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बिलकिस बानो केस: SC की टिप्पणियों के बाद कांग्रेस का केंद्र-गुजरात सरकार पर निशाना, पूछा- दोषियों को छूट क्यों

Wed, 19 Apr 2023 05:27 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 19 Apr 2023 05:27 PM IST
सार

कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, यह कोई साधारण अपराध या सिर्फ सामूहिक दुष्कर्म नहीं था, उसके (बिलकिस बानो) बच्चों की हत्या कर दी गई...क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि उन पर क्या बीती होगी और गुजरात सरकार व केंद्र सरकार कहती है कि ये फाइलें विशेषाधिकार हैं।

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Day after SC observations Congress slams Centre Gujarat govt over remission to convicts in Bilkis case
कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत - फोटो : एजेंसी (फाइल)

विस्तार

पिछले साल बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों को माफी दिए जाने को लेकर कांग्रेस ने बुधवार को केंद्र और गुजरात सरकार पर निशाना साधा और कहा कि जिस आधार पर ऐसे अपराधियों को रिहा किया गया, उसकी सच्चाई सामने लाने की जरूरत है। विपक्षी दल की ओर से यह बयान तब आया है, जब एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार से इसको लेकर सवाल किया। शीर्ष कोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता पर विचार किया जाना चाहिए था। इसने पूछा कि क्या इसमें कोई सोच-समझकर काम किया गया था। केंद्र और गुजरात सरकार ने अदालत से यह भी कहा कि वे 27 मार्च के उसके आदेश पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर कर सकते हैं। 

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कांग्रेस ने पूछा- किस आधार पर दुर्दांत अपराधियों को रिहा किया
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और अदालत की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, यह कोई साधारण अपराध या सिर्फ सामूहिक दुष्कर्म नहीं था, उसके बच्चों की हत्या कर दी गई...क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि उन पर क्या बीती होगी और गुजरात सरकार व केंद्र सरकार कहती है कि ये फाइलें विशेषाधिकार हैं। उन्होंने कहा, विशेषाधिकार क्या है, क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा है? यह एक महिला के अधिकार का मामला है। आपको सच सामने रखना होगा कि आपने किस आधार पर ऐसे दुर्दांत अपराधियों को रिहा किया और किस आधार पर आपके लोग उन्हें 'संस्कारी' कहते हैं।  
 

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आज यह महिला है, कल हम और आप हो सकते हैं....
जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने दोषियों की समय पूर्व रिहाई का कारण पूछते हुए उन्हें जेल में रहने की अवधि के दौरान दी गई पैरोल पर भी सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मंगलवार को मामले की सुनवाई करते हुए कहा था, 'आज यह महिला (बिलकिस) है लेकिन कल यह कोई भी हो सकता है। यह आप या मैं हो सकते हैं। यदि आप छूट देने के लिए अपने कारण नहीं बताते हैं, तो हम अपने स्वयं के निष्कर्ष निकालेंगे।
 

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सरकार क्या छिपाने की कोशिश कर रही: सुप्रिया श्रीनेत
श्रीनेत ने कहा, सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूछा गया सवाल सही है। देश की हर महिला आज यही पूछ रही है कि मोदी और उनके लोग ऐसे लोगों को क्यों बचा रहे हैं। स्मृति ईरानी और अन्य कहां हैं, वे मुंह पर टेप लगाकर बैठे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूछा गया सवाल इस देश की अंतरात्मा को झकझोर देता है कि कल बिलकिस बानो थी और आज यह कोई और हो सकता है। उन्होंने कहा, सरकार क्या छिपाने की कोशिश कर रही है। यहां राष्ट्रीय सुरक्षा के बारे में कुछ भी नहीं है, बिलकिस बानो के दोषियों को कैसे रिहा किया गया, इसकी सच्चाई सामने आने की जरूरत है। मेरे सहित देश की हर महिला जानना चाहती है कि किस आधार पर उन्हें रिहा किया गया? 
 

गुजरात सरकार ने 11 दोषियों को दी थी सजा में छूट
2002 के गोधरा दंगों के दौरान बिलकिस बानो के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उनके परिवार के सदस्यों की हत्या को 'भयावह' कृत्य करार देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 27 मार्च को गुजरात सरकार से पूछा था कि क्या मामले में 11 दोषियों को सजा में छूट देते समय हत्या के अन्य मामलों की तरह एक समान मानक लागू किए गए थे। कोर्ट ने बानो की याचिका पर केंद्र, गुजरात सरकार और अन्य से जवाब मांगा था। गुजरात सरकार ने सभी 11 दोषियों को सजा में छूट दी थी और पिछले साल 15 अगस्त को उन्हें रिहा कर दिया गया था।
 

जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट माकपा नेता सुभाषिनी अली, स्वतंत्र पत्रकार रेवती लॉल, लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा और तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा दोषियों की रिहाई के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। बानो तब 21 साल की थी और पांच महीने की गर्भवती थी जब गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद भड़के दंगों से भागते समय उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। मारे गए परिवार के सात सदस्यों में उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी।

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