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CRPF: बर्खास्तगी का नोटिस देने से पहले ही दफ्तर से गायब हो गए थे यौन उत्पीड़न के आरोपी सीआरपीएफ के DIG

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 21 Jun 2024 07:48 PM IST
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सार
राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से 30 मई को उप महानिरीक्षक (डीआईजी) और सीआरपीएफ के पूर्व खेल अधिकारी खजान सिंह के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया था। वह आदेश 31 मई से लागू हो गया है। इस आदेश को बल के द्वारा डीआईजी खजान सिंह तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन वे मुंबई स्थित अपने कार्यालय में नहीं मिले। 
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CRPF DIG accused in Harrasment Case eloped from Office before being Served notice news and updates
सीआरपीएफ। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' के पूर्व डीआईजी एवं यौन उत्पीड़न के आरोपी खजान सिंह तक बर्खास्तगी का नोटिस नहीं पहुंच सका। 31 मई को रिटायरमेंट से पहले ही वे अपने दफ्तर से कहीं चले गए थे। सूत्रों का कहना है कि उनके दफ्तर के अलावा, किराए के मकान पर नोटिस देने का प्रयास किया गया, मगर वहां भी कामयाबी नहीं मिल सकी। राष्ट्रपति कार्यालय से 30 मई को सीआरपीएफ के डीआईजी खजान सिंह के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया था। आदेश में कहा गया था कि सेवा से बर्खास्तगी 31 मई से प्रभावी होगी। सूत्रों ने बताया, डीआईजी के खिलाफ मुंबई में कथित एफआईआर दर्ज होने की बात सामने आ रही है। वह एफआईआर, उस मकान मालिक द्वारा दर्ज कराई गई है, जहां पर पूर्व डीआईजी रहते थे। वजह, उनके रेंट एग्रीमेंट की अवधि खत्म होना बताई जा रही है।

 
राष्ट्रपति कार्यालय ने जारी किए थे आदेश
राष्ट्रपति कार्यालय की तरफ से 30 मई को उप महानिरीक्षक (डीआईजी) और सीआरपीएफ के पूर्व खेल अधिकारी खजान सिंह के खिलाफ सेवा से बर्खास्तगी का आदेश जारी किया गया था। वह आदेश 31 मई से लागू हो गया है। इस आदेश को बल के द्वारा डीआईजी खजान सिंह तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन वे मुंबई स्थित अपने कार्यालय में नहीं मिले। उनके किराए के मकान पर भी नोटिस देने की कोशिश की गई, लेकिन वे वहां पर भी नहीं थे। सीआरपीएफ के सूत्रों का कहना है, उनकी बर्खास्तगी के आदेश 31 मई से लागू हो गए हैं। इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि नोटिस दिया गया है या नहीं।


दावों को झूठे और बेबुनियाद बताया था
खजान सिंह की बर्खास्तगी का अंतिम आदेश जारी करने से पहले उन्हें केंद्रीय गृह मंत्रालय और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की ओर से अनुमोदित दो कारण बताओ नोटिस दिए गए थे। हालांकि इन नोटिस के बाद बल के पश्चिमी क्षेत्र के तहत नवी मुंबई में तैनात सिंह ने यौन उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया था। रिपोर्ट में शामिल दावों को झूठे और बेबुनियाद बताया था। 2021 में सीआरपीएफ एक महिला सिपाही ने खजान सिंह पर यौन उत्पीड़न, बलात्कार और कई वर्षों तक उसे व अन्य महिला जवानों को धमकी देने का आरोप लगाया था। आरोपों में यह बात भी कही गई थी कि सिंह ने अपने अपराधों को अंजाम देने के लिए अपने पद, शक्ति और अर्धसैनिक बल में अन्य प्रशिक्षकों एवं अधिकारियों के समर्थन का इस्तेमाल किया था। उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर में कई गंभीर आरोप लगे थे। खजान सिंह और उनके सहयोगी सुरजीत सिंह, दोनों सीआरपीएफ के भीतर एक सेक्स स्कैंडल चलाते हैं। इनके कई दूसरे साथी भी रहे हैं। करीब दस वर्ष पहले भी उनके खिलाफ शिकायत दी गई थी, लेकिन आरोपी ने उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए मजबूर कर दिया था।

जांच को प्रभावित करने का प्रयास हुआ
सीआरपीएफ में बड़े स्तर पर हुए यौन शोषण के मामले की निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने का प्रयास हुआ था। तत्कालीन नॉर्दन सेक्टर लेवल इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की चेयरपर्सन कमांडेंट नीरजबाला, जो बल की 19 महिला जवानों के यौन शोषण मामले की जांच कर रही हैं, उनका तबादला द्वारका स्थित 88 महिला बटालियन से कभी नोएडा तो कभी बेंगलुरु कर दिया जाता था। 2022 के दौरान दिल्ली उच्च न्यायालय में लगी याचिका के मुताबिक, उनके ट्रांसफर को यौन शोषण केस की जांच को कमजोर करने का बहाना बताया गया था। दस्तावेजों में कहा गया था कि विभाग तो आरोपी डीआईजी खजान सिंह को आईजी बनाने के लिए बेताब था। ये केस नहीं होता, तो उसी वर्ष उन्हें आईजी बना दिया जाता। जांच अधिकारी का तबादला, बेंगलुरु में इसलिए किया गया है, ताकि पीड़ित लड़कियों पर दबाव बनाकर उन्हें केस वापस लेने के लिए राजी कर लिया जाए। याचिका में लिखा गया था कि बल में व्यापक स्तर पर यौन शोषण का माहौल है। जनवरी 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट में सील बंद लिफाफे में पेश किया गया अतिरिक्त शपथ पत्र, यौन शोषण के तरीके से लेकर आरोपियों की सारी कहानी बयां कर रहा था।

