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अविश्वास प्रस्ताव पर सुबह 11 बजे से बहस, वोटिंग शाम 6 के बाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 20 Jul 2018 03:25 AM IST
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केंद्र की मोदी सरकार करीब साढ़े चार साल के कार्यकाल में आज पहली बार विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का सामना करेगी। तेलुगू देशम पार्टी (तेदेपा) की ओर से पेश अविश्वास प्रस्ताव पर सुबह 11 बजे से लेकर 7 घंटे चर्चा तक चलेगी। शाम 6 बजे के बाद प्रस्ताव पर वोटिंग होगी। हालांकि संसद में इस जंग में सरकार की जीत तय है। संख्याबल के आधार पर पहले से ही मजबूत राजग सरकार को अन्नाद्रमुक का समर्थन मिलने और बीजेडी-टीआरएस के मतदान से दूर रहने के फैसले से शक्ति परीक्षण का सस्पेंस खत्म हो गया है। अब विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर बहस के जरिये सरकार को घेरकर दमखम दिखाएगा।
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सरकार की जीत तय, लेकिन वार-पलटवार पर रहेंगी निगाहें
विपक्ष को उम्मीद थी कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव पर सहमत होने से पहले थोड़ा समय लेगी। इससे उसे हमला करने का पूरा मौका मिलेगा, लेकिन सरकार जनता के बीच ऐसा कोई संदेश नहीं देना चाहती कि वह शक्ति परीक्षण से बच रही है। लिहाजा, अविश्वास प्रस्ताव पेश होते ही चर्चा और वोटिंग का समय निर्धारित कर दिया गया। विपक्ष का मानना है कि सदन की कार्यवाही के दौरान मोदी सरकार पर हमला बोलने से पूरे देश की नजरें उस पर टिकेंगी। विपक्ष को मनोवैज्ञानिक रूप से इसका फायदा मिलेगा।
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रणनीति - पक्ष
पीएम डेढ़ घंटा करेंगे विपक्षी हमले पर पलटवार
संख्याबल का तनाव दूर होने के बाद भाजपा ने कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस पर पलटवार करने की योजना बनाई है। पलटवार की कमान खुद पीएम नरेंद्र मोदी के हाथों होगी। वह करीब डेढ़ घंटे तक पलटवार के साथ सरकार की उपलब्धियां गिनाकर विपक्ष को घेरेंगे। पीएम ने चर्चा में भाग लेने के लिए मुख्य सचेतक अनुराग ठाकुर, बीरेंद्र सिंह मस्त और हुकुमदेव नारायण यादव का चयन किया है। इनके निशाने पर मुख्य रूप से गांधी परिवार होगा।
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रणनीति - विपक्ष
अविश्वास के बहाने दमखम दिखाएगा विपक्ष
विपक्ष में मुख्य तौर पर कांग्रेस ने भीड़ की हिंसा, बैंकों से कर्ज लेकर फरार होने वाले उद्यमियों, बेरोजगारी और महंगाई जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। कांग्रेस के रणनीतिकारों का कहना है कि अविश्वास प्रस्ताव के जरिये लोकसभा चुनाव से पहले विपक्ष को भाजपा के खिलाफ लामबंद करने का प्रयास किया जा रहा है।
किसको कितना वक्त
स्पीकर ने चर्चा के लिए सात घंटे का समय निर्धारित किया है। इसमें भाजपा कि हिस्से 3.33 घंटे, कांग्रेस को 38 मिनट, अन्नाद्रमुक को 29 मिनट, बीजेडी को 15 मिनट, शिवसेना को 14 मिनट, टीडीपी को 13 मिनट, माकपा को 7 मिनट, एनसीपी, एलजेपी, एसपी को 6-6 मिनट, अकाली दल, अपना दल समेत 15 दलों को 12 मिनट और अन्य 33 दलों को 26 मिनट मिलेंगे।
कौन किसके साथ
नाराज राजग सहयोगियों को भी साधने में शाह को मिली सफलता
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने सहयोगियों और कुछ विपक्षी दलों को साधने की कमान संभाली है। भाजपा सांसदों को किसी भी सूरत में संसद में हाजिर रहने के लिए कहा गया है। वर्तमान में लोकसभा में 534 सदस्य हैं। राजग को 310 सांसदों का समर्थन हासिल है। उसे 37 सदस्यों वाले अन्नाद्रमुक का भी समर्थन मिल गया है। ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ सदस्यों की संख्या 347 हो गई है, जो बहुमत के लिए जरूरी 268 सांसदों से 79 ज्यादा है। 19 सांसदों वाली बीजद और 11 सांसदों वाली टीआरएस ने मतदान से दूर रहने की घोषणा की है। विपक्ष को राजग के सहयोगियों में फूट डालने के लिए शिवसेना से उम्मीद थी। शाह ने शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से बात कर स्थिति संभाल ली और विपक्ष की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। विपक्ष में संप्रग के 63, तृणमूल कांग्रेस के 34, तेदेपा के 16 सांसद हैं।
बयान
‘भाजपा ने अपने सभी सांसदों को व्हिप जारी कर शुक्रवार को लोकसभा में उपस्थित रहने को कहा है। हम लोग अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त हैं।’ - अनंत कुमार, संसदीय कार्यमंत्री
‘देश में दो कानून चल रहे हैं। लोगों की विचार रखने के लिए हत्या कर दी जा रही है। दुनिया में भारत की छवि बर्बाद कर दी गई है। अविश्वास प्रस्ताव के जरिये हम सरकार को आईना दिखाएंगे।’ - आनंद शर्मा, कांग्रेस प्रवक्ता