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Cauvery: 'तमिलनाडु को तीन हजार क्यूसेक पानी छोड़ना सुनिश्चित करें', सीडब्ल्यूआरसी का कर्नाटक को निर्देश

Wed, 11 Oct 2023 06:45 PM IST
आदर्श शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आदर्श शर्मा Updated Wed, 11 Oct 2023 06:45 PM IST
सार

कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की बैठक में पानी को लेकर एक फैसला किया गया है। सीडब्ल्यूआरसी ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि कर्नाटक को 16 से 31 अक्तूबर तक तीन हजार क्यूसेक पानी छोड़ना सुनिश्चित करना होगा।

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CWRC has directed Karnataka to release three thousand cusecs of water by October 31
Cauvery water issue - फोटो : social media

विस्तार

कावेरी नदी के पानी को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच खींचातानी का खेल जारी है। कावेरी जल विनियमन समिति (सीडब्ल्यूआरसी) की बैठक में पानी को लेकर एक फैसला किया गया है। सीडब्ल्यूआरसी ने बुधवार को जारी अपने बयान में कहा कि कर्नाटक को 16 से 31 अक्तूबर तक तीन हजार क्यूसेक पानी छोड़ना सुनिश्चित करना होगा। 
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सीडब्ल्यूआरसी ने अपनी 88वीं बैठक के दौरान कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच चल रहे कावेरी नदी जल विवाद में जल आवंटन और कमी के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए। तमाम चर्चाओं के बाद कावेरी जल विनियमन समिति एक निर्णय पर पहुंची। जिसमें कर्नाटक से कहा गया कि बिलिगुंडलू में प्रवाह तीन हजार क्यूसेक बना रहे। 
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कर्नाटक ने जताई पानी छोड़ने में असमर्थता
वहीं कर्नाटक ने अपनी प्रस्तुति में बिलीगुंडलू को पानी छोड़ने में असमर्थता व्यक्त की। जबकि तमिलनाडु ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए कर्नाटक से औपचारिक आग्रह किया। जारी बयान में कहा गया है कि उन्होंने कर्नाटक से अगले 15 दिनों के लिए 16,000 क्यूसेक पानी छोड़ने का आग्रह किया। इस साल की शुरुआत में सितंबर में कावेरी जल विनियमन समिति ने कर्नाटक को 28 सितंबर से 15 अक्टूबर, 2023 तक बिलिगुंडलू में 3,000 क्यूसेक कावेरी पानी छोड़ना सुनिश्चित करने का आदेश दिया था।
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कर्नाटक ने दायर की समीक्षा याचिका
कर्नाटक ने आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (सीडब्ल्यूएमए) दोनों में समीक्षा याचिका दायर की। कर्नाटक सरकार ने तमिलनाडु को पानी की आपूर्ति से इनकार करने के लिए अपने राज्य के कुछ हिस्सों में गंभीर सूखे का हवाला दिया था। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 5 अक्टूबर को कहा था कि कर्नाटक के कावेरी बेसिन में जलाशयों में प्रवाह कम हो रहा है। इस बीच, तमिलनाडु विधानसभा ने 9 अक्टूबर को एक प्रस्ताव अपनाया, जिसमें केंद्र सरकार से कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशों के मुताबिक कर्नाटक को कावेरी जल छोड़ने का निर्देश देने का आग्रह किया गया। 


विवाद के निपटारे के लिए सीडब्ल्यूडीटी का गठन
कावेरी जल बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु सरकारों के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। नदी को किसी भी राज्य में लोगों के लिए जीविका के प्रमुख स्रोत के रूप में देखा जाता है। केंद्र ने तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और पुडुचेरी के बीच उनकी व्यक्तिगत जल-साझाकरण क्षमताओं के संबंध में विवादों का निपटारा करने के लिए 1990 को कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण (सीडब्ल्यूडीटी) का गठन किया है।
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