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CRPF: खुफिया एजेंसी ज्वाइन करने से क्यों चूक गए सीआरपीएफ के युवा अफसर? जबकि 60 दिन पहले आया था विज्ञापन

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Wed, 21 Sep 2022 11:05 PM IST
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सार
CRPF: सीआरपीएफ के सूत्रों का कहना है कि बल में अनेक अफसर बेहतरीन इंटेलिजेंस वर्क कर रहे हैं। चूंकि सीआरपीएफ के पास अपना इंटेलिजेंस नेटवर्क है, इसलिए तकनीकी शिक्षा एवं अन्य स्ट्रीम वाले कई अफसरों ने बल की खुफिया विंग को ज्वाइन किया है...
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CRPF: young officers missed out joining the intelligence bureau due to negligence by seniors
CRPF - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

भारत की खुफिया एजेंसी यानी इंटेलिजेंस ब्यूरो को हाईटेक बनाया जा रहा है। जैसे अमेरिका की सीक्रेट एजेंसी, सीआईए काम करती है, कुछ वैसी ही तकनीक आईबी को मुहैया कराई जाएगी। सूचनाओं का प्रवाह तेज हो और उन्हें डिजिटल प्लेटफार्म पर अविलंब चेक किया जा सके, इस दिशा में काम शुरू हुआ है। इसके लिए आईबी ने करीब डेढ़ सौ एक्सपर्ट की नियुक्ति का प्लान तैयार किया था। अन्य सरकारी विभागों के साथ-साथ केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को भी प्रतिनियुक्ति के जरिए आईबी ज्वाइन करने का अवसर प्रदान किया गया।

आवेदन करने के लिए दिए केवल 24 घंटे

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल, सीआरपीएफ में सहायक कमांडेंट से डीआईजी तक के अफसरों को आवेदन करने का मौका दिया गया। हैरानी की बात ये है कि आईबी का ये आवेदन दो माह पहले आया था, लेकिन सीआरपीएफ ने इसे 19 सितंबर को जारी किया। आवेदन करने के लिए केवल 24 घंटे यानी 20 सितंबर तक का समय दिया। नतीजा, बल का ये मैसेज एक चौथाई अधिकारियों तक ही पहुंच सका। अंतिम तिथि निकल गई और युवा अफसर आवेदन करने से चूक गए।



सीआरपीएफ के सूत्रों का कहना है कि बल में अनेक अफसर बेहतरीन इंटेलिजेंस वर्क कर रहे हैं। चूंकि सीआरपीएफ के पास अपना इंटेलिजेंस नेटवर्क है, इसलिए तकनीकी शिक्षा एवं अन्य स्ट्रीम वाले कई अफसरों ने बल की खुफिया विंग को ज्वाइन किया है। नक्सल प्रभावित राज्यों के अलावा जम्मू कश्मीर एवं उत्तर-पूर्व में भी बल का इंटेलिजेंस नेटवर्क काम कर रहा है। देश में सबसे ज्यादा वीआईपी लोगों को सुरक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी भी इसी बल के पास है, ऐसे में खुफिया नेटवर्क पर अच्छे तरीके से काम किया जा रहा है। इन सबके चलते सीआरपीएफ में सहायक कमांडेंट से लेकर डीआईजी स्तर के अधिकारियों को आईबी ज्वाइन करने का अवसर प्रदान किया गया। खास बात ये है कि आईबी ने डेढ़ सौ से ज्यादा एक्सपर्ट शामिल करने के लिए 19 जुलाई को विज्ञापन जारी किया था।

सीआरपीएफ के युवा अधिकारियों के पास यह मैसेज सिग्नल के जरिए 19 सितंबर को भेजा गया है। उसमें कहा गया है कि इच्छुक अधिकारी 20 सितंबर तक अपना आवेदन दे सकते हैं। चूंकि सहायक कमांडेंट, टूआईसी व कमांडेंट स्तर के अनेक अधिकारी ऑपरेशनल एरिया में व्यस्त रहते हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तैनात सहायक कमांडेंट व डिप्टी कमांडेंट तो कई दिनों तक ऑपरेशन में होते हैं। ऐसे में उनके पास ऑपरेशन से जुड़े अहम संदेशों का ही आदान-प्रदान होता है। नियमित फाइल वर्क या अन्य संदेश, देरी से पहुंचते हैं।

