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संसदीय समिति की रिपोर्ट: सीबीआई के पास 1000 से ज्यादा मामले लंबित, देर से मिला न्याय कोई न्याय नहीं 

Thu, 24 Mar 2022 07:15 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Amit Mandal Updated Thu, 24 Mar 2022 07:15 PM IST
सार

संसदीय समिति कहा कि देर से मिला न्याय बिल्कुल भी न्याय नहीं है और दशकों तक मामले नहीं चल सकते। इसके साथ ही इस बात पर भी चिंता जताई की कई राज्यों ने कुछ मामलों में सीबीआई जांच की अनुमति नहीं दी है। 

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Delayed justice is no justice at all, says Par panel on pending CBI probe
सीबीआई - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

एक संसदीय समिति ने सीबीआई के पास 1,000 से अधिक मामलों के लंबित होने का जिक्र करते हुए कहा कि देर से मिला न्याय कोई न्याय नहीं है। समिति ने कहा कि मामले दशकों तक नहीं चल सकते। समिति ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को लंबित मामलों के निपटान के लिए एक रोडमैप तैयार करने को कहा। समिति ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि लंबित होने के सवाल पर सीबीआई ने एक लिखित जवाब में कहा है कि इस साल 31 जनवरी तक 1,025 मामलों की जांच लंबित है, जिनमें से 66 मामले पांच साल से अधिक समय से लंबित हैं।

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कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाने पर दिया जोर 
समिति का मानना है कि अगर स्टाफ की जरूरतों का ध्यान रखा जाए तो मामलों के लंबित होने को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है। समिति इसलिए सरकार को जल्द से जल्द सीबीआई का कैडर पुनर्गठन करने की सिफारिश करती है। पैनल ने यह भी सिफारिश की कि सीबीआई को प्रतिनियुक्ति पर अपनी निर्भरता को कम करने के प्रयास करने चाहिए और कम से कम पुलिस उपाधीक्षक के पद तक के स्थायी कर्मचारियों की भर्ती करने का प्रयास करना चाहिए।
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देर से मिला न्याय कोई न्याय नहीं
समिति का विचार है कि देर से मिला न्याय बिल्कुल भी न्याय नहीं है और दशकों तक मामले नहीं चल सकते। इसलिए समिति सिफारिश करती है कि सीबीआई उनके पास लंबित मामलों के निपटारे के लिए एक रोडमैप तैयार करे और समिति को सूचित करे।  
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पूछा, कितने मामलों पर अदालत ने लगाई रोक
रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति यह भी जानना चाहेगी कि सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे कितने मामलों पर अदालतों ने रोक लगा दी है। इसने चिंता के साथ इस पर भी ध्यान दिया कि कई राज्यों ने सीबीआई के लिए अपनी सामान्य सहमति वापस ले ली है। समिति को ऐसे राज्यों का विवरण दिया जा सकता है जिन्होंने अपनी सामान्य सहमति वापस ले ली है। और यह भी बताया जाए कि क्या ऐसे राज्यों ने कुछ मामलों में विशिष्ट सहमति दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ कुल 1,753 शिकायतें मिली हैं, जिसमें 2015-2021 के दौरान सीवीसी के पोर्टल के माध्यम से मिली 968 शिकायतें शामिल हैं।

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