फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Death penalty for mob violence and rape of a minor all three bills approved in Lok Sabha

नए आपराधिक कानून: मॉबलिंचिंग और नाबालिग से दुष्कर्म पर फांसी, लोकसभा में तीनों विधेयकों को मंजूरी

Thu, 21 Dec 2023 03:05 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Thu, 21 Dec 2023 03:05 AM IST
सार

भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने वाले भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साध्य अधिनियम विधेयकों पर मंगलवार को चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, हम हर मामले में गुलामी से मुक्ति चाहते हैं।

विज्ञापन
Death penalty for mob violence and rape of a minor all three bills approved in Lok Sabha
Parliament. - फोटो : Social Media

विस्तार

त्वरित इंसाफ सुनिश्चित करने और तंत्र को जवाबदेह बनाने के लिए आपराधिक कानूनों में संशोधन से जुड़े तीन अहम विधेयकों पर बुधवार को लोकसभा ने मुहर लगा दी। इन विधेयकों में भीड़ हिंसा और नाबालिग से दुष्कर्म में फांसी की सजा का प्रावधान है। ट्रायल अदालतों को एफआईआर दर्ज होने के तीन साल में हर हाल में सजा सुनानी होगी। राजद्रोह को खत्म कर, उसकी जगह देशद्रोह को शामिल किया गया है। अपराध कर विदेश भाग जाने वाले या कोर्ट में पेश न होने वालों के खिलाफ उसकी अनुपस्थिति में सुनवाई होगी। सजा भी सुनाई जा सकेगी।
विज्ञापन


भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेने वाले भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साध्य अधिनियम विधेयकों पर मंगलवार को चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, हम हर मामले में गुलामी से मुक्ति चाहते हैं। सामान्य लोगों को न्याय दिलाने के लिए इससे जुड़ी प्रक्रिया को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना चाहते हैं। हम नहीं चाहते कि न्याय पाने के लिए आजादी के बाद से जारी तारीख पर तारीख की परंपरा जारी रहे। हम नहीं चाहते कि जिन राजद्रोह कानून के आधार पर महात्मा गांधी, तिलक समेत कई स्वतंत्रता सेनानी वर्षों तक जेल में रहे, उसे बरकरार रखा जाए। नए कानून मानव केंद्रित होंगे। मोदी सरकार के कार्यकाल में भीड़ पर खूब राजनीति हुई। हिंसा पर । राजनीति करने वाले सत्ता में थे, तब कानूनी प्रावधान नहीं किए। यह काम मोदी सरकार ने किया। 
विज्ञापन


सरकार की आलोचना का अधिकार, देश की नहीं
गृह मंत्री शाह ने कहा, हमारी सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की समर्थक है। सरकार की आलोचना हो सकती है, मगर देश की नहीं। इसलिए हम राजदार कानून को राजनीति खत्म कर देशद्रोह कानून लाए हैं। जो देश के खिलाफ हैं, उन्हें हर हाल में सजा मिलनी ही चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


दया याचिका दायर की
गृह मंत्री ने कहा, दया याचिका के जरिये देश को तोड़ने वालों के हित में राजनीति की गई। इस पर रोक के लिए विधेयक में सजा पाए व्यक्ति को ही दया याचिका दाखिल करने का अधिकार दिया पर विराम गया है। अब एनजीओ या कोई और किसी के नाम पर दया याचिका दायर कर राजनीति नहीं कर पाएगा।


देशद्रोह की नई परिभाषा
गृह मंत्री ने कहा, समय की जरूरत के अनुरूप देशद्रोह को नए सिरे से परिभाषित किया गया है। ऐसा कोई भी कृत्य जिससे देश की सुरक्षा और संप्रभुता पर आंच आती हो, देश में आर्थिक संकट की संभावना बनती हो, ये सभी कृत्य अब देशद्रोह के दायरे में आएंगे। सशस्त्र विरोध करने, बम धमाके करने वालों की असली जगह जेल है। उसे आजाद रहने का अधिकार नहीं है। देश का किसी भी तरीके से विरोध के मामले में अब सलाखों में जाना ही होगा।

खत्म होगी तारीख पर तारीख की परंपरा
  • एफआईआर दर्ज होने के बाद ट्रायल कोर्ट को तीन वर्ष में सुनानी होगी सजा
  • राजद्रोह की जगह देशद्रोह का प्रावधान
  • आरोपियों की गैरमौजूदगी में भी होगा ट्रायल, सुनाई जा सकेगी सजा
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed