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Cyber Crime: डिजिटल ठगी रोकने के लिए TRAI का सबसे सख्त आदेश जारी, कहा- 60 दिन में बदलने होंगे SMS के टेम्पलेट
Tue, 18 Nov 2025 09:26 PM IST
हिमांशु चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु चंदेल
Updated Tue, 18 Nov 2025 09:26 PM IST
सार
TRAI Rules: ट्राई ने व्यावसायिक एसएमएस में इस्तेमाल होने वाले सभी वेरिएबल तत्व जैसे लिंक, ऐप यूआरएल और कॉल-बैक नंबर को प्री-टैग करना अनिवार्य कर दिया है। यह कदम बढ़ते डिजिटल फ्रॉड, फिशिंग और मालिशियस लिंक से जुड़े अपराधों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। सभी कंपनियों को 60 दिन में टेम्पलेट अपडेट करना होगा।
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ट्राई के सख्त नियम
- फोटो : PIB
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विस्तार
टेलीकॉम क्षेत्र में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड और फर्जी लिंक के इस्तेमाल को रोकने के लिए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने बड़ा कदम उठाया है। ट्राई ने सभी एक्सेस प्रोवाइडर्स को निर्देश दिया है कि अब से व्यावसायिक एसएमएस में इस्तेमाल होने वाले सभी बदलने योग्य तत्व जैसे लिंक, ऐप डाउनलोड यूआरएल या कॉल-बैक नंबर को पहले से प्री-टैग करना अनिवार्य होगा। यह कदम बढ़ते साइबर अपराधों, फिशिंग और बैंकिंग धोखाधड़ी पर कड़ा नियंत्रण लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
ट्राई ने साफ किया है कि एसएमएस टेम्पलेट में मौजूद वेरिएबल फील्ड की पहचान अब पहले से की जानी चाहिए, ताकि ऑपरेटर्स इन्हें स्कैन कर सकें और नकली या मालिशियस लिंक को फ़ौरन ब्लॉक कर सकें। वेरिएबल फील्ड वे हिस्से होते हैं जो प्राप्तकर्ता के हिसाब से बदलते हैं जैसे लिंक, ऐप डाउनलोड पते या कॉल-बैक नंबर। अब इन तत्वों पर #url#, #callback#, #app# जैसे टैग लगाना अनिवार्य होगा। इससे ऑपरेटर्स पहचान सकेंगे कि संदेश के किन हिस्सों में खतरनाक लिंक डाले जा सकते हैं और उन्हें रोक सकेंगे।
फर्जी लिंक और फिशिंग पर सख्त कार्रवाई
ट्राई ने कहा कि कई शिकायतों और जांचों में यह पाया गया कि रजिस्टर्ड टेम्पलेट के वेरिएबल हिस्सों का अपराधियों ने गलत इस्तेमाल किया। बिना टैग वाले वेरिएबल फील्ड में स्कैमर्स ने नुकसानदेह लिंक डालकर लोगों को धोखा दिया, जिसके कारण वित्तीय नुकसान, डेटा चोरी, मैलवेयर इंस्टॉलेशन और पहचान की चोरी जैसी बड़ी घटनाएं सामने आईं। ट्राई का मानना है कि प्री-टैगिंग से न केवल धोखाधड़ी पर रोक लगेगी, बल्कि डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम में पारदर्शिता और सुरक्षा भी बढ़ेगी।
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ये भी पढ़ें- लाल किला धमाके की रिपोर्टिंग को लेकर टीवी चैनलों पर सख्त हुई सरकार, जारी की एडवाइजरी
60 दिन में पूरा करना होगा बदलाव
नए निर्देश के तहत, सभी एक्सेस प्रोवाइडर्स और प्रिंसिपल एंटिटीज जैसे बैंक, फाइनेंशियल कंपनियां, बीमा कंपनियां और बड़े कारोबारी को 60 दिनों के भीतर अपने मौजूदा टेम्पलेट्स में बदलाव करने होंगे। इस अवधि के बाद बिना टैग वाले टेम्पलेट्स से भेजे गए संदेश सीधे रिजेक्ट कर दिए जाएंगे। इस फैसले से उन लाखों यूजर्स को राहत मिलने की उम्मीद है जो साफ-सुथरी और सुरक्षित मोबाइल कम्युनिकेशन सेवाओं पर निर्भर हैं।
डिजिटल मैसेजिंग पर बढ़ेगा भरोसा