शीर्ष अधिकारियों को है दिक्कत

सीआरपीएफ के एक अधिकारी का कहना है कि ये सब जानबूझकर किया गया है। शीर्ष पर बैठे अधिकारी नहीं चाहते कि सीआरपीएफ अफसर भी आईबी में काम करें। ये तरीका अफसरों के साथ खिलवाड़ है। बल मुख्यालय में आईबी के पत्र को लेकर मनमानी की गई है। अगर एक सप्ताह पहले भी यह सिग्नल भेजा जाता, तो बल के कई होनहार अफसरों को आईबी में काम करने का अवसर प्राप्त हो सकता था। कई अवसरों पर ऐसे सिग्नल, समय रहते ग्राउंड अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाते।


अगर किसी अधिकारी को यह सूचना समय पर मिल भी गई हो,, तो उसके पास आवेदन करने के 24 घंटे ही बचे हैं। फोर्स में यह आवेदन करना इतना आसान नहीं होता। सीनियर अधिकारियों की मंजूरी लेनी पड़ती है। अधिकारियों को इसके लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए था। ये सब एडवांस में होता तो कई अधिकारी, आईबी में प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन कर सकते थे। आतंकी वारदात एवं अपराधों में शामिल लोगों को समय रहते दबोच लिया जाए व उनकी मौजूदगी की सटीक सूचना, संबंधित सुरक्षा एजेंसियों तक अविलंब पहुंच जाए, आईबी इसके लिए एक्सपर्ट लोगों की सेवाएं ले रही है। आतंकियों एवं दूसरे अपराधियों के संचार नेटवर्क को तोड़ने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ का दस्ता तैयार किया जा रहा है। आईबी में क्रिप्टोग्राफी साइफर जैसी तकनीक के विशेषज्ञों की भर्ती की जा रही है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईबी को हाइटेक बनाने की दिशा में यह कदम आगे बढ़ाया है।

मिलते हैं ये अलाउंस

तकनीकी उपकरणों के अलावा अब ऐसे स्टाफ की भर्ती की जा रही है, जो सूचनाओं के आदान-प्रदान से जुड़ी लेटेस्ट तकनीक में पारंगत हों। विभिन्न केंद्रीय महकमों से आने वाले तकनीकी स्टाफ को ज्यादा से ज्यादा सात वर्ष तक आईबी में काम करने का मौका मिलेगा। ड्यूटी के दौरान इन्हें मूल वेतन का बीस फीसदी स्पेशल सिक्योरिटी अलाउंस यूनिफार्म अलाउंस दस हजार रुपये (यदि बीओआई में पोस्टिंग है तो), हाई एल्टीट्यूड इलाके में वन टाइम क्लोदिंग अलाउंस, एक बारगी होम टाउन और एक बार ऑल इंडिया एलटीसी पैकेज (परिवार के आश्रित सदस्यों सहित), चिल्ड्रन एजुकेशन अलाउंस सालाना 27000 रुपये, होस्टल सब्सिडी के 81000 रुपये और नियमित अलाउंस के अलावा हार्डशिप वाले इलाकों में रिस्क अलाउंस, आइसलैंड अलाउंस, स्पेशल ड्यूटी अलाउंस भी प्रदान किया जाएगा। स्टाफ के मेरिट में आए बच्चों को स्कॉलरशिप मिलेगी। आईबी में आने वाले अधिकारियों को अपने आवेदन के साथ पांच साल की एसीआर लगानी होगी। संबंधित विभाग से विजिलेंस क्लीयरेंस भी जरूरी है।

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