बच्चों का टीका: कब तक शुरू होगा छह साल से ऊपर के बच्चों का टीकाकरण? जानें कितना सुरक्षित होगा बच्चों को वैक्सीन लगवाना
आईसीएमआर के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. रमन गंगाखेड़कर कहते हैं कि अगर बच्चों को कोई गंभीर बीमारी है तो उन्हें कोरोना संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। इस तरह के बच्चों के लिए ये वैक्सीन बहुत जरूरी है।
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ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने बच्चों के लिए कोरोना की तीन वैक्सीन को आपात इस्तेमाल (EUA) के लिए मंजूरी दे दी है। 6-12 साल तक के बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन 'कोवाक्सिन' (Covaxin) और 5 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए बायोलॉजिकल ई के कोविड-19 वैक्सीन कॉर्बेवैक्स (Corbevax) को मंजूरी मिली है। वहीं, 12 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों के लिए ZycovD (Zydus Cadila Vaccine) को भी मंजूरी मिली है। 12 साल से अधिक उम्र के बच्चों को पहले से ही वैक्सीन लग रही थी। अब 5 से 12 साल तक के बच्चों के वैक्सीनेशन का रास्ता भी साफ हो गया है।
नई वैक्सीन की मंजूरी के बाद क्या बदलेगा? 5 साल से अधिक उम्र के बच्चों का वैक्सीनेशन कब तक शुरू हो जाएगा? बच्चों की वैक्सीन की ये मंजूरी कितनी अहम है? बच्चों की ये वेैक्सीन कितनी सुरक्षित हैं? ये वैक्सीन कितनी असरदार हैं? आइये समझते हैं…
वैक्सीन की मंजूरी के क्या मायने हैं?
भारत में कोरोना की वैक्सीन को वैज्ञानिक तरीके से अलग-अलग चरण में अलग-अलग आयुवर्ग के लोगों को लगाई जा रही है। पहले चरण में स्वास्थ्य कर्मियों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के साथ हाईरिस्क वाले मरीजों और बुजुर्गों का वैक्सीनेशन शुरू हुआ। इसके बाद वयस्कों को वैक्सीन लगाने की शुरुआत हुई। वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ने और बच्चों पर वैक्सीन के ट्रायल के बाद इस साल जनवरी में 15 से 18 साल तक के बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू हुआ। इसके बाद मार्च में 12 से 14 साल तक के बच्चों के वैक्सीनेशन को भी मंजूरी मिली। अब इसी कड़ी में 5 साल से अधिक उम्र के बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू होना अहम है। वैक्सीन निर्माताओं द्वारा किए गए ट्रायल के परिणामों के नतीजे डीसीजीआई को सौंपे थे। इन नतीजों का अध्ययन करने के बाद ही डीसीजीआई ने बच्चों के वैक्सीनेशन को आपात मंजूरी दी है।
मंजूरी मिल गई तो क्या अब बच्चों का वैक्सीनेशन तुरंत शुरू हो जाएगा?
डीजीसीआई की मंजूरी मिलने के बाद सरकार की विशेषज्ञों की तीन अलग-अलग कमेटियां इसका अध्ययन करेंगी। इनमें टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह, कोरोना कार्य समूह और स्थायी तकनीकी उप-समिति शामिल हैं। इन कमेटियों की मंजूरी के बाद वैक्सीन प्रबंधन पर बना राष्ट्रीय विशेषज्ञ समूह स्वास्थ्य मंत्रालय को इन दोनों टीकों के इस्तेमाल की सिफारिश करेगा। इसके बाद मंत्रालय की ओर से वैक्सीनेशन शुरू होने की जानकारी दी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ दिन लग सकते हैं। यानी, आने वाले कुछ दिनों में पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू हो जाएगा।
बच्चों को वैक्सीन लगवाना कितना सुरक्षित होगा?
