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Dalai Lama: भारत-चीन मिलकर काम करेंगे तो पूरी दुनिया को फायदा होगा, दलाई लामा ने अपने लेख में कहीं बड़ी बातें

Thu, 05 Jan 2023 03:49 PM IST
Jeet Kumar पीटीआई, तिरुवनंतपुरम
पीटीआई, तिरुवनंतपुरम Published by: Jeet Kumar Updated Thu, 05 Jan 2023 03:49 PM IST
सार

आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने कहा कि मैं वास्तव में महसूस करता हूं कि अहिंसा और करुणा के खजाने में निहित शांतिपूर्ण समझ की अपनी महान परंपरा के कारण भारत अग्रणी भूमिका निभा सकता है।

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Dalai Lama said If the people of India and China work together, the whole world will benefit
दलाई लामा - फोटो : ट्विटर

विस्तार

तिब्बती गुरु दलाई लामा अपने सादगी के लिए जाने जाते हैं, वह दुनियाभर में अहिंसा का प्रचार करते हैं। वहीं अब उन्होंने एक लेख लिखा है जिसमें उन्होंने कहा कि अगर भारत और चीन के लोग 'अहिंसा' और 'करुणा' के मार्ग पर चलेंगे तो पूरी दुनिया को फायदा होगा। दलाई लामा का कहना है कि चीन ऐतिहासिक रूप से बौद्ध देश है और वह प्राचीन भारतीय ज्ञान के साथ अहिंसा और करुणा के आदर्शों का पालन करता है तो पूरी दुनिया को इससे फायदा होगा। दोनों देशों में डेढ़ अरब लोगों को इससे आंतरिक शांति मिलेगी।

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भारत दुनिया में अग्रणी भूमिका निभा सकता है
मनोरमा इयर बुक 2023 में अपने विशेष लेख में तिब्बती बौद्ध धर्म के 87 वर्षीय आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा ने कहा कि मैं वास्तव में महसूस करता हूं कि अहिंसा और करुणा के खजाने में निहित शांतिपूर्ण समझ की अपनी महान परंपरा के कारण भारत अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि इन वर्षों में, भारत ने कई क्षेत्रों में विशेष रूप से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के संदर्भ में काफी प्रगति की है। फिर भी बाहरी निरस्त्रीकरण (किसी देश के पास हथियारों की संख्या कम करना) आवश्यक है, आंतरिक निरस्त्रीकरण भी कम करना महत्वपूर्ण है।
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 करुणा सभी सुखों का मूल
उन्होंने कहा कि विश्व शांति के लिए लोगों को अपने भीतर मन की शांति की आवश्यकता है, और यह भौतिक विकास और भौतिक सुख की खोज से अधिक महत्वपूर्ण है। करुणा मानव स्वभाव का चमत्कार है, एक बहुमूल्य आंतरिक संसाधन है और समाज के भीतर हमारे व्यक्तिगत कल्याण और सद्भाव दोनों की नींव है। जब से हम पैदा होते हैं, तब से हमारी मां हमारा ख्याल रखती है। इसलिए, बहुत छोटी उम्र से ही हम सीखते हैं कि करुणा सभी सुखों का मूल है।
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महात्मा गांधी 'अहिंसा' के अवतार
उन्होंने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि कि करुणा की यह स्वाभाविक प्रशंसा स्कूल जाने के बाद फीकी पड़ने लगती है। इसलिए, भारतीय शिक्षा प्रणाली में 'अहिंसा' और 'करुणा' को शामिल करने की आवश्यकता है, और इसका महान लाभ न केवल भारत में बल्कि दुनिया भर में महसूस किया जाएगा। दलाई लामा ने महात्मा गांधी को 'अहिंसा' के अवतार के रूप में सराहते हुए कहा कि वह उनके आदर्श से बहुत प्रेरित थे, जिसे डॉ. मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला ने अपनाया था।


तिब्बती भारतीय विचारों से काफी प्रभावित 
दलाई लामा ने खुद को भारत के सबसे लंबे समय तक रहने वाले मेहमानों में से एक बताते हुए कहा कि वह अपनी मातृभूमि से भागकर छह दशकों से अधिक समय तक इस देश में रहे थे, जिस पर चीनी कम्युनिस्टों ने हमला किया था और कब्जा कर लिया था। दलाई लामा ने कहा कि तिब्बती हमेशा भारतीय विचारों से काफी प्रभावित रहे हैं।

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