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Defence: राजनाथ सिंह ने SANJAY बैटरफील्ड सर्विलांस सिस्टम को दिखाई हरी झंडी, बीएसएस अत्याधुनिक सेंसर से लैस
Fri, 24 Jan 2025 03:37 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता महतो
Updated Fri, 24 Jan 2025 03:37 PM IST
सार
कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और रक्षा मंत्रालय और बीईएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
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राजनाथ सिंह
- फोटो : ANI
विस्तार
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली के साउथ ब्लॉक से एसएएनजेएवाई बैटरफील्ड सर्विलांस सिस्टम (बीएसएस) को हरी झंडी दिखाई। एसएएनजेएवाई एक स्वचालित प्रणाली है जो सभी जमीनी और हवाई युद्धक्षेत्र सेंसरों से इनपुट को एकीकृत करेगा। यह युद्धक्षेत्र की पारदर्शिता को बढ़ाएगा और एक केंद्रीकृत वेब एप्लिकेशन के माध्यम से भविष्य के युद्धक्षेत्र को बदल देगा। यह सेना मुख्यालय और भारतीय सेना निर्णय समर्थन प्रणाली को इनपुट प्रदान करेगा।
बीएसएस अत्याधुनिक सेंसर और एनालिटिक्स से लैस है। यह विशाल भूमि सीमाओं की निगरानी करेगा, घुसपैठ को रोकेगा, खुफिया और निगरानी में शक्ति बढ़ाएगा। यह कमाडरों को नेटवर्क केंद्रित वातावरण में पारंपरिक और उप-पारंपरिक दोनों अभियानों में काम करने में सक्षम बनाएगा। रक्षा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय सेना में इसका शामिल होना डेटा और नेटवर्क की दिशा में एक असाधारण छलांग है।
एसएएनजेएवाई को भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा स्वदेशी और संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। यह भारतीय सेना के ईयर ऑफ टेक्नोलॉजी एब्जॉप्शन में आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहा है। इन प्रणालियों को मार्च से अक्तूबर 2025 तक तीन चरणों में भारतीय सेना के सभी ऑपरेशनल ब्रिगेड, डिवीजनों और कोर में शामिल किया जाएगा। विज्ञप्ति के अनुसार, इस प्रणाली को 2,402 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है।
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इस कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और रक्षा मंत्रालय और बीईएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
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बीएसएस अत्याधुनिक सेंसर और एनालिटिक्स से लैस है। यह विशाल भूमि सीमाओं की निगरानी करेगा, घुसपैठ को रोकेगा, खुफिया और निगरानी में शक्ति बढ़ाएगा। यह कमाडरों को नेटवर्क केंद्रित वातावरण में पारंपरिक और उप-पारंपरिक दोनों अभियानों में काम करने में सक्षम बनाएगा। रक्षा मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय सेना में इसका शामिल होना डेटा और नेटवर्क की दिशा में एक असाधारण छलांग है।
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एसएएनजेएवाई को भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) द्वारा स्वदेशी और संयुक्त रूप से विकसित किया गया है। यह भारतीय सेना के ईयर ऑफ टेक्नोलॉजी एब्जॉप्शन में आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रहा है। इन प्रणालियों को मार्च से अक्तूबर 2025 तक तीन चरणों में भारतीय सेना के सभी ऑपरेशनल ब्रिगेड, डिवीजनों और कोर में शामिल किया जाएगा। विज्ञप्ति के अनुसार, इस प्रणाली को 2,402 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है।
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इस कार्यक्रम में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और रक्षा मंत्रालय और बीईएल के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।