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ITBP: भारत-चीन बॉर्डर पर हिमवीरों को लेकर बड़ा फैसला, ऑक्सीजन की कमी व ठंड से बचाव के उपाय करेगा DBT

Thu, 31 Jul 2025 07:52 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Thu, 31 Jul 2025 07:52 PM IST
सार

आईटीबीपी के हिमवीरों के स्वास्थ्य और जीवन-स्तर में सुधार के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के मध्य एक महत्त्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

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DBT will take measures to protect ITBP Himveers from lack of oxygen and extreme cold on Indo-China border
डीबीटी सचिव डॉ. राजेश एस गोकले और आईटीबीपी महानिदेशक राहुल रसगोतरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भारत-चीन बॉर्डर की हिमालयी सीमाओं पर कठिन परिस्थितियों में तैनात आईटीबीपी के हिमवीरों के स्वास्थ्य और जीवन-स्तर में सुधार के लिए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के मध्य एक महत्त्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम में डीबीटी के सचिव डॉ. राजेश एस गोकले और आईटीबीपी के महानिदेशक राहुल रसगोतरा तथा दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस समझौते का उद्देश्य, यह सहयोग उन विशेष स्वास्थ्य एवं पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान खोजने पर केंद्रित होगा, जिनका सामना ऊंचाई और कठिन मौसम में तैनात आईटीबीपी के हिमवीरों को करना पड़ता है। भारत-चीन बॉर्डर पर आईटीबीपी हिमवीरों को ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक ठंड से बचाव के लिए डीबीटी उपाय सुझाएगा।    

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आईटीबीपी के मुताबिक, इस समझौते ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार किए जाएंगे। इनमें ऊंचाई से जुड़ी बीमारियां, ऑक्सीजन की कमी (हाइपोक्सिया) और अत्यधिक ठंड से बचाव के उपाय, शामिल हैं। उन्नत चिकित्सा सुविधाएं, जैसे सीमावर्ती चौकियों तक अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरण और टेलीमेडिसिन सेवाएं, मुहैया कराने की रणनीति बनेगी। पोषण एवं तनाव प्रबंधन के तहत जवानों के लिए विशेष आहार, तनाव-नियंत्रण उपाय और आनुवांशिक अनुसंधान पर फोकस रहेगा। क्षमता निर्माण के तहत आईटीबीपी के चिकित्सा कर्मियों के लिए नवीनतम जैव-प्रौद्योगिकी विधियों पर प्रशिक्षण व कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।  
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इस समझौते ज्ञापन के तहत कई दूसरी विशेष पहल की जाएंगी। संयुक्त अनुसंधान के अंतर्गत, ज्यादा ऊंचाई पर शरीर और मन पर पड़ने वाले प्रभावों का गहन अध्ययन किया जाएगा। विशेष समाधान के तहत पौष्टिक सप्लीमेंट, आपातकालीन चिकित्सा किट और ठंड से बचाव के उपकरणों का विकास होगा। मोबाइल लैब व टेलीमेडिसिन यूनिट, इसके जरिए दूरस्थ चौकियों तक त्वरित चिकित्सा सहायता पहुंचाने की सुविधा पर फोकस रहेगा। ज्ञान विनिमय के तहत वैज्ञानिकों और आईटीबीपी चिकित्सा दल के बीच नियमित कार्यशालाएँ और संवाद होगा। यह समझौता उन हिमवीरों के लिए एक बड़ा कदम है, जो देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए सबसे कठिन परिस्थितियों का सामना करते हैं।

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