीत मिली। बवाना के नतीजों की बात करें तो यहां से आप के जय भगवान ने जीत दर्ज की। लेकिन ये जीत पिछली बार जितनी बड़ी नहीं थी। आप नेता जय भगवान ने भाजपा के रविंद्र कुमार को 11,526 वोट से हराया था। आप को 95,715 वोट जबकि दूसरे नंबर पर रही भाजपा को 84,189 वोट मिले।
अबकी बार कैसे हैं समीकरण?
2025 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए आम आदमी पार्टी ने बवाना सीट से मौजूदा विधायक जय भगवान को टिकट दिया है। वहीं, भाजपा ने यहां से रवीन्द्र कुमार (इंद्रराज) को उतारा है। कांग्रेस ने बवाना सीट से तीन बार विधायक रह चुके सुरेंदर कुमार को फिर से टिकट दिया है।