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DAC की बैठक कल: भारतीय सेना को मिलेंगी हैमर मिसाइलें, इन स्वदेशी हथियारों को भी मिल सकती है मंजूरी?
Thu, 02 Jul 2026 10:32 PM IST
निर्मल कांत
एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Thu, 02 Jul 2026 10:32 PM IST
सार
नई रक्षा अधिग्रहण परिषद बैठक में राफेल और तेजस के लिए हैमर मिसाइल, वर्बा वायु रक्षा प्रणाली और स्वदेशी एंटी-टैंक मिसाइल जैसे कई बड़े रक्षा प्रस्तावों पर मंजूरी की संभावना है। इन से भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना की सटीक हमले व वायु रक्षा क्षमता बढ़ेंगी। पढ़िए रिपोर्ट-
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भारतीय सेना की बढ़ेगी ताकत
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस), थल सेना प्रमुख और नौसेना प्रमुख की मौजूदगी में होने वाली पहली रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) की बैठक में कई बड़े रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी मिलने की संभावना है। इनमें राफेल और एलसीए तेजस विमानों के लिए हवा से जमीन पर सटीक हमला करने वाली हैमर मिसाइलें, बहुत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली वर्बा, स्थिर पंख वाले छद्म उपग्रह और नौसेना के जहाजों पर तैनात किए जाने वाले हवाई सिस्टम शामिल हैं।
डीएसी की बैठक कई महीनों के बाद हो रही है। इसमें पहली बार सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन शामिल होंगे।
स्वदेशी मिसाइल प्रणाली को मिलेगी मंजूरी?
रक्षा सूत्रों ने बताया कि गुरुवार को होने वाली बैठक में एक अहम स्वदेशी प्रणाली को मंजूरी के लिए रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय सेना के लिए एक ऐसी टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल (एमपी-एटीजीएम) विकसित की है, जिसे एक व्यक्ति आसानी से ले जा सकता है। इस मिसाइल को बड़ी संख्या में सेना में शामिल करने का प्रस्ताव है।
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कितनी खर्च आएगा?
प्रस्ताव के अनुसार, भारतीय सेना को 100 लॉन्चर, 2300 मिसाइलें और इस हथियार प्रणाली के लिए पांच सिम्युलेटर मिलेंगे। इस स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित प्रणाली का उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड करेगी। रक्षा मंत्रालय इस हथियार प्रणाली के लिए निजी क्षेत्र में नए उत्पादन साझेदार भी तलाशेगा। इस परियोजना की लागत 2,600 करोड़ रुपये से अधिक रहने की संभावना है।
ये भी पढ़ें: यूजरनेम विवाद के बाद सरकार सख्त, व्हाट्सएप के बाद टेलीग्राम और सिग्नल को भी नोटिस
हैमर मिसाइल क्यों अहम?
भारतीय वायुसेना और नौसेना की दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा तैयार 600 हैमर मिसाइलों की खरीद के प्रस्ताव पर भी विचार करेगा।
हैमर हथियारों को पहली बार वर्ष 2020 में चीन के साथ गलवां संघर्ष के बाद आपातकालीन खरीद प्रक्रिया के तहत भारतीय सेनाओं में शामिल किया गया था। फ्रांस की कंपनी सफरान इन हथियारों को भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के साथ साझेदारी में बनाएगी।
किन विमानों में होंगे इस्तेमाल?
इन हथियारों का बड़ा हिस्सा भारतीय वायुसेना को मिलेगा, जो इन्हें अपने राफेल और एलसीए तेजस लड़ाकू विमानों में शामिल करेगी। वहीं, भारतीय नौसेना इन्हें अपने राफेल मरीन विमानों में इस्तेमाल करेगी। इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 2,400 करोड़ रुपये है।
वर्बा मिसाइल क्यों जरूरी?
