फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Culprit can not be given the least punishment in any case: Supreme Court

अपराधी को किसी भी हालत में कानून मे निर्धारित न्यूनतम से कम सजा नहीं दी जा सकती : सुप्रीम कोर्ट

Sun, 10 Feb 2019 03:30 AM IST
अनिल पांडेय राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अनिल पांडेय Updated Sun, 10 Feb 2019 03:30 AM IST
सार

  • कोर्ट ने कहा, यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते हुए न्यूनतम सजा को कम नहीं कर सकता 
  • एससी-एसटी एक्ट केतहत दोषी ठहराए गए व्यक्ति को 11 दिन जेल में काटने केबाद रिहा कर दिया गया था 
  • सुप्रीम कोर्ट ने दोषी को समर्पण कर न्यूनतम छह महीने की सजा को पूरा करने का आदेश दिया 

विज्ञापन
Culprit can not be given the least punishment in any case: Supreme Court
supreme court

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी अपराधी को उसके किए अपराध के लिए कानून में निर्धारित न्यूनतम सजा से कम की सजा नहीं दी जा सकती। यहां तक पूर्ण न्याय के नाम पर सुप्रीम कोर्ट भी अपने विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर न्यूनतम सजा से कम की सजा नहीं दे सकता। 

विज्ञापन


न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता ने अपने फैसले में कहा है %जिस अपराध के कानून की किताब में न्यूनतम सजा उल्लेखित है, अदालत उससे कम की सजा नहीं दे सकती। यहां तक कि संविधान के अनुच्छेद-142(सुप्रीम कोर्ट को मिले विशेषाधिकार) का इस्तेमाल कर शीर्ष अदालत ने दोषी को तय न्यूनतम सजा से कम की सजा नहीं दे सकती।’ 
विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने यह कहते हुए मध्य प्रदेश सरकार की उस अपील को स्वीकार कर लिया जिसमें हाईकोर्ट केआदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने विक्रम दास नामक एक व्यक्ति को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति(उत्पीडन) कानून के तहत किए गए अपराध में महज 11 दिनों की न्यायिक हिरासत में बाद छोडने का आदेश दिया था। हालांकि उसकी जुर्माने की राशि बढ़ाकर तीन हजार रुपये कर दी गई थी। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विक्रम पर अनुसूचित जाति की एक महिला केसाथ बल प्रयोग करने का आरोप था। निचली अदालत ने विक्रम को एससी-एसटी अधिनियम की धारा-3(1)(11) केतहत दोषी ठहराते हुए छह महीने की कैद और 500 रुपये का जुर्मान किया था। इस प्रावधान केतहत न्यूनतम सजा छह महीने की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। जबकि अधिकतम सजा पांच वर्ष कैद की भी हो सकती है। 

लेकिन हाईकोर्ट ने निचली अदालत केफैसले में बदलाव करते हुए जुर्माने की राशि 500 रुपये से बढ़ाकर तीन हजार रुपये कर दी और विक्रम द्वारा जेल में बिताए 11 दिनों को सजा मानते हुए बरी करने का आदेश दे दिया। 

 
हाईकोर्ट केइस फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट फैसले को दरकिनार करते हुए विक्रम को समर्पण करने का आदेश देते हुए करीब साढ़े पांच महीने की सजा भुगतने के लिए कहा है।  

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed