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बारात की इजाजत पाने के लिए भटक रहा है यह दलित दूल्हा, गांव में तनाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कासगंज
Updated Sun, 01 Apr 2018 01:52 PM IST
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शीतल का परिवार
उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के बसाई बबस गांव में रहने वाला 27 साल का दलित युवक संजय कुमार दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर है। उसका सवाल है कि क्या मैं हिंदू नहीं हूं? क्या हमारा संविधान अलग है? वह पिछले कुछ महीनों से हर सरकारी दफ्तर के अलावा, स्थानीय पुलिस से लेकर डीजीपी तक और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एससी/एसटी कमिशन से लेकर विधायक तक के पास अपनी शिकायत दर्ज करवा चुका है। वह चक्कर केवल इसलिए काट रहा है ताकि ठाकुर बहुल इलाके से अपनी बारात निकाले जाने की इजाजत हासिल कर सके। इजाजत के लिए कुमार ने 15 मार्च को इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी अपील की थी।
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कुमार की शादी को अब केवल 20 दिन बाकी है। पिछले हफ्ते कासगंज के जिला मजिस्ट्रेट आरपी सिंह और पुलिस अधीक्षक पीयूष श्रीवास्तव के साथ कुमार दुल्हन शीतल के गांव निजामाबाद गया था। उसने पुलिस और मजिस्ट्रेट को बारात के आने-जाने का रूट दिखाया। जिसके बाद सिंह ने कुमार से कहा कि ठाकुर परिवारों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले रास्ते से बारात नहीं जाएगी। शीतल के परिवार से कहा गया है कि बारात के लिए उसी रास्ते का इस्तेमाल किया जाए जिससे गांव के सभी दलितों की बारात जाती है और ठाकुरों से उस रोड को साफ रखने को कहा गया है।
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इस फैसले का शीतल का परिवार विरोध कर रहा है। उनका कहना है कि यह हमारे सम्मान की बात है। हम काफी जोर-शोर के साथ दूल्हे का स्वागत करना चाहते हैं और घोड़े वाली बारात चाहते हैं। गांव की सड़कें जितनी ठाकुरों की हैं उतनी ही हमारी भी हैं। इसकी वजह से जाटव (शीतल और संजय इसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं) और ठाकुरों के बीच तनाव का माहौल है।
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गांव की प्रधान ठाकुर कांति देवी का कहना है- हमें कोई दिक्कत नहीं है। लड़की की शादी हो, ठाकुर लोगों को कोई एलर्जी नहीं है। दिक्कत यह है कि कोई जबर्दस्ती हमारे रास्ते पर आएगा और दीवार तोड़ेगा। जब बारात कभी हमारे रास्ते से निकली नहीं तो क्यों विवाद वाला काम कर रहे हो। दूसरे ठाकुर संजय सिंह का कहना है कि हमने उनसे कहा है कि कोई नई चीज शुरू ना करें क्योंकि इससे लड़ाई हो सकती है। उनकी सीमाओं को चिह्नित किया गया है और उन्हें उसमें ही रहना चाहिए।