DA Hike: केंद्रीय कर्मियों के डीए में चार फीसदी की बढ़ोतरी संभव, महंगाई भत्ता 42 फीसदी हुआ तो मिलेगा इतना वेतन
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विस्तार
केंद्रीय कर्मियों के महंगाई भत्ते (डीए) और पेंशनरों की महंगाई राहत (डीआर) में चार फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है। मौजूदा समय में उन्हें 38 फीसदी के हिसाब से डीए/डीआर मिलता है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा पिछले दिनों जारी घरेलू उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़ों में मुद्रास्फीति की दर बढ़ी हुई है। जनवरी 2023 (अंतिम) में महंगाई दर, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) 'सामान्य' ग्रामीण क्षेत्र में 6.85 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में छह फीसदी रही है। दोनों को मिलाकर यह दर 6.52 फीसदी रही है। ऐसे में कर्मियों के महंगाई भत्ते में कम से कम चार फीसदी की वृद्धि हो सकती है। यदि किसी कर्मचारी का वेतन 18 हजार रुपये है और डीए में चार फीसदी की वृद्धि होती है तो 42 फीसदी महंगाई भत्ते के हिसाब से उसके वेतन में लगभग 720 रुपये बढ़ जाएंगे।
केंद्र सरकार के कर्मियों और पेंशनरों को गत वर्ष दीवाली से पहले महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत का तोहफा मिला था। उस वक्त लगभग 48 लाख केंद्रीय कर्मियों की जेब में चार फीसदी डीए आया था। महंगाई राहत में भी इतनी ही वृद्धि हुई थी। इसका फायदा 64 लाख पेंशनरों को पहुंचा था। उक्त भत्ता पहली जुलाई 2022 से प्रदान किया गया था। केंद्रीय कर्मचारी संगठन के एक वरिष्ठ पदाधिकारी बताते हैं, सरकार को बढ़ी हुई महंगाई दर के हिसाब से उनके डीए में चार फीसदी की बढ़ोतरी करनी चाहिए। केंद्रीय कर्मियों को कोरोनाकाल के डीए/डीआर का 18 माह का बकाया एरियर अभी तक नहीं मिला है। केंद्र सरकार इस पर मौन है। पहले महंगाई भत्ता एवं महंगाई राहत में हर वर्ष पहली जनवरी और पहली जुलाई से बढ़ोतरी होती रही है। पिछले कुछ वर्षों से इस ट्रेंड में बदलाव देखा गया है। अब भत्ते जारी होने की तिथि आगे बढ़ती जा रही है। गत वर्ष जुलाई से डीए में जो बढ़ोतरी होनी थी, वह सितंबर के अंत में हुई थी। दीवाली से पहले सरकारी कर्मियों को डीए/डीआर की सौगात प्रदान की गई।
चार फीसदी डीए बढ़ा तो वेतन में होगी इतनी बढ़ोतरी
- अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन 18 हजार रुपये है और डीए में चार फीसदी की वृद्धि होती है तो 42 फीसदी महंगाई भत्ते के हिसाब से उसके वेतन में लगभग 720 रुपये बढ़ जाएंगे। 38 फीसदी के हिसाब से डीए 6840 रुपये बनता था, 42 फीसदी के हिसाब से 7560 रुपये होगा। यानी डीए की दर में बढ़ोतरी के बाद उसके वेतन में 720 रुपये का इजाफा हो जाएगा।
- कर्मचारी का मूल वेतन 25 हजार रुपये है तो उसे प्रतिमाह 1000 रुपये का फायदा होगा। 38 फीसदी के हिसाब से उसका डीए 9500 रुपये बनता था, 42 फीसदी के हिसाब से 10500 रुपये होगा। यानी डीए की दर में बढ़ोतरी के बाद उसके वेतन में 1000 रुपये का इजाफा हो जाएगा।
- जिस कर्मी की बेसिक सेलरी 35 हजार रुपये है, तो उसे प्रतिमाह 1400 रुपये ज्यादा मिलेंगे। 38 फीसदी के हिसाब से डीए 13300 रुपये बनता था, 42 फीसदी के हिसाब से 14700 रुपये होगा। यानी डीए की दर में बढ़ोतरी के बाद उसके वेतन में 1400 रुपये का इजाफा हो जाएगा।
- 45 हजार रुपये बेसिक सेलरी वाले कर्मी के लगभग 1800 रुपये बढ़ेंगे। मौजूदा समय में 38 फीसदी के हिसाब से डीए 17100 रुपये बनता है, 42 फीसदी के हिसाब से 18900 रुपये होगा। यानी डीए की दर में बढ़ोतरी के बाद उसके वेतन में 1800 रुपये का इजाफा हो जाएगा।