भारतीय सेना की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में रूस में विकसित बहुत कम दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली वर्बा भी खरीदी जाएगी। इस मिसाइल प्रणाली का निर्माण भारत की अदाणी डिफेंस लिमिटेड करेगी। वर्बा, भारतीय सेना में पहले से इस्तेमाल हो रही इगला मिसाइल का उन्नत संस्करण है।
इसके अलावा, सॉफ्टवेयर आधारित रेडियो, कामिकेज ड्रोन, ड्रोन का पता लगाने वाली प्रणालियों और स्कॉर्पिन श्रेणी की पनडुब्बियों से जुड़े कई अन्य अहम प्रस्तावों को भी रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।
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डीएसी की बैठक कई महीनों के बाद हो रही है। इसमें पहली बार सीडीएस जनरल एनएस राजा सुब्रमणि, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और नौसेना प्रमुख एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन शामिल होंगे।
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स्वदेशी मिसाइल प्रणाली को मिलेगी मंजूरी?
रक्षा सूत्रों ने बताया कि गुरुवार को होने वाली बैठक में एक अहम स्वदेशी प्रणाली को मंजूरी के लिए रखा जाएगा। उन्होंने बताया कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय सेना के लिए एक ऐसी टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल (एमपी-एटीजीएम) विकसित की है, जिसे एक व्यक्ति आसानी से ले जा सकता है। इस मिसाइल को बड़ी संख्या में सेना में शामिल करने का प्रस्ताव है।
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कितनी खर्च आएगा?
प्रस्ताव के अनुसार, भारतीय सेना को 100 लॉन्चर, 2300 मिसाइलें और इस हथियार प्रणाली के लिए पांच सिम्युलेटर मिलेंगे। इस स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित प्रणाली का उत्पादन भारत डायनेमिक्स लिमिटेड करेगी। रक्षा मंत्रालय इस हथियार प्रणाली के लिए निजी क्षेत्र में नए उत्पादन साझेदार भी तलाशेगा। इस परियोजना की लागत 2,600 करोड़ रुपये से अधिक रहने की संभावना है।
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हैमर मिसाइल क्यों अहम?
भारतीय वायुसेना और नौसेना की दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ाने के लिए रक्षा मंत्रालय भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा तैयार 600 हैमर मिसाइलों की खरीद के प्रस्ताव पर भी विचार करेगा।
हैमर हथियारों को पहली बार वर्ष 2020 में चीन के साथ गलवां संघर्ष के बाद आपातकालीन खरीद प्रक्रिया के तहत भारतीय सेनाओं में शामिल किया गया था। फ्रांस की कंपनी सफरान इन हथियारों को भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी के साथ साझेदारी में बनाएगी।
किन विमानों में होंगे इस्तेमाल?
इन हथियारों का बड़ा हिस्सा भारतीय वायुसेना को मिलेगा, जो इन्हें अपने राफेल और एलसीए तेजस लड़ाकू विमानों में शामिल करेगी। वहीं, भारतीय नौसेना इन्हें अपने राफेल मरीन विमानों में इस्तेमाल करेगी। इस सौदे की अनुमानित कीमत करीब 2,400 करोड़ रुपये है।
वर्बा मिसाइल क्यों जरूरी?
भारतीय सेना की वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए बड़ी संख्या में रूस में विकसित बहुत कम दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली वर्बा भी खरीदी जाएगी। इस मिसाइल प्रणाली का निर्माण भारत की अदाणी डिफेंस लिमिटेड करेगी। वर्बा, भारतीय सेना में पहले से इस्तेमाल हो रही इगला मिसाइल का उन्नत संस्करण है।
इसके अलावा, सॉफ्टवेयर आधारित रेडियो, कामिकेज ड्रोन, ड्रोन का पता लगाने वाली प्रणालियों और स्कॉर्पिन श्रेणी की पनडुब्बियों से जुड़े कई अन्य अहम प्रस्तावों को भी रक्षा अधिग्रहण परिषद की बैठक में मंजूरी के लिए रखा जा सकता है।