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पर्रिकर के निर्देश, अधिकारी पता करें पांटून निर्माण का भुगतान कौन करेगा?

Thu, 10 Mar 2016 02:12 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 10 Mar 2016 02:12 PM IST
सार

  • मनोरह पर्रिकर की चिंता
  • पुल बनाने में खर्च का भुगतान
  • दिल्ली सरकार ने मांगी थी मदद

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Defence ministry dilemma: Who pays for the expenses incurred by the Army
पांटून पुल बनाती सेना - फोटो : PTI

विस्तार

दिल्ली में आयोजित होने जा रहे श्रीश्री रवि शंकर के कार्यक्रम में सेना से पांटून पुल बनवाने में आई लागत का भुगतान कौन करेगा यह एक बड़ा सवाल बन गया है। रक्षा मंत्रालय इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने की कोशिश में जुट गया है कि आर्ट ऑफ लिविंग के इस कार्यक्रम जैसे गैर सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन के दौरान सेना के इस्तेमाल का खर्च कौन वहन करेगा?

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इस मामले में रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने मंत्रालय के अधिकारियों को यह निर्देष दिए हैं कि वे इस बात का पता लगाएं इस खर्च का भुगतान कौन सी संस्था करेगी? श्रीश्री के कार्यक्रम में सेना से पांटून पुल का निर्माण करवाने के लिए दिल्ली सरकार ने अनुरोध किया था जिसके बाद रक्षा मंत्रालय ने सेना को निर्देश दिए थे।
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नियमानुसार भारतीय सेना विभिन्न परिस्थितियों में कई विभागों के लिए काम कर सकती है जिसमें कानून व्यवस्था बनाए रखने में मदद करने के साथ-साथ सरकार के विकास कार्यों में मदद करने का प्रावधान है। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं में राहत एवं बचाव कार्य का भी काम सेना करती है।

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किसकी जेब से जाएगा पैसा?

Defence ministry dilemma: Who pays for the expenses incurred by the Army
पांटून पुल बनाती सेना - फोटो : PTI

एक अधिकारी के मुताबिक यह मामला 'अन्य तरह के सहयोग' के अंदर आता है जिसमें इस बात का निर्धारण करना मुश्किल होता है कि आखिर इसमें हुए खर्च का भुगतान कौन करेगा?

अधिकारियों के मुताबिक आर्ट ऑफ लिविंग जैसी निजी संस्थाओं द्वारा आयोजित किए गए कार्यक्रमों में सेना की मदद और उस पर आए खर्च का भुगतान कौन करेगा यह एक बड़ा सवाल है।

उन्होंने बताया कि इससे पहले 1997 में यान्नी कंसर्ट के दौरान भी यमुना नदी पर पांटून पुल बनवाने के लिए सेना की मदद ली गई थी लेकिन उस वक्त भी यह स्पष्ट नहीं था कि आखिर इसका भुगतान कौन करेगा। इस मामले में भी कुछ ऐसे ही हालात हैं। उस वक्त सेना ने भविष्य में ऐसे किसी भी तरह के आयोजन का भुगतान खुद की जेब से नहीं करने की बात कही थी।

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