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रक्षा उत्पादन: शीर्ष पांच देशों शामिल होना चाहता है भारत, मेक इन इंडिया को लेकर ये बोले रक्षा सचिव
Thu, 22 Sep 2022 06:28 PM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 22 Sep 2022 06:28 PM IST
सार
राजधानी दिल्ली में पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (पीएएफआई) द्वारा आयोजित "इंडिया: द न्यू हब ऑफ ग्लोबल मैनफैक्चरिंग" में रक्षा सचिव अजय कुमार ने भारत के रक्षा उत्पादन पर विशेष रूप से चर्चा की। इसमें उन्होंने कहा कि पिछले 75 सालों से भारत दुनिया में रक्षा उत्पादों के सबसे बड़े आयातकों में से एक बना हुआ है। वर्तमान की मोदी सरकार इस स्थिति को बदलना चाहती है।
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रक्षा सचिव अजय कुमार
- फोटो : Agency (File Photo)
विस्तार
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने के लिए मेक-इन-इंडिया पर फोकस किया जा रहा है। इसी क्रम में हाल ही में देश का पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था। इसी बीच, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने पर जोर देते हुए रक्षा सचिव अजय कुमार ने कहा कि जब हम आजादी का अमृत काल मना रहे हैं ऐसे में हम कह सकते हैं कि जल्द ही भारत रक्षा उत्पादन में विश्व स्तर पर शीर्ष पांच देशों में शामिल होगा।
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राजधानी दिल्ली में पब्लिक अफेयर्स फोरम ऑफ इंडिया (पीएएफआई) द्वारा आयोजित "इंडिया: द न्यू हब ऑफ ग्लोबल मैनफैक्चरिंग" में रक्षा सचिव अजय कुमार ने भारत के रक्षा उत्पादन पर विशेष रूप से चर्चा की। इसमें उन्होंने कहा कि पिछले 75 सालों से भारत दुनिया में रक्षा उत्पादों के सबसे बड़े आयातकों में से एक बना हुआ है। वर्तमान की मोदी सरकार इसी स्थिति को बदलना चाहती है।
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उन्होंने कहा कि दुनिया में विभिन्न हथियारों का निर्माण बस कुछ मुट्ठी भर देशों द्वारा किया जाता है। वैश्विक स्तर पर रक्षा उत्पादन का एक बहुत बड़ा हिस्सा दुनिया के पांच देशों का है। ये देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्य हैं। उन्होंने भारत में रक्षा उत्पादन बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि इसलिए अगर भारत को आने वाले 25 सालों में दुनिया में अपना प्रभाव बनाना है तो रक्षा उत्पादन में हमें अग्रणी होना होगा। उन्होंने कहा कि भारत की यह आकांक्षा रक्षा उद्योग क्षमताओं के विकास के बहुत नजदीक है।
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रक्षा सचिव अजय कुमार ने यह भी कहा कि देश की मेक-इन-इंडिया पहल की ऊर्जा को रक्षा क्षेत्र में उत्पादन और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में पूरी तरह से लागू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम पहले से ही इसका फल देखना शुरू कर चुके हैं। रक्षा उद्योग में भारत ने जबरदस्त गति हासिल की है अगले 25 सालों में भारत की गति इस क्षेत्र में और भी ज्यादा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान में युद्ध डिजिटल डोमेन में होने जा रहा है। इस क्षेत्र में भारत के पास अंतर्निहित ताकत है और देश के पास नई रक्षा प्रौद्योगिकियों के निर्माण में विश्व नेता बनने का अवसर है। उन्होंने कहा कि यह विशेष रूप से स्टार्ट-अप इकोसिस्टम और आईडीईएक्स कार्यक्रमों में देखा जा रहा है, जिसने उत्पादन और समय सीमा दोनों के संदर्भ में चीजों के होने के तरीके में क्रांति ला दी है।