दिल्ली अग्निकांड में हुई मौतों के लिए कम जिम्मेदार नहीं हैं ये '3600' रुपये, ये है हकीकत!
सूत्र बताते हैं कि चार मंजिला इमारत के मालिक रेहान ने ग्राउंड फ्लोर और पहली मंजिल पर मशीन व पैकिंग यूनिट लगा रखी थी। यहां पर मोल्डिंग, टोपी, बैग, जैकेट व दूसरा सामान बनता था। इमारत की दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर बने 18 कमरे किराये पर दिए गए थे। फैक्ट्री मालिक रेहान ने सारा कामकाज यानी किराया वसूलना, नए लोगों को लाना या पुरानों की छुट्टी करना, माल भेजना, नियमों के विपरित और मनमर्जी से इमारत का इस्तेमाल करने के लिए मार्केट के दूसरे लोगों की भांति विभिन्न एजेंसियों तक कथित तौर पर एक तय राशि पहुंचाना, बचपन के दोस्त फुरकान को सौंप रखा था।
वहां काम करने वाले लोग फुरकान को मैनेजर साहब कह कर बुलाते थे। तीसरी मंजिल पर चार कमरे सोहेल को दिए गए थे, जो कि रिश्ते में रेहान का साला लगता है। जांच टीम के अनुसार, पूरी इमारत में बिजली के सात कॉमर्शियल मीटर और बाकी सब-मीटर लगे हुए थे।
हर माह लिखी जाती रही बड़े हादसे की स्क्रिप्ट
अनाज मंडी में रेहान की फैक्ट्री के अलावा दूसरी बहुत सी इमारतें हैं, जिनका नियमों का उल्लंघन कर विस्तार किया गया है। मनमर्जी तरीके से मंजिलें बढ़ाना और मास्टर प्लान को तोड़ मरोड़ कर अवैध निर्माण करना, ये सब वहां आसानी से संभव हो जाता है। अग्निकांड वाली इमारत जैसे हालात तो दूसरी बिल्डिंगों के भी हैं। वहां पर नियमों को ताक पर रख बहुत कुछ गलत हो रहा है। जांच टीम के अनुसार, रेहान की ओर से भी कथित तौर पर हर माह 3,600 रुपये दिए जाते थे।
हालांकि ये रुपये मैनेजर फुरकान उस व्यक्ति को देता था, जो मार्केट में ऐसे सभी अवैध निर्माण या कामकाज को नियमित कराने के लिए एकत्रित करता था। ये रुपये देने के बाद किसी की कोई टेंशन नहीं होती थी। किसी एजेंसी की हिम्मत नहीं होती थी कि वह जांच के लिए इमारत के भीतर आ जाए। यह भी सामने आया है कि यह राशि किसी एक विभाग में नहीं पहुंचती थी, बल्कि उसे कई एजेंसियों में विभाजित किया जाता रहा है।