फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   defaming husband calling him womaniser and alcoholic no proof the allegation amount to cruelty Bombay HC

Mumbai: बॉम्बे HC ने कहा- पति को बदनाम करना, उसे 'महिलावादी और शराबी' कहना क्रूरता के समान है

Tue, 25 Oct 2022 10:36 PM IST
वीरेंद्र शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Tue, 25 Oct 2022 10:36 PM IST
सार

महिला ने अपनी अपील में दावा किया कि उसका पति एक महिलावादी और शराबी था और इन बुराइयों के कारण वह अपने वैवाहिक अधिकारों से वंचित थी।

विज्ञापन
defaming husband calling him womaniser and alcoholic no proof the allegation amount to cruelty Bombay HC
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बंबई हाईकोर्ट ने  पारिवारिक अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा बिना सबूत के पति को महिलावादी और शराबी कहना क्रूरता की श्रेणी में आता है। न्यायमूर्ति नितिन जामदार और न्यायमूर्ति शर्मिला देशमुख की खंडपीठ ने 12 अक्तूबर को पारित अपने आदेश में एक 50 वर्षीय महिला द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया। 
विज्ञापन


जिसमें पुणे की एक पारिवारिक अदालत द्वारा एक रिटायर्ड सेना अधिकारी से तलाक देने वाले नवंबर 2005 के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट में अपील की सुनवाई के दौरान उस व्यक्ति की मौत हो गई, जिसके बाद अदालत ने उसके कानूनी उत्तराधिकारी को प्रतिवादी के रूप में जोड़ने का निर्देश दिया। महिला ने अपनी अपील में दावा किया कि उसका पति एक महिलावादी और शराबी था और इन बुराइयों के कारण वह अपने वैवाहिक अधिकारों से वंचित थी। पीठ ने कहा कि पत्नी द्वारा अपने पति के चरित्र के खिलाफ अनुचित और झूठे आरोप लगाने से समाज में उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है और यह क्रूरता है।
विज्ञापन


महिला ने अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोर्ट में सबूत पेश नहीं किए 
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि महिला ने अपने बयान के अलावा अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया है। मृतक के वकील ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता महिला ने अपने पति पर झूठे और मानहानि कारक आरोप लगाकर उसे मानसिक पीड़ा दी थी। अदालत ने परिवार अदालत के समक्ष पति के बयान का हवाला दिया जिसमें उसने दावा किया था कि याचिकाकर्ता ने उसे अपने बच्चों और पोते-पोतियों से अलग कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह  कानून दूसरे पक्ष को मानसिक पीड़ा देता है। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता का पति सेना से रिटायर्ड था, वह समाज के ऊपरी तबके से ताल्लुक रखता था। समाज में उसकी प्रतिष्ठा थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed