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CRPF: सीआरपीएफ फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन में क्यों उठ रही सुधारों की मांग, किसने बताया- 'औपनिवेशिक मानसिकता'?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Thu, 21 Aug 2025 04:39 PM IST
सार

'सीआरपीएफ' में फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन (सीडब्लूए) में बड़े स्तर पर सुधारों की मांग तेज हो रही है। इस बाबत सीआरपीएफ के एक सहायक कमांडेंट ने उचित प्रक्रिया के माध्यम से बल के महानिदेशक (डीजी) को एक पत्र लिखा है।

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CRPF: Demand for reforms is being raised in CRPF Family Welfare Association
CRPF - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश के सबसे बड़े केंद्रीय अर्धसैनिक बल 'सीआरपीएफ' में फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन (सीडब्लूए) में बड़े स्तर पर सुधारों की मांग तेज हो रही है। इस बाबत सीआरपीएफ के एक सहायक कमांडेंट ने उचित प्रक्रिया के माध्यम से बल के महानिदेशक (डीजी) को एक पत्र लिखा है। इस पत्र में सीआरपीएफ फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन में संरचनात्मक और संस्थागत सुधारों की जरूरत पर जोर दिया गया है। सहायक कमांडेंट ने संगठन की वर्तमान व्यवस्था को अलोकतांत्रिक और पक्षपाती बताते हुए इसे पारदर्शी व समावेशी बनाने की अपील की है। पत्र में कहा गया है कि सीडब्ल्यूए, जो कि सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के अंतर्गत पंजीकृत है, वर्तमान में पूरी तरह से एक्स-ऑफिसियो व्यवस्था पर चल रहा है। अध्यक्ष का पद डीजी सीआरपीएफ की पत्नी को और उपाध्यक्ष का पद सबसे वरिष्ठ एसडीजी की पत्नी को स्वतः ही मिल जाता है। यही व्यवस्था जोन, सेक्टर और ग्रुप सेंटर स्तर पर भी लागू है। उक्त अधिकारी ने इस प्रक्रिया को 'औपनिवेशिक मानसिकता' बताया है। उन्होंने हाल ही में दिए सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश का हवाला भी दिया है, जिसमें इस तरह की परंपराओं को 'अत्याचारपूर्ण और महिलाओं के लिए अपमानजनक' कहा गया है।  

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अगस्त के पहले सप्ताह में भेजे गए इस पत्र में सहायक कमांडेंट राहुल सोलंकी ने लिखा है कि 'सीडब्ल्यूए' नियमित रूप से सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून से बचने का प्रयास करता है, जबकि उसे सरकारी संसाधन और अप्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्राप्त होती है। प्रतिनिधित्व में मांग की गई है कि सीडब्ल्यूए को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित कर आरटीआई के दायरे में लाया जाए, ताकि वित्तीय पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। अधिकारी ने संगठन की संरचना में असमानता पर भी सवाल उठाए हैं। सोलंकी ने लिखा है कि इस संगठन में केवल राजपत्रित अधिकारियों की पत्नियों को ही पदाधिकारी बनाया जाता है, जबकि सबऑर्डिनेट अफसरों और अन्य रैंकों के परिवारों (जो सीआरपीएफ का 98 प्रतिशत हैं) को कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता। इसके अलावा, शहीद जवानों के परिजनों (वीर परिवार) को भी किसी स्तर पर शामिल नहीं किया गया है, जबकि उनकी भागीदारी कल्याणकारी योजनाओं के लिए अनिवार्य है।
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सीडब्ल्यूए का मुख्य उद्देश्य सीआरपीएफ परिवारों का कल्याण है, खासकर उन परिवारों का जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्रियजनों को खोया है। एसोसिएशन के संचालन ढांचे में शहीद कर्मियों के निकटतम परिजनों (एनओके) को प्रतिनिधित्व देने का कोई प्रावधान नहीं है। यह बहिष्कार बेहद निराशाजनक है, क्योंकि वीर परिवार सबसे अधिक प्रभावित हैं। उन्हें सहायता की आवश्यकता है। निर्णय लेने की प्रक्रिया में उनका समावेश कल्याणकारी योजनाओं में प्रामाणिक और अत्यंत आवश्यक दृष्टिकोण लाएगा। सोलंकी को ग्रुप सेंटर ग्रेटर नोएडा में सीआरपीएफ परिवार कल्याण संघ (सीडब्ल्यूए) की क्षेत्रीय शाखा के सचिव के रूप में कार्य करने का अवसर मिला था। अपने व्यक्तिगत अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने पत्र में लिखा है कि जब वे ग्रेटर नोएडा में सीडब्ल्यूए शाखा के सचिव थे, तब उन्होंने जवानों को घटिया ट्रैकसूट ऊंचे दामों पर बेचे जाने का विरोध किया था। इस पर उन्हें प्रतिशोध स्वरूप सीआरपीएफ के सोनीपत स्थित ग्रुप सेंटर पर स्थानांतरित कर दिया गया था। बाद में कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी में उनकी शिकायत सही पाई गई और सीडब्ल्यूए में अनियमितताओं की पुष्टि हुई। 
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सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में सहकारी समितियों और ट्रस्टों से संबंधित एक ऐसे ही मामले पर विचार करते हुए यह निर्णय दिया कि हम उस औपनिवेशिक मानसिकता को त्याग रहे हैं, जहां नौकरशाहों की पत्नियों को इन सोसाइटियों और ट्रस्टों में पदेन पदों पर नियुक्त किया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यवस्था को स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया, जहां अधिकारियों की पत्नियां केवल विवाह के आधार पर नेतृत्व के पदों पर आसीन होती हैं, और इस प्रथा को राज्य की सभी महिलाओं के लिए अत्याचारी और अपमानजनक बताया। इसके अलावा, न्यायालय ने निर्देश दिया कि राज्य द्वारा आदर्श उप-नियम बनाए जाने चाहिएं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सरकारी सहायता प्राप्त करने वाली कोई भी सोसायटी या संस्था लोकतांत्रिक मानदंडों का पालन करे, अन्यथा ऐसी संस्थाएं अपनी कानूनी स्थिति और सहायता खो सकती हैं। ये टिप्पणियां सीडब्ल्यूए की संरचना पर पूरी तरह लागू होती हैं, जिसे सीआरपीएफ संरचनाओं के माध्यम से सरकार से पर्याप्त रसद, अवसंरचनात्मक और अप्रत्यक्ष वित्तीय सहायता प्राप्त होती है।