आईसीएमआर के पूर्व प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. रमन गंगाखेड़कर कहते हैं कि अगर बच्चों को कोई गंभीर बीमारी है तो उन्हें कोरोना संक्रमित होने का खतरा ज्यादा है। इस तरह के बच्चों के लिए ये वैक्सीन बहुत जरूरी है। जिन बच्चों को गंभीर बीमारी नहीं उनका क्या? इस सवाल के जवाब में डॉक्टर गंगाखेड़कर कहते हैं कि इस तरह के बच्चों को ये देखना होगा कि क्या उन्हें ओमिक्रॉन का संक्रमण हुआ था या नहीं? अगर बच्चे संक्रमित हुए होंगे तो उन्हें कुछ दिन तक वैक्सीन देना टाला जा सकता है। क्योंकि उन्हें एक हद तक कोरोना से प्रोटेक्शन है। जिन्हें ओमिक्रॉन नहीं हुआ है उनके संक्रमित होने का डर रहेगा।
जो माता-पिता नहीं देना चाहते हैं तो उनको क्या खतरा होगा? इस सवाल पर डॉक्टर गंगाखेड़कर कहते हैं कि डॉक्टर सिर्फ वैक्सीन के फायदे बता सकता है। बाकी वैक्सीन लगवाना और नहीं लगवाना ये माता-पिता का फैसला होगा। डॉक्टर सिर्फ मरीज के सवालों का जवाब दे सकता है। लगवाना नहीं लगवाने का फैसला उसे करना होता है।
बच्चों के लिए वैक्सीन को मंजूरी मिलना कितना अहम हैं?
कोरोना की वैक्सीन गंभीर बीमारी, संक्रमित को हॉस्पिटलाइजेशन और मौत के खतरे से बचाती है।अब बच्चों के स्कूल खुल चुके हैं ऐसे में वैक्सीनेशन उन्हें कोरोना से बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है। भारत ही नहीं दूसरे देशों में भी पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों का वैक्सीनेशन शुरू हो चुका है। अमेरिका की सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने भी पांच साल से अधिक उम्र के सभी बच्चों को वैक्सीन लगाने की सिफारिश की है। अमेरिका में फाइजर की एमआरएनए वैक्सीन का इस्तेमाल बच्चों को लगाने के लिए किया जा रहा है।
जिन दो वैक्सीन को मंजूरी मिली है उनमें से कौन सी ज्यादा असरदार है?
भारत बायोटेक की कोवाक्सिन का ट्रायल दो से 18 साल तक बच्चों पर सफल रहा है। ट्रायल के नतीजों पर कंपनी बताया कि वयस्कों के मुकाबले बच्चों में 1.7 गुना ज्यादा एंटीबॉडी बनती हैं। जिन बच्चों को कोवाक्सिन की दोनों डोज लगी छह महीने बाद भी उनका इम्यून रिस्पॉन्स बहुत अच्छा था। कंपनी का कहना है कि ट्रायल के नतीजे बहुत अच्छे रहे हैं। ये नतीजे बताते हैं कि बच्चों में ये वैक्सीन बहुत सुरक्षित है। कोवाक्सिन को छह से अधिक उम्र के बच्चों के लिए मंजूरी मिली है। वहीं, कॉर्बेवैक्स वैक्सीन को पांच साल से अधिक उम्र के बच्चों को लगाया जाएगा। कोवाक्सिन की तरह कॉर्बेवैक्स के दो डोज 28 दिन के अंतर पर लगेंगे। कॉर्बेवैक्स को हैदराबाद की कंपनी बायोलॉजिकल ई बना रही है। कॉर्बेवैक्स कितनी असरदार है अगर इसकी बात करें तो पांच से 12 साल तक बच्चों के क्लीनिकल ट्रयाल का डेटा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है। यहां तक की वयस्कों के ट्रायल का डेटा भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ये बताना मुश्किल है कि ये वैक्सीन कितनी असरदार है।