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साइरस मिस्त्री : स्वभाव से एकांतप्रिय और कम दोस्त, लड़ाई में अकेले रहे
Mon, 05 Sep 2022 06:24 AM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 05 Sep 2022 06:24 AM IST
सार
स्वभाव से एकांत पसंद साइरस ने टाटा समूह में रहते हुए एक भी इंटरव्यू नहीं दिया। उनके मित्रों की सूची भी छोटी थी, इनमें बॉम्बे डाइंग के नुसली वाडिया और एनसीपी नेता सुप्रिया सुले शामिल थे।
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साइरस मिस्त्री
- फोटो : ANI
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विस्तार
सिर्फ 44 साल की उम्र में टाटा समूह के चेयरमैन बनने से पहले साइरस मिस्त्री को बहुत लोग नहीं जानते थे। जब वे 2013 में चेयरमैन बने तो परिवार के करीबियों के साथ बाकी लोगों को भी आश्चर्य हुआ। रतन टाटा के हटने के बाद खुद सायरस भी यह पद नहीं चाहते थे, जब रतन टाटा ने जोर डाला, तो वह नमक से सॉफ्टवेयर तक बनाने वाले 10 हजार करोड़ डॉलर के इस साम्राज्य को संभालने के लिए राजी हुए। हालांकि, चार साल पूरे होने से पहले ही टाटा के बोर्ड ने साइरस को चेयरमैन पद से हटाने के लिए वोट दे दिया।
अक्तूबर 2016 को रतन टाटा लौटे और एन चंद्रशेखरन को कमान सौंप दी गई। साइरस ने टाटा समूह की कार्यप्रणाली में कई बदलाव लाने के प्रयास किए थे, जिसे पसंद नहीं किया गया। यहीं से कड़वाहट बढ़ी और उन्हें समूह से बाहर कर दिया गया। उनके पिता पलोनजी को कारोबारी जगत में प्रभावशाली माना जाता था, वे भी नहीं बचा सके। साइरस की मौत के बाद आज भी यह साफ नहीं हो पाया है कि उन्हें पद से इतने छोटे कार्यकाल के बाद क्यों हटा दिया गया? स्वभाव से एकांत पसंद साइरस ने टाटा समूह में रहते हुए एक भी इंटरव्यू नहीं दिया। उनके मित्रों की सूची भी छोटी थी, इनमें बॉम्बे डाइंग के नुसली वाडिया और एनसीपी नेता सुप्रिया सुले शामिल थे। यही लोग टाटा समूह से निकालेे जाने पर उनकी लड़ाई में साथ खड़े रहे।
फिर भी खूब लड़ी लड़ाई
साइरस अपने निष्कासन की वजह जानना चाहते थे, जिसके लिए सबसे पहले राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में गए। यहां 2018 में केस रद्द हुआ तो कंपनी अपीलीय ट्रिब्यूनल का रुख किया, जिसने 2019 में उन्हें टाटा समूह का चेयरमैन फिर से बनाने का आदेश दिया। हालांकि, 2020 में जब टाटा समूह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, तो साइरस ने चेयरमैन पद लेने से इन्कार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द कर
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दिया। बाद के वर्षों में साइरस फिर से एकांतप्रिय स्वभाव में लौट गए।
लंदन से ली थी मैनेजमेंट की डिग्री
साइरस ने मुंबई से पढ़ाई की थी। इसके बाद इंपीरियल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग, लंदन बिजनेस स्कूल से इंजीनियरिंग और प्रबंधन की मास्टर डिग्री हासिल की। साइरस ने 1991 में अपना फैमिली बिजनेस जॉइन किया था। उन्हें 1994 में शापूरजी पलोनजी ग्रुप का निदेशक नियुक्त किया गया था। इस समूह के साथ करीब 50 हजार लोग काम करते हैं।
आयरलैंड में जन्मे साइरस 2012 में बने थे टाटा समूह के अध्यक्ष
साइरस मिस्त्री भारतीय मूल के सफल उद्योगपति पलोनजी शापूरजी मिस्त्री के पुत्र थे। उनका जन्म 4 जुलाई, 1968 में आयरलैंड में हुआ था। साइरस मिस्त्री 1 सितंबर, 2006 को टाटा संस के निदेशक बोर्ड में शामिल हुए थे। 28 दिसंबर, 2012 को रतन टाटा के उत्तराधिकारी के रूप में टाटा समूह के 6वें अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे। टाटा ग्रुप में शापूरजी पलोनजी की 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है।
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अक्तूबर 2016 को रतन टाटा लौटे और एन चंद्रशेखरन को कमान सौंप दी गई। साइरस ने टाटा समूह की कार्यप्रणाली में कई बदलाव लाने के प्रयास किए थे, जिसे पसंद नहीं किया गया। यहीं से कड़वाहट बढ़ी और उन्हें समूह से बाहर कर दिया गया। उनके पिता पलोनजी को कारोबारी जगत में प्रभावशाली माना जाता था, वे भी नहीं बचा सके। साइरस की मौत के बाद आज भी यह साफ नहीं हो पाया है कि उन्हें पद से इतने छोटे कार्यकाल के बाद क्यों हटा दिया गया? स्वभाव से एकांत पसंद साइरस ने टाटा समूह में रहते हुए एक भी इंटरव्यू नहीं दिया। उनके मित्रों की सूची भी छोटी थी, इनमें बॉम्बे डाइंग के नुसली वाडिया और एनसीपी नेता सुप्रिया सुले शामिल थे। यही लोग टाटा समूह से निकालेे जाने पर उनकी लड़ाई में साथ खड़े रहे।
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फिर भी खूब लड़ी लड़ाई
साइरस अपने निष्कासन की वजह जानना चाहते थे, जिसके लिए सबसे पहले राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में गए। यहां 2018 में केस रद्द हुआ तो कंपनी अपीलीय ट्रिब्यूनल का रुख किया, जिसने 2019 में उन्हें टाटा समूह का चेयरमैन फिर से बनाने का आदेश दिया। हालांकि, 2020 में जब टाटा समूह ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की, तो साइरस ने चेयरमैन पद लेने से इन्कार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनल का आदेश रद्द कर
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दिया। बाद के वर्षों में साइरस फिर से एकांतप्रिय स्वभाव में लौट गए।
लंदन से ली थी मैनेजमेंट की डिग्री
साइरस ने मुंबई से पढ़ाई की थी। इसके बाद इंपीरियल कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग, लंदन बिजनेस स्कूल से इंजीनियरिंग और प्रबंधन की मास्टर डिग्री हासिल की। साइरस ने 1991 में अपना फैमिली बिजनेस जॉइन किया था। उन्हें 1994 में शापूरजी पलोनजी ग्रुप का निदेशक नियुक्त किया गया था। इस समूह के साथ करीब 50 हजार लोग काम करते हैं।
आयरलैंड में जन्मे साइरस 2012 में बने थे टाटा समूह के अध्यक्ष
साइरस मिस्त्री भारतीय मूल के सफल उद्योगपति पलोनजी शापूरजी मिस्त्री के पुत्र थे। उनका जन्म 4 जुलाई, 1968 में आयरलैंड में हुआ था। साइरस मिस्त्री 1 सितंबर, 2006 को टाटा संस के निदेशक बोर्ड में शामिल हुए थे। 28 दिसंबर, 2012 को रतन टाटा के उत्तराधिकारी के रूप में टाटा समूह के 6वें अध्यक्ष नियुक्त किए गए थे। टाटा ग्रुप में शापूरजी पलोनजी की 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है।