सहायक कमांडेंट राहुल सोलंकी ने छह प्रमुख सुधारों का सुझाव दिया है:

  • 1. सीडब्ल्यूए के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए पदेन आधार पर व्यक्तियों की नियुक्ति की प्रथा को समाप्त किया जाना चाहिए। इसके बजाय, ऐसे सभी पदों को योग्यता, सेवा अनुभव और कल्याणकारी उद्देश्यों के प्रति प्रतिबद्धता के आधार पर स्पष्ट रूप से परिभाषित पात्रता मानदंडों के साथ एक लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया के माध्यम से भरा जाना चाहिए।
  • 2. सीआरपीएफ परिवार कल्याण संघ (सीडब्ल्यूए) को अधिनियम की धारा 2 (एच) के तहत एक सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित करके सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के दायरे में लाया जाना चाहिए। यह कदम सरकार से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सहायता प्राप्त करने वाले संगठनों के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्देश के अनुरूप है, और यह सीआरपीएफ के कामकाज में अधिक पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही सुनिश्चित करेगा।
  • 3. सीआरपीएफ के शासी निकाय, केंद्रीय कार्यकारी समिति और क्षेत्रीय शाखाओं में अधीनस्थ अधिकारियों और अन्य रैंकों के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाना चाहिए। चूंकि ये श्रेणियां, सीआरपीएफ कार्यबल का भारी बहुमत बनाती हैं, इसलिए न्यायसंगत और समावेशी निर्णय लेने के लिए उनका समावेश आवश्यक है।
  • 4. सीआरपीएफ के शासी ढांचे में शहीद कर्मियों (वीर परिवारों) के निकटतम परिजनों (एनओके) को औपचारिक प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। यह सुनिश्चित करने के लिए उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण है कि शहीदों के परिवारों की विशिष्ट चुनौतियों और कल्याणकारी आवश्यकताओं को पर्याप्त रूप से समझा जाए। नीतिगत निर्णयों में उनका समाधान किया जाए।
  • 5. सीआरपीएफ के वर्तमान शासन ढांचे को विकेंद्रीकृत और लोकतांत्रिक बनाया जाना चाहिए ताकि दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के बाहर स्थित क्षेत्रीय संरचनाओं की निष्पक्ष और सार्थक भागीदारी हो सके। इससे अधिक संतुलित, अखिल भारतीय प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलेगा और क्षेत्र-विशिष्ट चिंताओं का अधिक प्रभावी ढंग से समाधान करने में मदद मिलेगी।
  • 6. कल्याणकारी पहलों या विवादों से संबंधित मामलों में प्रशासनिक अधिकारों के किसी भी दुरुपयोग को रोकने के लिए संस्थागत सुरक्षा उपाय लागू किए जाने चाहिएं। यह सुनिश्चित करना भी आवश्यक है कि सीडब्ल्यूए के कामकाज में अनियमितताओं के बारे में वैध चिंताएं व्यक्त करने मात्र से अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई या स्थानांतरण न किया जाए। सहायक कमांडेंट ने अपने पत्र के आखिर में डीजी को संबोधित करते हुए लिखा है कि सीआरपीएफ परिवार कल्याण संघ (सीडब्ल्यूए) तभी विश्वसनीय, समावेशी और प्रभावी बना रह सकता है, जब वह लोकतांत्रिक सुधार और पारदर्शी शासन को अपनाए, जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी बल दिया है। यह संस्थागत आत्मनिरीक्षण और साहसी नेतृत्व का समय है। मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में, सीडब्ल्यूए सहभागी कल्याण के एक नए युग में प्रवेश करेगा। 
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