- ऐसे कर्मी, जिन्हें 52 हजार रुपये बेसिक सेलरी मिलती है, डीए बढ़ोतरी पर उन्हें हर माह 2080 रुपये से ज़्यादा का लाभ होगा। 38 फीसदी के हिसाब से डीए 19760 रुपये बनता था, 42 फीसदी के हिसाब से उसे 21840 रुपये मिलेंगे। यानी डीए की दर में बढ़ोतरी के बाद उसके वेतन में 2080 रुपये का इजाफा हो जाएगा।
- 70 हजार रुपये की बेसिक सेलरी वाले कर्मचारी को लगभग 2800 रुपये का फायदा होगा। 38 फीसदी के हिसाब से उसका डीए 26600 रुपये बनता था, 42 फीसदी के हिसाब से डीए की राशि 29400 रुपये होगी। यानी डीए की दर में बढ़ोतरी के बाद उसके वेतन में 2800 रुपये का इजाफा हो जाएगा।
- 85,500 रुपये की बेसिक सेलरी पर लगभग 3420 रुपये का इजाफा होगा। 38 फीसदी के हिसाब से उसका डीए 32490 रुपये बनता है, 42 फीसदी के हिसाब से 35910 रुपये होगा। यानी डीए की दर में बढ़ोतरी के बाद उसके वेतन में 3420 रुपये का इजाफा हो जाएगा।
- एक लाख रुपये बेसिक सेलरी वाले कर्मियों के खाते में हर माह 4000 रुपये से अधिक की बढ़ोतरी होगी। 38 फीसदी के हिसाब से उसका डीए 38000 रुपये बनता था, 42 फीसदी के हिसाब से 42000 रुपये होगा। यानी डीए की दर में बढ़ोतरी के बाद उसके वेतन में 4000 रुपये का इजाफा हो जाएगा।
क्या कहता है उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई)
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा पिछले दिनों जारी घरेलू उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़ों में मुद्रास्फीति की दर बढ़ी हुई है। जनवरी 2023 (अंनतिम) में महंगाई दर, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) 'सामान्य' ग्रामीण क्षेत्र में 6.85 फीसदी और शहरी क्षेत्र में 6 फीसदी रही है। दोनों को मिलाकर यह दर 6.52 फीसदी रही है। अगर इसकी तुलना दिसंबर 2022 से करें तो ग्रामीण क्षेत्र में 6.05 फीसदी और शहरी क्षेत्र में 5.39 फीसदी रही है। दोनों को मिलाकर यह दर 5.72 फीसदी रही है। जनवरी 2022 के दौरान मुद्रास्फीति की दर ग्रामीण क्षेत्र में 6.12 प्रतिशत, शहरी क्षेत्र में 5.91 फीसदी और संयुक्त तौर पर यह दर 6.01 फीसदी थी। जनवरी 2023 (अंनतिम) में उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) के तहत महंगाई दर ग्रामीण क्षेत्र में 6.65, शहरी क्षेत्र में 4.79 फीसदी और संयुक्त दर 5.94 फीसदी है। दिसंबर 2022 में यही दर ग्रामीण क्षेत्र में 5.05, शहरी क्षेत्र में 2.80 फीसदी और संयुक्त दर 4.19 फीसदी थी। जनवरी 2022 में यह दर ग्रामीण क्षेत्र में 5.18, शहरी क्षेत्र में 5.88 फीसदी और संयुक्त दर 5.43 प्रतिशत थी।
सामान्य सूचकांक और सीएफपीआई में मासिक परिवर्तन
सीपीआई 'सामान्य' के तहत जनवरी 2023 (अंनतिम) में यह दर ग्रामीण क्षेत्र में 177.8 फीसदी, शहरी क्षेत्र में 174.9 फीसदी और संयुक्त दर 176.5 फीसदी रही है। दिसंबर 2022 'अंतिम' के दौरान ग्रामीण क्षेत्र में 177.1 फीसदी, शहरी क्षेत्र में 174.1 फीसदी और संयुक्त दर 175.7 फीसदी रही है। मासिक बदलाव को देखें तो वह ग्रामीण क्षेत्र में 0.40, शहरी क्षेत्र में 0.46 और संयुक्त तौर पर 0.46 फीसदी रहा है। (सीएफपीआई) के अंतर्गत मासिक बदलाव की दर ग्रामीण क्षेत्र में 173.3 फीसदी, शहरी क्षेत्र में 177.3 फीसदी और संयुक्त दर 174.7 फीसदी रही है। दिसंबर 2022 'अंतिम' के दौरान ग्रामीण क्षेत्र में 172.8 फीसदी, शहरी क्षेत्र में 176.5 फीसदी और संयुक्त दर 174.1 फीसदी रही है। मासिक बदलाव को देखें तो वह ग्रामीण क्षेत्र में 0.29, शहरी क्षेत्र में 0.45 और संयुक्त तौर पर 0.34 फीसदी रहा है।