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Hindi News ›   India News ›   India China Border News: Rajnath Singh statement on India-China border issue in Rajya Sabha

चीन सीमा विवाद पर बोले राजनाथ, भारत हर कदम उठाने को तैयार, झुकने नहीं देंगे देश का सिर

Thu, 17 Sep 2020 03:06 PM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Thu, 17 Sep 2020 03:06 PM IST
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India China Border News: Rajnath Singh statement on India-China border issue in Rajya Sabha
भारत चीन सीमा: राज्यसभा में राजनाथ सिंह ने दिया बयान - फोटो : PTI

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संसद के मानसून सत्र का गुरुवार को चौथा दिन है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में चीन के साथ जारी गतिरोध पर राज्यसभा में बयान दिया। राजनाथ सिंह ने राज्यसभा में दिए अपने बयान में कहा कि हम पूर्वी लद्दाख में चुनौती का सामना कर रहे हैं, हम मुद्दे का शांतिपूर्ण ढंग से हल करना चाहते हैं और हमारे सशस्त्र बल देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए डटकर खड़े हैं।

राजनाथ सिंह ने कहा कि 15 जून को कर्नल संतोष बाबू ने अपने 19 बहादुर सैनिकों के साथ भारत की अखंडता को बचाने के उद्देश्य से गलवां घाटी में सर्वोच्च बलिदान दिया। हमारे पीएम खुद सेना का मनोबल बढ़ाने के लिए लद्दाख गए। राजनाथ सिंह ने कहा कि सीमा पर दोनों देशों के बीच शांति बहाल करने के लिए कई समझौते हुए, लेकिन चीन औपचारिक सीमाओं को नहीं मानता। सदन इस बात से अवगत है कि भारत और चीन सीमा का प्रश्न अभी तक अनसुलझा है। भारत और चीन की बाउंड्री का कस्टमरी और ट्रेडिशनल अलाइनमेंट चीन नहीं मानता है। यह सीमा रेखा अच्छे से स्थापित भौगोलिक सिद्धांतों पर आधारित है।

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'चीन ने लद्दाख में अनाधिकृत कब्जा कर रखा है'
राजनाथ सिंह ने कहा कि चीन, भारत की लगभग 38,000 स्क्वायर किलोमीटर भूमि पर अनधिकृत कब्जा लद्दाख में किए हुए है। इसके अलावा, 1963 में एक तथाकथित बाउंड्री अग्रीमेंट के तहत, पाकिस्तान ने पीओके की 5,180 स्क्वायर किलोमीटर भारतीय जमीन अवैध रूप से चीन को सौंप दी है। इसके साथ ही अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा के पूर्वी क्षेत्र में भारतीय क्षेत्र के लगभग 90,000 वर्ग किलोमीटर पर चीन दावा भी करता है। 
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उन्होंने आगे कहा कि अभी तक भारत-चीन के सीमावर्ती क्षेत्रों में साझा रूप से चिन्हित वास्तविक नियंत्रण रेखा नहीं है और वास्तविक नियंत्रण रेखा को लेकर दोनों पक्षों की समझ अलग-अलग है।  इसलिए शांति बहाल रखने के लिए दोनों देशों के बीच कई तरह के समझौते और प्रोटोकॉल हैं।

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 1993 और 1996 के समझौते में इस बात का जिक्र है कि एलएएसी के पास दोनों देश अपनी सेनाओं की संख्या कम से कम रखेंगे। समझौते में यह भी है कि जब तक सीमा मुद्दे का पूर्ण समाधान नहीं होता है, तब तक एलएसी को सख्ती से लागू किया जाएगा। 

'देश का मस्तक झुकने नहीं देंगे'
राजनाथ सिंह ने कहा कि मैं देश के 130 करोड़ लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हम देश का मस्तक किसी भी कीमत पर झुकने नहीं देंगे और न ही हम किसी का मस्तक झुकाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सेना ने गलवां में चीन को भारी नुकसान पहुंचाया।

राजनाथ सिंह ने कहा कि चीन की कथनी और करनी में फर्क है। मैं सदन से यह अनुरोध करता हूं कि हमारे वीर जवानों की वीरता एवं बहादुरी की प्रशंसा करनी चाहिए। हमारे बहादुर जवान अत्यंत मुश्किल परिस्थतियों में अपने अथक प्रयास से समस्त देशवासियों को सुरक्षित रख रहे हैं। 

'भारतीय सेना ने चीन को संयम और शौर्य दोनों दिखाए'
राजनाथ ने कहा कि हमारे सशस्त्र बलों के आचरण से पता चलता है कि उन्होंने उत्तेजक गतिविधियों के सामने 'सयंम' को बनाए रखा और भारत की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए आवश्यक रूप से 'शौर्य' का भी प्रदर्शन किया। चीन द्वारा की गई कार्रवाई हमारे विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों की अवहेलना है।
 

वास्तविक नियंत्रण रेखा का सम्मान और कड़ाई से निरीक्षण करना सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता का आधार है। हमारे सशस्त्र बलों ने इसका स्पष्ट रूप से पालन किया है, वहीं चीनी पक्ष द्वारा ऐसा नहीं किया जा रहा है। चीन ने पिछले कई दशकों में सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी तैनाती क्षमताओं को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा निर्माण संबंधी गतिविधियां कीं। इसके जबाव में हमारी सरकार ने भी बॉर्डर इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास का बजट बढ़ाया है, जो पहले से लगभग दोगुना हुआ है।

उन्होंने कहा कि मैं देशवासियों को यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि हमारे सभी सशस्त्र बल के जवानों का जोश एवं हौसला बुलंद है, हमारे जवान किसी भी संकट का सामना करने के लिए तैयार हैं। इस सदन से दिया गया, एकता व पूर्ण विश्वास का संदेश, पूरे देश और पूरे विश्व में गूंजेगा और हमारे जवान, जो कि चीनी सेनाओं से आंख से आंख मिलाकर अडिग खड़े हैं, उनमें एक नए मनोबल, ऊर्जा व उत्साह का संचार होगा।



जब सभापति ने राजनाथ को मास्क पहनने को कहा
उच्च सदन में चीन पर बयान की शुरुआत राजनाथ सिंह ने बिना मास्क पहने की। सभापति वेंकैया नायडू ने फौरन रक्षामंत्री को मास्क पहनने को कहा। राजनाथ सिंह ने मुस्कुराते हुए बगल में रखा मास्क पहन लिया तो विपक्षी सांसदों ने चुटकी लेनी शुरू कर दी। इस पर सभापति ने ऐतराज जताते हुए कहा, रक्षामंत्री मास्क पहनना भूल गए तो मैंने उन्हें याद दिला दिया। इसमें ऐसी कोई बड़ी बात नहीं है।

 

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