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एयरो इंडिया 2023: राजनाथ सिंह बोले- सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग जरूरी
Wed, 15 Feb 2023 06:16 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Wed, 15 Feb 2023 06:16 AM IST
सार
रक्षा मंत्री ने कहा, विकास और समृद्धि के लिए सामूहिक सुरक्षा आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद, अवैध हथियारों का व्यापार, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसे मुद्दे पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा है।
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राजनाथ सिंह
- फोटो : ANI
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विस्तार
बंगलूरू में चल रहे एयरो इंडिया 2023 में मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विभिन्न देशों के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन की अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने आतंकवाद और गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए सभी देशों को एकजुट होने का आह्वान किया।
राजनाथ ने कहा, भारत सहायता की जरूरत वाले देशों को उपदेश या पूर्व निर्धारित समाधान देने में विश्वास नहीं रखता है। भारत अपने सहयोगी देशों की क्षमता निर्माण का समर्थन करता है, ताकि वे खुद अपनी नियति तय कर सकें। ऐसे देश हैं जो सैन्य, तकनीक और समृद्ध हैं, लेकिन उन्हें इस बात का अधिकार नहीं है कि वे मदद वाले देशों पर अपना समाधान थोपें। माना जा रहा है कि राजनाथ ने यह टिप्पणी चीन के संदर्भ में की है। चीन पर आरोप लगते रहे हैं कि वह कर्ज के जाल में फंसाकर देशों पर दबाव बनाने की रणनीति बनाता है।
आतंकवाद, अवैध हथियारों का व्यापार दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा
रक्षा मंत्री ने कहा, विकास और समृद्धि के लिए सामूहिक सुरक्षा आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद, अवैध हथियारों का व्यापार, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसे मुद्दे पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में तेजी से हो रहे बदलावों को देखते हुए राष्ट्रों के बीच वास्तविक समय आधार पर सहभागिता की आवश्यकता है। जब किसी क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खतरा होता है, तो पूरी दुनिया इसके प्रभाव को कई तरह से महसूस करती है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि एक-दूसरे से जुड़ी और नेटवर्क आधारित दुनिया में किसी भी तरह के टकराव और उपद्रव से कोई भी देश अछूता नहीं रह सकता। उन्होंने कहा, भारत ने हमेशा दुनियाभर से नए विचारों का स्वागत किया है।
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रक्षा सहयोग पर चर्चा
भारत के रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने ब्रिटेन के रक्षा खरीद मामलों के मंत्री अलेक्स चॉक के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस भी मौजूद थे। इससे पहले गिरिधर अरमाने ने सऊदी अरब, अमेरिका और ओमान के उच्चस्तरीय रक्षा प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की थी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रक्षा सचिव ने सऊदी अरब के औद्योगिक कार्यक्रम महाप्रबंधक इंगर तुर्की साद के साथ वार्ता की और उनसे कई द्विपक्षीय रक्षा सहयोग मुद्दों पर चर्चा हुई।
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राजनाथ ने कहा, भारत सहायता की जरूरत वाले देशों को उपदेश या पूर्व निर्धारित समाधान देने में विश्वास नहीं रखता है। भारत अपने सहयोगी देशों की क्षमता निर्माण का समर्थन करता है, ताकि वे खुद अपनी नियति तय कर सकें। ऐसे देश हैं जो सैन्य, तकनीक और समृद्ध हैं, लेकिन उन्हें इस बात का अधिकार नहीं है कि वे मदद वाले देशों पर अपना समाधान थोपें। माना जा रहा है कि राजनाथ ने यह टिप्पणी चीन के संदर्भ में की है। चीन पर आरोप लगते रहे हैं कि वह कर्ज के जाल में फंसाकर देशों पर दबाव बनाने की रणनीति बनाता है।
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आतंकवाद, अवैध हथियारों का व्यापार दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा
रक्षा मंत्री ने कहा, विकास और समृद्धि के लिए सामूहिक सुरक्षा आवश्यक है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद, अवैध हथियारों का व्यापार, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसे मुद्दे पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए खतरा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में तेजी से हो रहे बदलावों को देखते हुए राष्ट्रों के बीच वास्तविक समय आधार पर सहभागिता की आवश्यकता है। जब किसी क्षेत्र की शांति और सुरक्षा को खतरा होता है, तो पूरी दुनिया इसके प्रभाव को कई तरह से महसूस करती है। राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि एक-दूसरे से जुड़ी और नेटवर्क आधारित दुनिया में किसी भी तरह के टकराव और उपद्रव से कोई भी देश अछूता नहीं रह सकता। उन्होंने कहा, भारत ने हमेशा दुनियाभर से नए विचारों का स्वागत किया है।
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रक्षा सहयोग पर चर्चा
भारत के रक्षा सचिव गिरिधर अरमाने ने ब्रिटेन के रक्षा खरीद मामलों के मंत्री अलेक्स चॉक के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस दौरान भारत में ब्रिटिश उच्चायुक्त एलेक्स एलिस भी मौजूद थे। इससे पहले गिरिधर अरमाने ने सऊदी अरब, अमेरिका और ओमान के उच्चस्तरीय रक्षा प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की थी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, रक्षा सचिव ने सऊदी अरब के औद्योगिक कार्यक्रम महाप्रबंधक इंगर तुर्की साद के साथ वार्ता की और उनसे कई द्विपक्षीय रक्षा सहयोग मुद्दों पर चर्चा हुई।