जांच अधिकारी का तबादला रद्द करने की बात कही
नीरजबाजा की याचिका में 'अर्जेंट हियरिंग' की गुजारिश की गई थी। साथ ही सीआरपीएफ द्वारा जारी 30 जून का वह ट्रांसफर ऑर्डर, जिसमें उसे द्वारका 88 बटालियन से बेंगलुरु जाने के लिए कहा गया, उसे चैलेंज किया गया था। इसी से जुड़ी याचिका संख्या 6712/2021 थी, जो 14 जुलाई 2022 को सुनी गई। पिटीशन के मुताबिक, पहले का ट्रांसफर ऑर्डर 13 जुलाई 2021 का है। उसमें अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल 'एएसजी' ने सरकार की ओर से वादा किया था कि वह ट्रांसफर ऑर्डर विड्रा कर लेंगे। हालांकि 19 जुलाई 2021 को हाई कोर्ट ने उस ऑर्डर को स्टे कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इस केस को अब निर्णय पर पहुंचाया जाए। इसके बाद भी यौन शोषण केस की जांच को प्रभावित या उसमें देरी करने का प्रयास हुआ। एएसजी के वादे के बाद भी 30 जून 2022 को नीरजबाला का तबादला बेंगलुरु कर दिया गया। केस की दो पार्टी, जिसमें गृह सचिव एवं सीआरपीएफ डीजी शामिल थे, इन्होंने भरोसा दिलाया कि नीरजबाला का दिल्ली एनसीआर में प्राथमिकता के आधार नोएडा तबादला किया जाएगा। चूंकि वे नॉर्दन सेक्टर लेवल इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की चेयरपर्सन हैं और एक अहम केस की जांच कर रही हैं, इसलिए नोएडा जाने के बाद भी वे अपना जांच कार्य बिना किसी बाधा के जारी रख सकती हैं।

सील बंद लिफाफे में थी असल कहानी
पिटीशन के पेज नंबर छह और पैरा नंबर सात में लिखा था, ट्रांसफर तो यौन शोषण मामले की जांच को कमजोर करने का एक बहाना है। इस बाबत सीआरपीएफ ने अपने काउंटर एफिडेवट में कहा, नोएडा में तबादले से इनकी मौजूदा सीट यानी नॉर्दन सेक्टर लेवल इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की चेयरपर्सन का कार्य बाधित नहीं होगा। नीरजबाला की पिटीशन बताती है कि इस केस की जांच को रोकने या बिना किसी निष्कर्ष पर पहुंचे, उसे खत्म करने का भरसक प्रयास हुआ है। इसके बावजूद वे देश के सबसे बड़े यौन शोषण मामले की पीड़ित महिला जवानों को न्याय दिलाने के रास्ते पर बढ़ती रहीं। स्टैंडिंग ऑर्डर के बाद भी 13 जुलाई 2021 को जांच अधिकारी का नोएडा तबादला कर दिया गया। एएसजी ने उसे वापस नहीं लिया। कोर्ट ने उस पर स्टे दे दिया। उसके बाद नीरजबाजा को बेंगलुरु जाने का ट्रांसफर ऑर्डर थमा दिया गया। 7/2014 के स्टैंडिंग ऑर्डर में लिखा है, पति-पत्नी को एक जगह पर पोस्टिंग करने का प्रयास किया जाए। नीरजबाला के पति भी सीआरपीएफ में हैं। मौजूदा पिटीशन में पेज आठ और पैरा 12 के अनुसार, पिटीशनर ने कहा है कि ये तबादला आदेश दुर्भावना से जारी किया गया है। इसमें तो सजा देने का मकसद नजर आता है। 19 महिला जवानों का यौन शोषण कैसे, कब और कहां हुआ, इसका विस्तृत विवरण 15 जनवरी 2022 को एक शपथ पत्र के माध्यम से कोर्ट को दिए गए सील बंद लिफाफे में अंकित है।

डीआईजी ताकतवर है, तभी तो उसका तबादला नहीं हुआ
पिटीशन में लिखा था, विभाग तो यौन शोषण के आरोपी खजान सिंह को आईजी बनाने के लिए बेताब था। ये केस नहीं होता है तो वे मार्च में ही आईजी बन जाते। हालांकि सील बंद कवर में उन्हें आईजी पदोन्नत करने के आदेश हुए थे। दूसरी तरफ नीरजबाला को इसलिए बेंगलुरु भेजा गया है कि ताकि पीड़ित लड़कियां अपना केस विड्रा कर लें। नीरजबाला, उनके लिए शक्ति स्तंभ बन नैतिक बल का काम कर रही थी। आरोपी डीआईजी की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनका कहीं तबादला तक नहीं किया गया। इसका मतलब उनके संबंध दूर तक हैं। 15 जनवरी 2022 को जो अतिरिक्त शपथ पत्र दिया गया है, उसके पैरा बीस में पीड़ित महिला जवानों की डिटेल है।

डीआईजी को कथित रिंग लीडर बताया गया था
अतिरिक्त शपथ पत्र में लिखा था, सीआरपीएफ में व्यापक स्तर पर यौन शोषण का माहौल है। बड़े अफसरों को खुश करने के लिए महिला जवानों को कथित तौर पर लुभाया जाता है। ये केवल यौनाचार का मामला नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ का केस भी है। खजान सिंह को कथित रिंग लीडर बताया गया है। पैरा 15 में 19 जुलाई के आदेश में हाईकोर्ट ने कहा, 13 जुलाई 2021 के तबादला आदेश का मतलब, इस केस की जांच को प्रभावित करना था। उसमें हस्तक्षेप का मकसद दिख रहा था, इसलिए उस पर स्टे दिया गया था।
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