Cyber Attacks: साइबर हमलों और मोबाइल फोन में सेंधमारी करने वालों को रोकेगा '97' का दम
Cyber Attacks: देश में इस साल जून माह तक साइबर हमलों के 67,4021 केस सामने आए। पिछले साल ऐसे मामलों की संख्या 14,02809 थी। साल 2020 के दौरान 11,58,208 साइबर हमले दर्ज हुए थे, जबकि 2019 में ऐसे केसों की संख्या 39,4499 रही थी...
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देश में साइबर हमले बढ़ते जा रहे हैं। केंद्र सरकार ने कंप्यूटर नेटवर्किंग और मोबाइल फोन में सेंधमारी को रोकने के लिए विशेष सिस्टम तैयार किया है। इसे '97' का दम यानी 'सुरक्षा जांच संगठनों' का पैनल, नाम दिया गया है। यह पैनल, केंद्र सरकार की सभी सुरक्षा एजेंसियों के बीच तालमेल करेगा। इसी पैनल के माध्यम से सरकारी वेबसाइट और एप्लीकेशनों की होस्टिंग के पहले उनकी साइबर सुरक्षा के संबंध में जांच शुरू की गई है। केंद्र सरकार ने अपने विभागों और राज्य सरकारों पर हमलों से निपटने व साइबर आतंकवाद का सामना करने के लिए 'साइबर आपदा प्रबंधन योजना 'सीसीएमपी' को अपग्रेड किया है।
देश में इस साल जून माह तक साइबर हमलों के 674021 केस सामने आए हैं। गत वर्ष ऐसे मामलों की संख्या 1402809 थी। साल 2020 के दौरान 1158208 साइबर हमले दर्ज हुए थे, जबकि 2019 में ऐसे केसों की संख्या 394499 रही थी। खास बात ये है कि इस तरह के हमले केवल निजी क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र को भी अपना निशाना बना रहे हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय कुमार मिश्रा के अनुसार, सरकार ने कंप्यूटरों और नेटवर्किंग को सुरक्षित रखने के लिए नवीनतम साइबर तकनीक का इस्तेमाल किया है। बाकायदा ऐसे साइबर हमलों को लेकर समय-समय पर एडवाइजरी जारी की जाती है।
साइबर हमलों के अलर्ट को एकत्रित करने, उनका विश्लेषण और उसे विभिन्न सेक्टरों के संगठनों के साझा करने के लिए एक 'आटोमेटेड साइबर थ्रेट एक्सचेंज प्लेटफॉर्म' संचालित किया जा रहा है। इसका मकसद है कि साइबर हमले के दौरान जोखिम को कम से कम करने के लिए सक्रिय कार्रवाई, समय रहते हो जाए। सभी सरकारी वेबसाइटों और एप्लीकेशनों की होस्टिंग के पहले उनकी साइबर सुरक्षा के संबंध में जांच की जा रही है। होस्टिंग के बाद भी, वेबसाइटों और एप्लीकेशनों की नियमित आधार पर जांच की जाती है। केंद्र सरकार ने सूचना सुरक्षा की श्रेष्ठ पद्धतियों के कार्यान्वयन में सहायता करने और ऑडिट करने के लिए 97 सुरक्षा जांच संगठनों का विशेष पैनल तैयार किया है।
सूचना तकनीक अवसंरचना को सुरक्षित बनाने और साइबर हमलों में कमी लाने के संबंध में सरकारी व महत्वपूर्ण सेक्टरों के संगठनों के नेटवर्क सिस्टम एडमिनिस्ट्रेटर्स तथा मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारियों 'सीआईएसओ' के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इतना ही नहीं, सरकार द्वारा बोटनेट क्लीनिंग और मलवेयर एनालिसिस सेंटर को संचालित किया जा रहा है। इसकी मदद से नुकसानदायक प्रोग्राम का पता लगाने और उन्हें हटाने के लिए निशुल्क टूल की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र 'एनसीसीसी' की स्थापना की गई है। हालांकि अभी इसका प्रथम चरण शुरू हुआ है। अंतरराष्ट्रीय सीईआरटी, विदेशी संगठनों, सेवा प्रदाताओं तथा विधि प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग, कार्य तथा घटना के प्रति कार्रवाई करने के उपायों का समन्वय करती है।