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लोकसभा में आपराधिक कानूनों पर चर्चा आज: ट्रायल कोर्ट को तीन साल में सुनाना होगा फैसला, भीड़ हिंसा में उम्रकैद

Wed, 20 Dec 2023 06:38 AM IST
गुलाम अहमद अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: गुलाम अहमद Updated Wed, 20 Dec 2023 06:38 AM IST
सार

विपक्षी गठबंधन के करीब-करीब सभी सदस्यों की अनुपस्थिति में तीनों विधेयकों पर देर रात तक चर्चा हुई। तीनों बिल मानसून सत्र में लोकसभा में पेश करने के बाद स्थायी समिति को भेजे गए थे। गृह मंत्री बुधवार को इन पर हुई चर्चा का जवाब देंगे। 

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Debate on criminal laws in LS Trial court to give verdict in three years, life imprisonment in mob violence
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह - फोटो : एजेंसी

विस्तार

दो तिहाई विपक्ष की अनुपस्थिति में मंगलवार को गृह मंत्री अमित शाह ने आपराधिक कानून संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयकों को लोकसभा में पेश किया। ये तीनों बिल भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) व भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। नए कानून में ट्रायल कोर्ट को अधिकतम तीन वर्ष में निर्णय देना अनिवार्य होगा।

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विपक्षी गठबंधन के करीब-करीब सभी सदस्यों की अनुपस्थिति में तीनों विधेयकों पर देर रात तक चर्चा हुई। तीनों बिल मानसून सत्र में लोकसभा में पेश करने के बाद स्थायी समिति को भेजे गए थे। गृह मंत्री बुधवार को इन पर हुई चर्चा का जवाब देंगे। सरकार की योजना विधेयकों को इसी सत्र में कानूनी जामा पहनाने की है। तीनों विधेयकों में आपराधिक कानून में अहम बदलाव हुए हैं। इनके कानून बनने के बाद भीड़ हिंसा के आरोपियों को उम्र कैद की सजा मिलेगी। पहले सात वर्ष की सजा का प्रावधान था। आर्थिक सुरक्षा को खतरा पहुंचाना आतंकी गतिविधियों के दायरे में आएगा। तस्करी या नकली नोटों का उत्पादन, देश में रक्षा या विदेश में सरकारी संपत्ति को क्षति, सरकार को मजबूर करने के लिए किसी का अपहरण आतंकी कृत्य माना जाएगा।
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छोटे अपराधों के लिए सामुदायिक सेवा की सजा
ऐसे छोटे अपराध जिससे समाज पर व्यापक प्रतिकूल असर नहीं पड़ता हो, इसके लिए विधेयक में जेल की जगह सामुदायिक सेवा की सजा का प्रावधान है। छोटी-मोटी चोरी, नशे में धुत होकर परेशान करना व अन्य अपराधों के मामले में जेल की सजा खत्म कर दी गई है। इसके तहत दोषी व्यक्ति को सामुदायिक सेवा करनी होगी और इसके लिए उसे किसी तरह का आर्थिक भुगतान नहीं किया जाएगा। विधेयक में सामुदायिक सेवा को नए सिरे से परिभाषित भी किया गया है।
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दुष्कर्म के मामले में खास प्रावधान
दुष्कर्म के मामले में अदालती कार्यवाही के संबंध में कोर्ट की अनुमति के बिना कुछ भी प्रकाशित करना प्रतिबंधित होगा। इसका उल्लंघन करने पर दो साल की सजा व जुर्माने का प्रावधान किया गया है।


कानूनों में अहम बदलाव

  • विधेयक के कानूनी जामा पहनने के बाद आईपीसी में 511 की जगह 356 धाराएं रह जाएंगी। भारतीय न्याय संहिता लागू होने से 175 बदल जाएंगी।
  • भारतीय न्याय संहिता में 8 नई धाराएं जुड़ेंगी, 22 धाराएं आई गई हैं। ऐसे में सीआरपीसी में 533 धाराएं रह जाएंगी।
  • सीआरपीसी में 160 धाराएं बदलेंगी, नौ नई धाराएं जुड़ेंगी।
  • सुनवाई के दौरान वीडियो कांफ्रेंस के जरिये पूछताछ की अनुमति मिलेगी।
  • ट्रायल कोर्ट को अधिकतम तीन साल के भीतर अनिवार्य रूप से देना होगा फैसला। इस समय  4.44 करोड़ मामले निचली अदालतों  में लंबित हैं, इनका निस्तारण तेजी से होगा।
  • आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट बदले जाएंगे : राजद्रोह अपराध नहीं रहेगा।

 

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