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CRPF के बहादुरों ने जब 'चीन और पाकिस्तान' की सेना को दिया था मुंहतोड़ जवाब!

Mon, 27 Jul 2020 04:27 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Mon, 27 Jul 2020 04:27 PM IST
सार

21 अक्तूबर, 1959 को हॉट स्प्रिंग (लद्दाख) में चीनी हमला हुआ था। इस बल के छोटे से गश्ती दल को वहां पहले से भारी संख्या में मौजूद चीनी फौज ने घेर लिया। हालांकि धोखे से भरे इस हमले में सीआरपीएफ के 10 जवान शहीद हो गए थे, लेकिन उन्होंने चीनी फौज का जिस बहादुरी से मुकाबला किया, वह इतिहास में दर्ज हो गया...

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CRPF Raising Day: How CRPF Soldiers gave a befitting reply to the army of China and Pakistan in 1959 and 1965
CRPF Raising Day - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

सीआरपीएफ की स्थापना के दिन से ही इसका इतिहास वीरता भरे कारनामों और शौर्य गाथाओं से भरा हुआ है। देश के सबसे बड़े इस केंद्रीय अर्धसैनिक बल ने केवल देश की आंतरिक सुरक्षा को ही मजबूत नहीं किया है, बल्कि दो पड़ोसी राष्ट्रों की सेना को भी मुंहतोड़ जवाब दिया है। पाकिस्तान और चीन को दो अलग-अलग मोर्चों पर टक्कर देकर इस बल ने अपनी बहादुरी का परचम लहराया है।

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पहले 21 अक्तूबर, 1959 को हॉट स्प्रिंग (लद्दाख) में हुए चीनी हमले का जवाब दिया और वर्ष 1965 में कच्छ के रण में सरहद पर पाकिस्तान के नापाक मनसूबों को धराशाही कर दिया था। सीआरपीएफ की चार कंपनियों ने पाकिस्तान की 51वीं इंफेंट्री ब्रिगेड के 3500 जवानों का मुकाबला कर उन्हें पीछे धकेल दिया। पाकिस्तान ने डेजर्ट हॉक ऑपरेशन के जरिए भारतीय भू-भाग पर कब्जा करने की बड़ी योजना बनाई थी।

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सोमवार को सीआरपीएफ ने अपनी स्थापना के 82वें वर्ष में प्रवेश किया है। देश की आजादी से पहले 1939 में इस बल की स्थापना से लेकर अब तक अनेक बड़े अभियानों, जिनमें नक्सल और आतंकी ऑपरेशन शामिल हैं, में भाग लेकर अत्यंत सराहनीय कार्य किया है। सीआरपीएफ के पूर्व आईजी वीपीएस पवार और एसएस संधू बताते हैं कि इस बल ने सदैव दो कदम आगे बढ़ कर अपनी ड्यूटी दी है।

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प्रारंभ से ही इस बल को जोखिम भरे कार्य सौंपे जाते रहे हैं। भारत-तिब्बत सीमा पर अक्साई चिन के निकट सीआरपीएफ को तैनात किया गया। 1953 के बाद लेह (लद्दाख) और इसकी सीमांत चेक पोस्टों पर इस बल के जवान लगाए गए। अक्साई चिन क्षेत्र के जंगल, दुर्गम इलाके, सुनसान बंजर पहाड़ियां, शरीर को चोट पहुंचाने वाली बर्फीली हवाएं आदि, सीआरपीएफ जवानों को मातृभूमि की रक्षा करने की राह से अलग नहीं कर पाई।
 

21 अक्तूबर, 1959 को हॉट स्प्रिंग (लद्दाख) में चीनी हमला हुआ था। इस बल के छोटे से गश्ती दल को वहां पहले से भारी संख्या में मौजूद चीनी फौज ने घेर लिया। हालांकि धोखे से भरे इस हमले में सीआरपीएफ के 10 जवान शहीद हो गए थे, लेकिन उन्होंने चीनी फौज का जिस बहादुरी से मुकाबला किया, वह इतिहास में दर्ज हो गया।

उन जवानों की शहादत को देश में प्रत्येक वर्ष 21 अक्टूबर को 'पुलिस स्मृति दिवस' के रूप में मनाया जाता है। सितंबर 1959 में लद्दाख में हॉट स्प्रिंग इलाके के आसपास भारी संख्या में चीनी सैनिक जमा थे। सीआरपीएफ जवानों को आदेश मिला कि वह चौकी चीन के कब्जे से मुक्त कराई जाए।
 

इसके लिए 70 जवानों की दो टुकड़ियां बनाई गई। एक का नेतृत्व आईटीबीएफ के डीएसपी करमसिंह और दूसरी टुकड़ी की जिम्मेदारी एसपी त्यागी को दी गई थी। बहादुर सैनिकों ने चौकी को चीनी कब्जे से मुक्त करा लिया, लेकिन उसके बाद दर्जनभर जवानों को चीनी फौज ने पकड़ लिया।

बाद में उन्हें चुशुल एयरपोर्ट के निकट छोड़ दिया गया। बेस कैंप पर पहुंचने के बाद मालूम हुआ कि आईटीबीएफ के डीएसपी करमसिंह की टुकड़ी के सात जवान जवान गायब हो गए हैं। उन्हें तलाश करने के लिए जवान निकल पड़े। इस बीच चीनी सैनिकों ने उन्हें बीच रास्ते में घेर लिया। उस लड़ाई में बल के दस जवान शहीद हो गए थे। बर्फ में सीआरपीएफ जवानों के हथियार जाम हो गए थे, इसके बावजूद उन्होंने चीनी फौज का डट कर मुकाबला किया।

पाकिस्तान कभी नहीं भुला सकेगा सीआरपीएफ के उस शौर्य को

1965 में इस बल की छोटी सी टुकड़ी ने पाकिस्तान की एक पूरी इंफेंट्री को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। पाकिस्तान ने जमीन कब्जाने के लिए गुजरात स्थित कच्छ के रण में 'टाक' और 'सरदार पोस्ट' पर हमला किया था। सीआरपीएफ की दो बटालियन की चार कंपनियों को वहां भेजा गया। एक तरफ सीआरपीएफ की चार कंपनियां और दूसरी तरफ तोपखाने एवं बड़े हथियारों के साथ पाकिस्तानी सेना की 51वीं ब्रिगेड खड़ी थी।



इसमें करीब 35 सौ सैनिक थे। पाकिस्तान ने 14 घंटे में तीन बार हमले का प्रयास किया था। हर बार सीआरपीएफ के बहादुरों ने उसका मुंहतोड़ जवाब दिया। इस लड़ाई में पाकिस्तान के 34 सैनिक मारे गए, जिनमें दो अफसर भी शामिल थे। चार सैनिकों को जिंदा पकड़ लिया गया। इसमें सीआरपीएफ के 6 जवानों ने अपनी शहादत दी थी। बल के अदम्य शौर्य और रण कौशल के चलते हर साल नौ अप्रैल को देश में शौर्य दिवस मनाया जाता है।

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