ट्राई ने कहा कि यह कदम TCCCPR 2018 के तहत मौजूद एंटी-स्पैम और एंटी-फ्रॉड फ्रेमवर्क को और मजबूत करेगा। प्री-टैगिंग से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी लिंक या नंबर संदेश भेजने से पहले वैधता की जांच से गुजरे। इससे बैंकिंग, सरकारी सेवाओं, फाइनेंस और आवश्यक सेवाओं से जुड़े संदेश सुरक्षित रहेंगे। वर्तमान समय में ऑनलाइन ठगी तेजी से बढ़ रही है और स्कैमर्स उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में ट्राई का यह निर्णय डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्राई ने चेतावनी दी है कि मालिशियस लिंक पर क्लिक करने से यूजर के मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है, बैंक अकाउंट तक अनधिकृत पहुंच मिल सकती है या व्यक्तिगत जानकारी चुरा ली जा सकती है। अपराधी नकली वेबसाइट बनाकर लोगों को झांसा देते हैं। इन खतरों को देखते हुए अब प्रत्येक वेरिएबल फील्ड की पहचान और निगरानी आवश्यक कर दी गई है। ट्राई को उम्मीद है कि इस प्रावधान से डिजिटल ठगी में भारी कमी आएगी और यूजर सुरक्षा को नया स्तर मिलेगा।
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ट्राई ने साफ किया है कि एसएमएस टेम्पलेट में मौजूद वेरिएबल फील्ड की पहचान अब पहले से की जानी चाहिए, ताकि ऑपरेटर्स इन्हें स्कैन कर सकें और नकली या मालिशियस लिंक को फ़ौरन ब्लॉक कर सकें। वेरिएबल फील्ड वे हिस्से होते हैं जो प्राप्तकर्ता के हिसाब से बदलते हैं जैसे लिंक, ऐप डाउनलोड पते या कॉल-बैक नंबर। अब इन तत्वों पर #url#, #callback#, #app# जैसे टैग लगाना अनिवार्य होगा। इससे ऑपरेटर्स पहचान सकेंगे कि संदेश के किन हिस्सों में खतरनाक लिंक डाले जा सकते हैं और उन्हें रोक सकेंगे।
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फर्जी लिंक और फिशिंग पर सख्त कार्रवाई
ट्राई ने कहा कि कई शिकायतों और जांचों में यह पाया गया कि रजिस्टर्ड टेम्पलेट के वेरिएबल हिस्सों का अपराधियों ने गलत इस्तेमाल किया। बिना टैग वाले वेरिएबल फील्ड में स्कैमर्स ने नुकसानदेह लिंक डालकर लोगों को धोखा दिया, जिसके कारण वित्तीय नुकसान, डेटा चोरी, मैलवेयर इंस्टॉलेशन और पहचान की चोरी जैसी बड़ी घटनाएं सामने आईं। ट्राई का मानना है कि प्री-टैगिंग से न केवल धोखाधड़ी पर रोक लगेगी, बल्कि डिजिटल कम्युनिकेशन सिस्टम में पारदर्शिता और सुरक्षा भी बढ़ेगी।
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60 दिन में पूरा करना होगा बदलाव
नए निर्देश के तहत, सभी एक्सेस प्रोवाइडर्स और प्रिंसिपल एंटिटीज जैसे बैंक, फाइनेंशियल कंपनियां, बीमा कंपनियां और बड़े कारोबारी को 60 दिनों के भीतर अपने मौजूदा टेम्पलेट्स में बदलाव करने होंगे। इस अवधि के बाद बिना टैग वाले टेम्पलेट्स से भेजे गए संदेश सीधे रिजेक्ट कर दिए जाएंगे। इस फैसले से उन लाखों यूजर्स को राहत मिलने की उम्मीद है जो साफ-सुथरी और सुरक्षित मोबाइल कम्युनिकेशन सेवाओं पर निर्भर हैं।
डिजिटल मैसेजिंग पर बढ़ेगा भरोसा
ट्राई ने कहा कि यह कदम TCCCPR 2018 के तहत मौजूद एंटी-स्पैम और एंटी-फ्रॉड फ्रेमवर्क को और मजबूत करेगा। प्री-टैगिंग से यह सुनिश्चित होगा कि कोई भी लिंक या नंबर संदेश भेजने से पहले वैधता की जांच से गुजरे। इससे बैंकिंग, सरकारी सेवाओं, फाइनेंस और आवश्यक सेवाओं से जुड़े संदेश सुरक्षित रहेंगे। वर्तमान समय में ऑनलाइन ठगी तेजी से बढ़ रही है और स्कैमर्स उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में ट्राई का यह निर्णय डिजिटल सुरक्षा की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ट्राई ने चेतावनी दी है कि मालिशियस लिंक पर क्लिक करने से यूजर के मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल हो सकता है, बैंक अकाउंट तक अनधिकृत पहुंच मिल सकती है या व्यक्तिगत जानकारी चुरा ली जा सकती है। अपराधी नकली वेबसाइट बनाकर लोगों को झांसा देते हैं। इन खतरों को देखते हुए अब प्रत्येक वेरिएबल फील्ड की पहचान और निगरानी आवश्यक कर दी गई है। ट्राई को उम्मीद है कि इस प्रावधान से डिजिटल ठगी में भारी कमी आएगी और यूजर सुरक्षा को नया स्तर मिलेगा।