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भारत में तेजी से बढ़ रहा है साइबर क्राइम, महिलाएं और बच्चे आसान शिकार

Mon, 25 Mar 2019 03:30 PM IST
Shilpa Thakur न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Mon, 25 Mar 2019 03:30 PM IST
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Cyber crime is increasing, mostly women and children are victims
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

दुनिया के बाकी देशों की तरह भारत में भी हर आयु वर्ग के लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। सस्ते इंटरनेट पैक के आने से इसके इस्तेमाल में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन इंटरनेट के जितने लाभ हैं उतने ही नुकसान भी हैं। साल 2018 में आई साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी रिपोर्ट्स से कुछ यही पता चल रहा है।


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दुनिया के बाकी देशों की तरह भारत में भी हर आयु वर्ग के लोग मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं। सस्ते इंटरनेट पैक के आने से इसके इस्तेमाल में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। लेकिन इंटरनेट के जितने लाभ हैं उतने ही नुकसान भी हैं। साल 2018 में आई साइबर सिक्योरिटी से जुड़ी रिपोर्ट्स से कुछ यही पता चल रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत अब उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जहां सबसे अधिक साइबर अपराध हो रहे हैं। 

सालभर में करीब 8 लाख से ज्यादा भारतीय बैंकिंग ट्रोजन से पीड़ित हुए हैं, वहीं एक सर्वे के अनुसार 37 फीसदी अभिभावकों ने ये बात स्वीकार की है कि उनका बच्चा सालभर में कम से कम एक बार साइबर बुलिंग का शिकार हुआ है।

क्या होता है ट्रोजन?

अधिक संख्या में भारतीय लोग ट्रोजन का शिकार हो रहे हैं। ट्रोजन एक तरह का कंप्यूटर सॉफ्टवेयर होता है। जिससे कंप्यूटर का डाटा चोरी किया जाता है और मिटाया भी जाता है। ट्रोजन की सहायता से हैकर कंप्यूटर को हैक कर सकता है। बैंकिंग ट्रोजन की सहायता से यूजर के डिवाइस से उसकी बैंकिंग जानकारी भी हैक की जाती है।

रिपोर्ट में पता चला कि 2018 में करीब 4 फीसदी भारतीय बैंकिंग ट्रोजन का शिकार हुए हैं। ये आंकड़ा 2017 में 7 लाख 67 हजार था। यानी ये संख्या अब 15.9 फीसदी तक बढ़ गई है। इंडीविजुअल यूजर्स को बीते साल वित्तीय खतरों से ज्यादा राहत नहीं मिली। रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई कि कई बैंकर पैसे कमाने के लिए शिकार ढूंढते हैं।

आर्थिक सेंधमारी को लेकर बीते साल तकनीकी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि प्ले स्टोर पर कई एप ऐसे हैं जो आर्थिक सेंधमारी कर सकते हैं।

क्या हैं बचने के उपाय?

  • कंप्यूटर से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन करते वक्त सावधान रहें।
  • साइबर अपराधियों को कम ना आंके।
  • कंप्यूटर को असुरक्षित ना छोड़ें।
  • बच्चे इंटरनेट पर क्या कर रहे हैं, इसकी जांच करते रहें।

यूजर्स ने मालवेयर हमले का किया सामना

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pexels.com

रूस, जर्मनी, वियतनाम और इटली जैसे कई देशों में रहने वाले यूजर्स को स्पायआई जैसे बैंकिंग मालवेयर हमले का सामना करना पड़ा है। इस मामले में जीबोट और गोजी सबसे ज्यादा फैले हुए मालवेयर हैं। जीबोट ने ही 26 फीसदी यूजर्स को अपना शिकार बनाया है। वहीं गोजी ने 20 फीसदी और स्पायआई ने 15.6 फीसदी यूजर्स को अपना शिकार बनाया है। 

घटे हैं फाइनेंशियल फिशिंग के मामले

रिपोर्ट के मुताबिक फाइनेंशियल फिशिंग के मामले काफी घटे हैं। पहले ये आंकड़ा 53.85 फीसदी था जो अब कम होकर 44.7 फीसदी रह गया है। सिक्योरिटी कंपनी ईसीईटी ने मोबाइल एप स्टोर पर कई ऐसे एप की सूची भी दी है जो मोबाइल पर ऑटोमेटिक इंस्टॉल होकर गड़बड़ी फैला सकते हैं। इनसे बचने के लिए इन्हें अनइंस्टॉल करना ही बेहतर है।

सबसे ज्यादा बच्चे हो रहे शिकार

आजकल टिकटॉक और स्नैपचैट जैसे एप पर बच्चे अधिक सक्रिय रहते हैं। वह ना केवल अपनी वीडियो शेयर करते हैं बल्कि अंजान लोगों से चैट भी करते हैं। अधिक लाइक्स के चक्कर में बच्चे अंजान लोगों को भी अपनी आईडी में शामिल कर देते हैं। 

रिपोर्ट से पता चलता है कि 2018 में भारतीय बच्चे सबसे ज्यादा साइबर बुलिंग का शिकार हुए हैं। 28 देशों में किए गए सर्वे में 37 फीसदी अभिभावकों ने माना है कि उनके बच्चे साइबर बुलिंग का शिकार हुए हैं। ये आंकड़ा 2016 में 22 फीसदी था।

भारत में इंटरनेट यूजर्स, स्मार्टफोन यूजर्स और सोशल मीडिया पर युवाओं की सक्रियता दुनिया के किसी भी देश से अधिक है। जिसके चलते यहां साइबर बुलिंग एक बड़ा खतरा है। हालात इतने खराब हैं कि 77 फीसदी बच्चे 13 साल से कम उम्र में ही फेसबुक प्रोफाइल बना लेते हैं।

क्या कहता है कानून?

भारत में साइबर बुलिंग करने पर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के तहत सजा दी जाती है। जिसमें आरोपी को तीन साल की सजा होती है। लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 18 फीसदी बच्चे ही ऐसे मामलों में अपने टीचर से शिकायत करते हैं।

युवा महिलाएं और बच्चे आसान शिकार

युवा महिलाओं और बच्चों के लिए सोशल साइट्स मानसिक विकारों का कारण बन रही हैं। उन्हें अपनी उपेक्षा का डर रहता है। वह अधिक लाइक्स पाने के लिए अपनी फ्रेंड लिस्ट में किसी को भी शामिल कर लेते हैं। इसके अलावा उन्हें अपनी बेइज्जती का डर भी लगा रहता है। वह इस बात का खास ध्यान रखते हैं कि सोशल साइट पर वह अच्छे दिखें। वहीं सबसे खतरनाक फीचर है टैगिंग।

कोई भी अंजान व्यक्ति महिलाओं और बच्चों को आपत्तिजनक तस्वीरों आदि में टैग कर देते हैं। सोशल साइट पर बच्चों की मौजूदगी के मामले में भारत ऑस्ट्रेलिया के बाद दूसरे नंबर पर आता है। 
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