{"_id":"5828f9564f1c1bc932b3c32c","slug":"currency-ban-wife-get-husband-deadbody-by-selling-the-daughter-mangalsutra-and-kundal","type":"story","status":"publish","title_hn":"नोटबंदी: बेटी का मंगलसूत्र व कुंडल बेचकर छुड़ाया पति का शव","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
नोटबंदी: बेटी का मंगलसूत्र व कुंडल बेचकर छुड़ाया पति का शव
अमर उजाला ब्यूरो/ हरिद्वार
Updated Mon, 14 Nov 2016 05:07 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुराने बड़े नोटों की बंदी से मचे हाहाकार के बीच हरिद्वार के मनीराम के परिवार को ऐसा दर्द झेलना पड़ा जिसे वे कभी भुला नहीं सकेंगे। मेरठ के एक निजी अस्पताल में मनीराम की मौत हो जाने पर परिवार वाले बिल चुकता करने की स्थिति में नहीं थे। ऐसे में अस्पताल प्रशासन ने उन्हें शव देने से इनकार कर दिया। पत्नी ने बेटी का मंगलसूत्र व कुंडल बेचकर पैसे भी जुटाए तो अस्पताल प्रबंधन बड़े नोट नहीं लेने पर आमादा हो गया। बाद में जैसे-तैसे मामला सुलटा और परिजन शव को हरिद्वार लेकर आए।
हरिद्वार में ज्वालापुर के मोहल्ला कड़च्छ निवासी मनीराम नगर पालिका के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। छोटी दिवाली के दिन उन्हें ब्रेन हेमरेज को गया था। उपचार के लिए परिजन उन्हें मेरठ के एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां उपचार के दौरान शुक्रवार और शनिवार की देर रात उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों के अनुसार एक दिन पहले ही उन्होंने एक लाख रुपये का भुगतान अस्पताल प्रबंधन को किया था। ऐसे में उनके पास और पैसा देने को नहीं था। लेकिन अस्पताल ने उन्हें 40 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। यही नहीं, अस्पताल के अधिकारी भुगतान न करने पर शव नहीं देने पर अड़ गए।
मनीराम के बेटे सुमित के अनुसार जब बात नहीं बनी तो मां शकुंतला ने बेटी नीलम के मंगलसूत्र और कुंडल अस्पताल के पास ही स्थित एक सुनार को बेचकर अस्पताल के बिल भुगतान के लिए पैसे जुटाए। अब अस्पताल के अधिकारी बड़े नोट नहीं लेने पर अड़ गए। पुलिस को बुलाया गया। इसके बाद जैसे-तैसे उन्होंने पांच सौ के ही नोट स्वीकार किए और शव उन्हें सौंप दिया।
विज्ञापन
फिर भी मोदी की नीति के हैं मुरीद
मनीराम के बेटे सुमित से पूछा गया तो उनका कहना था कि समुचित पैसों और छोटे नोटों की व्यवस्था नहीं कर पाना उनकी अपनी निजी परेशानी रही। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन पर जो कदम उठाया है, इसके वे पक्ष में हैं। उन्होंने मोदी के फैसले का समर्थन किया और इसे देश हित में बताया।
कर्मचारी नेताओं ने जताया शोक, जेवर वापसी की मांग
म्यूनिसिपल बोर्ड कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने रविवार को मायापुर यूनियन भवन में शोकसभा का आयोजन किया। श्रमिक नेता मुरली मनोहर ने श्रद्धांजलि देते हुए यूपी सरकार को मेरठ के अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई करने और मृतक मनीराम की बेटी का मंगल सूत्र व कुंडल वापस दिलाने की मांग की।
विज्ञापन
हरिद्वार में ज्वालापुर के मोहल्ला कड़च्छ निवासी मनीराम नगर पालिका के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। छोटी दिवाली के दिन उन्हें ब्रेन हेमरेज को गया था। उपचार के लिए परिजन उन्हें मेरठ के एक निजी अस्पताल में ले गए, जहां उपचार के दौरान शुक्रवार और शनिवार की देर रात उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों के अनुसार एक दिन पहले ही उन्होंने एक लाख रुपये का भुगतान अस्पताल प्रबंधन को किया था। ऐसे में उनके पास और पैसा देने को नहीं था। लेकिन अस्पताल ने उन्हें 40 हजार रुपये का बिल थमा दिया गया। यही नहीं, अस्पताल के अधिकारी भुगतान न करने पर शव नहीं देने पर अड़ गए।
विज्ञापन
मनीराम के बेटे सुमित के अनुसार जब बात नहीं बनी तो मां शकुंतला ने बेटी नीलम के मंगलसूत्र और कुंडल अस्पताल के पास ही स्थित एक सुनार को बेचकर अस्पताल के बिल भुगतान के लिए पैसे जुटाए। अब अस्पताल के अधिकारी बड़े नोट नहीं लेने पर अड़ गए। पुलिस को बुलाया गया। इसके बाद जैसे-तैसे उन्होंने पांच सौ के ही नोट स्वीकार किए और शव उन्हें सौंप दिया।
विज्ञापन
फिर भी मोदी की नीति के हैं मुरीद
मनीराम के बेटे सुमित से पूछा गया तो उनका कहना था कि समुचित पैसों और छोटे नोटों की व्यवस्था नहीं कर पाना उनकी अपनी निजी परेशानी रही। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने काले धन पर जो कदम उठाया है, इसके वे पक्ष में हैं। उन्होंने मोदी के फैसले का समर्थन किया और इसे देश हित में बताया।
कर्मचारी नेताओं ने जताया शोक, जेवर वापसी की मांग
म्यूनिसिपल बोर्ड कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों ने रविवार को मायापुर यूनियन भवन में शोकसभा का आयोजन किया। श्रमिक नेता मुरली मनोहर ने श्रद्धांजलि देते हुए यूपी सरकार को मेरठ के अस्पताल के विरुद्ध कार्रवाई करने और मृतक मनीराम की बेटी का मंगल सूत्र व कुंडल वापस दिलाने की मांग की।