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जलवायु परिवर्तन से 20 फीसदी जिलों की फसल प्रभावित, हो रहा देश को नुकसान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 18 Nov 2018 01:28 PM IST
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जलवायु परिवर्तन से कृषि को नुकसान
- फोटो : PTI
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भारत के 151 जिलों के फसल, पौधे और पशु जलावायु परिवर्तन के कारण अति संवेदनशील स्थिति में पहुंच चुके हैं। यह बात इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) की वार्षिक समीक्षा में सामने आई है। यह कृषि मंत्रालय से जुड़ी एक विंग है।
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भारतीय कृषि से देश की आधी जनसंख्या को रोजगार मिलता है और देश के आर्थिक उत्पादन का 17 फीसदी यहीं से प्राप्त होता है। झारखंड में चावल की खेती करने वाले किसान नए कीटों से अपनी फसल की रक्षा करते करते परेशान हो चुके हैं। इससे न केवल आर्थिक तौर पर प्रभाव पड़ रहा है बल्कि समाजिक हिंसा भी पनप रही है। कीड़ों से परेशान झारखंड का माल्टोस आदिवासी समुदाय दूसरे इलाके में जा रहा है, इस इलाके में संथाल जनजाति के लोग रहते हैं। ऐसे में दोनों समूहों के बीच संघर्ष होने की संभावना है।
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आईसीएआर के अनुसार हिमाचल प्रदेश में सेब की खेती के लिए अब किसान अधिक ऊंचाई पर जा रहे हैं, ताकि पर्याप्त ठंडा मौसम मिल सके। मध्य भारत में फसल तूफान से प्रभावित हो रही है, वहीं पंजाब में 2020 के बाद से तापमान बढ़ रहा है। करीब 28 मिलियन हेक्टेयर में से 9 मिलियन हेक्टेयर गेहूं प्रभावित हुआ है। भारत में मौसम पैटर्न के बदलने से ऐसे ही प्रभाव पड़ रहे हैं।
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कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने 1 नवंबर को बैठक की, जिसमें विपरीत मौसम के प्रति कितनी तैयारी है, इसकी समीक्षा की गई। हालांकि सरकार ऐसे कई कार्यक्रम चला रही है, जिससे खेती में हो रहे नुकसान को कम किया जा सके। सिंह ने आईसीएआर को नई योजनाएं बनाने को भी कहा है।
बारिश और तापमान में अंतर साफ देखा जा सकता है। जलवायु से प्रभावित होते 151 जिलों में से प्रत्येक से एक गांव को चुना गया है, जो पूरे जिले का नेतृत्व करेगा। इन गांवों में लोकेशन स्पेसिफिक टेक्नोलॉजी लगाई जाएंगी। जिन परेशानियों का सामना ये जिले कर रहे हैं और जैसा वहां की खेती का सिस्टम है, उसी आधार पर तकनीकों का चुनाव किया गया है।
गुजरात के आनंद जिले में सरसों की खेती करने वाले किसानों को 10-20 अक्तूबर तक बुआई कम करने की सलाह दी गई है, ताकि एफिड्स के हमले से बच सकें, जिसकी आवृत्ति बढ़ गई है। समीक्षा रिपोर्ट से पता चला है कि इसके लिए बदलता मौसम ही जिम्मेदार है। जिससे हवा की गति प्रति कमी के अनुसार 2 लाख से अधिक हो चुकी है और तापमान 19 से बढ़कर 25.5 तक पहुंच गया है। रिपोर्ट से यह भी पता चला है कि जलवायु परिवर्तन से न केवल तापमान बढ़ रहा है बल्कि बारिश भी कम हो रही है।
डेलावेयर विश्वविद्यालय और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के डाटा का इस्तेमाल कर समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे भारत में वार्षिक कृषि आय कम हो रही है। 54 फीसदी खेती वाले इलाकों तक सिंचाई की ठीक व्यवस्था नहीं है।