फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Defense Budget 2021 : Defense Minister Expresses Gratitude, Ex Army Officer Said, Do Not Get Excited, Nothing Special

रक्षा बजट 2021 : रक्षा मंत्री ने आभार जताया, पूर्व सैन्य अधिकारी बोले- उत्साहित न हों, कुछ खास नहीं

Mon, 01 Feb 2021 04:52 PM IST
योगेश साहू शशिधर पाठक/जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
शशिधर पाठक/जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली Published by: योगेश साहू Updated Mon, 01 Feb 2021 04:52 PM IST
सार

  • पिछले साल भारतीय वायुसेना की जेब थी खाली
  • वायुसेना को कैपिटल एक्सपेंडीचर से भी दो हजार करोड़ कम मिले थे
  • लद्दाख में चीन से मुकाबले का खर्च जोड़कर बताएं, सैन्य आधुनिकीकरण के मद में क्या है?

विज्ञापन
Defense Budget 2021 : Defense Minister Expresses Gratitude, Ex Army Officer Said, Do Not Get Excited, Nothing Special
Rafale jet - फोटो : पीटीआई

विस्तार

केंद्रीय वित्तमंत्री के बजट का शेयर बाजार ने स्वागत किया है। प्रधानमंत्री ने इसकी तारीफ की है। पाकिस्तान और चीन सीमा पर दोहरी चुनौती झेल रही तीनों सेनाओं को बजट 2021-22 से काफी उम्मीदें थीं। वित्त मंत्री के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए करीब 4.78 लाख करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।

विज्ञापन


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसके लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री दोनों को धन्यवाद दिया है। जबकि सैन्य मामलों के जानकार मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक मेहता कहते हैं कि ज्यादा उत्साहित होने की जरूरत नहीं है। सैन्य बलों की चुनौती बढ़ी है और सैन्य आधुनिकीकरण के खाते में कुछ नहीं आया है।
विज्ञापन


रक्षा बजट पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी के लिए मैं (राजनाथ सिंह) प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को विशेष तौर पर धन्यवाद देना चाहता हूं। रक्षा मंत्री ने ट्वीट करके कहा कि इस बार रक्षा बजट 4.78 लाख करोड़ रुपये का है। इसमें 1.35 लाख करोड़ रुपये कैपिटल व्यय के रूप में शामिल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह कैपिटल व्यय में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। यह पिछले 15 वर्षों में कैपिटल व्यय के मद में अब तक की सबसे अधिक राशि है। रक्षा मंत्री के इस संदेश की बारीकियों को भी सहज समझा जा सकता है। उन्होंने चीन और पाकिस्तान के मोर्चे पर बढ़ रही चुनौती को ध्यान में रखकर अपनी टिप्पणी को केंद्रित की है।



मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक मेहता ने कहा- उत्साहित न हों
रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया आने के बाद मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक मेहता ने अमर उजाला से बात की। उन्होंने कहा कि उत्साहित होने की बहुत जरूरत नहीं है। मेरे ख्याल में सैन्य बलों के आधुनिकीकरण के नाम पर इस बार रक्षा मंत्रालय के हाथ खाली रहने वाले हैं। जनरल मेहता ने कहा कि हमारी 50 हजार के करीब फौज लद्दाख सीमा पर तैनात है। मथुरा की इंफैंट्री को आर्मर डिवीजन में बदल दिया गया है।

यह समझने की बात है कि लद्दाख में सैन्य तैनाती और जरूरत को ध्यान में रखकर दो अरब डॉलर (करीब 14 हजार करोड़ रुपये) के सौदे पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। 1000 करोड़ रुपये आपात खरीद के मद में खर्च हुए हैं। 700 करोड़ का खर्च अचानक हुई सैन्य तैनाती, सैन्य बलों को वहां ले जाने, अन्य संसाधनों के इंतजाम में खर्च हुए हैं। इस तरह से मुझे नहीं लगता कि सैन्य आधुनिकीकरण के मद में कुछ पैसा आने वाला है। ज्यादातर तो पेंशन और तनख्वाह देने और पुराने बही-खाते पूरे करने में खर्च हो जाएंगे।

पिछले साल वायुसेना के हाथ खाली थे
मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) मेहता ने कहा कि पिछले साल के बजट में भारतीय वायुसेना के हाथ कुछ खास नहीं आया था। बल्कि उसे जरूरी खर्च से भी 2000 करोड़ रुपये कम मिले थे। नौसेना को कोई 1000-2000 करोड़ रुपये अधिक मिल पाए थे। इसी तरह से भारतीय सेना के हिस्से में 3000-4000 करोड़ रुपये ही सैन्य आधुनिकीकरण के मद में आ सके थे।

मेहता का कहना है कि जिस तरीके से लद्दाख क्षेत्र में सैन्य तैनाती लगातार बनी हुई है और पाकिस्तान के साथ-साथ चीन की सीमा पर चुनौतियां बढ़ रही हैं, उसके सामानांतर बजट में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई है। तीनों सेनाओं के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है और केंद्र सरकार को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए था।

केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की उपेक्षा, न तो 'वन रैंक वन पेंशन' मिली और न ही स्कूल  

कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स वैलफेयर एसोसिएशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन द्वारा सोमवार को पेश किए गए बजट में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की उपेक्षा करने का आरोप लगाया है। एसोसिएशन के महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, इससे अर्धसैनिक बलों के 20 लाख परिवारों में भारी रोष व्याप्त है।

इन बलों को उम्मीद थी कि बजट में उन्हें सेना की तरह 'वन रैंक वन पेंशन' का फायदा मिलेगा। इतना ही नहीं, जिस तरह तीनों सेनाओं के लिए बजट में सौ नए सैनिक स्कूल खोलने की बात कही गई है, वैसे ही केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों व जवानों के बच्चों के लिए एक भी नया स्कूल खोलने की घोषणा नहीं हुई।

महासचिव रणबीर सिंह ने कहा, वित्त मंत्री द्वारा द्वारा अपने बजट में 'वन पेंशन वन राशन कार्ड' योजना लागू करने की घोषणा बजट में की गई, लेकिन पैरामिलिट्री फोर्स के जवानों के लिए 'वन रैंक वन पेंशन' लागू करने बाबत कोई जिक्र नहीं किया गया।

तीनों सेनाओं के लिए 100 नए सैनिक स्कूल खोले जाने की घोषणा बजट में की गई है। पैरामिलिट्री जवानों के लिए अर्धसैनिक स्कूल खोलने की एसोसिएशन की पुरानी मांग को पूरी तरह से नकार दिया गया। जीएसटी के चलते अर्धसैनिक बलों की सैंट्रल पुलिस कैंटीन (सीपीसी) बाजार भाव पर आ गई है।

कैंटीन पर जीएसटी टैक्स की रियायत न देने से लाखों पैरामिलिट्री परिवारों में सरकार द्वारा अर्धसैनिक बलों के साथ सौतेले व्यवहार को दर्शाता है। एसोसिएशन ने इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन व गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात कर उन्हें कई बार ज्ञापन सौंपे गए थे।

रणबीर सिंह के मुताबिक, बेहतर होता कि इन बलों के जवानों के लिए दोबारा से पुरानी पैंशन बहाली का ऐलान किया जाता। ये वही जवान हैं, जिनके बीच में प्रधानमंत्री मोदी हर साल दिवाली मनाते हैं। केंद्रीय सरकार द्वारा अर्धसैनिक बलों की उपेक्षा व सौतेले व्यवहार के खिलाफ 12 फरवरी को जंतर-मंतर पर विशेष प्रदर्शन किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed