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तमिलनाडु की राजनीति के लिए 'काला' रहा है दिसंबर का महीना
टीम डिजिटल/ अमर उजाला दिल्ली
Updated Tue, 06 Dec 2016 04:30 PM IST
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तमिलनाडु राज्य के लिए दिसंबर का महीना कई सालों से अशुभ रहा है। इस राज्य को दिसंबर में कई क्षति को झेलना पड़ा है। 5 दिसंबर को एआईएडीएमके की मुखिया जयललिता के निधन के बाद एक बार फिर से ये महीना तमिलनाडु की राजनीति के लिए बुरा साबित हो गया है। 22 सितंबर से लंबी बीमारी के चलते सोमवार को तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता का निधन हो गया।
इनसे पहले अन्य मशहूर हस्तियों की बात करें, तो जयललिता के राजनीतिक गुरू और तमिलनाडु के दिग्गज नेता एमजीआर का निधन भी 24 दिसंबर 1987 को हुआ था। उनकी मौत के बाद जयललिता ने ही उनका राजनीतिक कार्यभार संभाला था। जयललिता की तरह ही उनके राजनीतिक गुरू भी लंबी बीमारी से जूझ रहे थे।
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इनसे पहले अन्य मशहूर हस्तियों की बात करें, तो जयललिता के राजनीतिक गुरू और तमिलनाडु के दिग्गज नेता एमजीआर का निधन भी 24 दिसंबर 1987 को हुआ था। उनकी मौत के बाद जयललिता ने ही उनका राजनीतिक कार्यभार संभाला था। जयललिता की तरह ही उनके राजनीतिक गुरू भी लंबी बीमारी से जूझ रहे थे।
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अन्य मशहूर हस्तियों में शामिल भारत के आखिरी गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी की मौत भी दिसंबर 1972 में ही हुई थी। 1972 में ही 'पेरियार' ई वी रामास्वामी का निधन भी 24 दिसंबर को हुआ था। प्रकृतिक त्रासदी के मामले में भी तमिलनाडु के लिए दिसंबर महीना अशुभ साबित रहा है। 2004 में 26 दिसंबर को इस राज्य को भारी सुनामी का सामना करना पड़ा था।
जिसमें बहुत बड़ी क्षति हुई थी। वहीं पिछले साल दिसंबर 2015 में भी भयंकर बारिश हुई थी, जिससे तिरुवल्लोर, कडलोर, चेन्नै और कांचीपुरम के लोगों के भारी नुकसान झेलना पड़ा था। इस तरह दिसंबर का महीना इस राज्य के लिए काले महीने जैसा रहा है।
जिसमें बहुत बड़ी क्षति हुई थी। वहीं पिछले साल दिसंबर 2015 में भी भयंकर बारिश हुई थी, जिससे तिरुवल्लोर, कडलोर, चेन्नै और कांचीपुरम के लोगों के भारी नुकसान झेलना पड़ा था। इस तरह दिसंबर का महीना इस राज्य के लिए काले महीने जैसा रहा है।