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Gujarat: मुंद्रा बंदरगाह से 110 करोड़ कीमत की 68 लाख फाइटर ड्रग जब्त, अफ्रीकी देशों में किया जा रहा था निर्यात
Mon, 29 Jul 2024 01:19 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज जेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज जेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: श्वेता महतो
Updated Mon, 29 Jul 2024 01:19 PM IST
सार
कंटेनर के सामने वाले हिस्से से ये टैबलेट मिलने के बाद विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान बक्से से अघोषित दवाएं पाई गई, जिसमें ट्रैमेकिंग 225 और रॉयल-225 के लेबल लगा था। दोनों में 225 मिग्रा. ट्रामाडोल हैइड्रोक्लोराइड टैबलेट थे।
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मुंद्रा बंदरगाह
- फोटो : ANI
विस्तार
गुजरात में कच्छ जिले के मुंद्रा बंदरगाह में कस्टम विभाग ने दो कंटेनरों से 68 लाख ट्रामाडोल टैबलेट जब्त किए। इनकी कीमत 110 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इन कंटेनरों पश्चिमी अफ्रीकी देशे सिएरा लियोन और नाइजर से निर्यात किया गया था। ट्रामाडोल को फाइटर ड्रग के नाम से जाना जाता है। दरअसल आईएसआईएस आतंकी देर तक जागने के लिए इस टैबलेट का इस्तेमाल करते हैं।
इस जब्ती को लेकर एक विज्ञप्ति में कहा गया, "मुंद्रा कस्टम की विशेष खुफिया और जांच शाखा की खुफिया जानकारी के आधार पर रविवार को राजकोट आधारिक एक निर्यातक के माल को बंदरगाह पर रोका गया और जांच की गई। आधिकारिक दस्तावेज में निर्यातक ने बताया कि शिपमेंट में डिक्लोफेनाक और गेबेडोल टैबलेट है।"
कंटेनर के सामने वाले हिस्से से ये टैबलेट मिलने के बाद विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान बक्से से अघोषित दवाएं पाई गई, जिसमें ट्रैमेकिंग 225 और रॉयल-225 के लेबल लगा था। दोनों में 225 मिग्रा. ट्रामाडोल हैइड्रोक्लोराइड टैबलेट थे। बक्सों पर निर्माता का कोई विवरण नहीं दिया गया था।
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कुल 68 लाख टैबलेट बरामत किए गए, जिसकी कीमत 110 करोड़ रुपये है। राजकोट, गांधीनगर और गांधीधाम में इस मामले को लेकर तलाशी जारी है। बता दें कि अफ्रीकी देशों नाइजर, घाना में सिंथेटिक ओपिओइड ड्रग की अत्याधिक मांग है।
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इस जब्ती को लेकर एक विज्ञप्ति में कहा गया, "मुंद्रा कस्टम की विशेष खुफिया और जांच शाखा की खुफिया जानकारी के आधार पर रविवार को राजकोट आधारिक एक निर्यातक के माल को बंदरगाह पर रोका गया और जांच की गई। आधिकारिक दस्तावेज में निर्यातक ने बताया कि शिपमेंट में डिक्लोफेनाक और गेबेडोल टैबलेट है।"
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कंटेनर के सामने वाले हिस्से से ये टैबलेट मिलने के बाद विस्तृत जांच की गई। जांच के दौरान बक्से से अघोषित दवाएं पाई गई, जिसमें ट्रैमेकिंग 225 और रॉयल-225 के लेबल लगा था। दोनों में 225 मिग्रा. ट्रामाडोल हैइड्रोक्लोराइड टैबलेट थे। बक्सों पर निर्माता का कोई विवरण नहीं दिया गया था।
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कुल 68 लाख टैबलेट बरामत किए गए, जिसकी कीमत 110 करोड़ रुपये है। राजकोट, गांधीनगर और गांधीधाम में इस मामले को लेकर तलाशी जारी है। बता दें कि अफ्रीकी देशों नाइजर, घाना में सिंथेटिक ओपिओइड ड्रग की अत्याधिक मांग है।