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Kerala: कांग्रेस की जीत के पीछे कट्टरपंथी वाले बयान पर CPIM ने विजयराघवन का दिया साथ, कहा- कुछ भी गलत नहीं कहा
Mon, 23 Dec 2024 02:18 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तिरुवनंतपुरम
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Mon, 23 Dec 2024 02:18 PM IST
सार
वायनाड में हाल ही में एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान विजयराघवन ने कथित तौर पर दावा किया था कि राहुल गांधी ने सांप्रदायिक ताकतों के समर्थन से दो बार बड़ी जीत हासिल की और प्रियंका गांधी की प्रचार रैलियों में चरमपंथी तत्व मौजूद थे।
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राहुल गांधी, प्रियंका गांधी
- फोटो : ANI
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विस्तार
वायनाड निर्वाचन क्षेत्र से राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा की लोकसभा जीत के बारे में केरल की सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पोलित ब्यूरो के सदस्य ए. विजयराघवन की हालिया विवादास्पद टिप्पणी पर विवाद छिड़ गया है। एक तरफ जहां, कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) के नेताओं ने तीखी आलोचना की। वहीं, सत्तारूढ़ माकपा नेताओं ने विजयराघवन का समर्थन किया।
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क्या बोले थे विजयराघवन?
वायनाड में हाल ही में एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान विजयराघवन ने कथित तौर पर दावा किया था कि राहुल गांधी ने सांप्रदायिक ताकतों के समर्थन से दो बार बड़ी जीत हासिल की और प्रियंका गांधी की प्रचार रैलियों में चरमपंथी तत्व मौजूद थे।
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माकपा ने कही ये बात
सोमवार को माकपा के प्रमुख नेताओं ने कहा कि विजयराघवन ने कुछ गलत नहीं कहा और न ही पार्टी की नीति के खिलाफ बयान दिया। वे अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक दोनों तरह की सांप्रदायिकता का विरोध करते हैं। उन्होंने अपने नेता द्वारा कांग्रेस के खिलाफ लगाए गए आरोपों को भी दोहराया और कांग्रेस पर चुनावी लाभ के लिए सांप्रदायिक संगठनों के साथ सांठगांठ करने का आरोप लगाया।
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कांग्रेस ने किया था पलटवार
इससे एक दिन पहले कांग्रेस और उनके यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) साझेदार, भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने आरोप लगाया कि विजयराघवन समाज में बहुसंख्यक सांप्रदायिकता को भड़काने की कोशिश कर रहे हैं। इसके एक दिन बाद माकपा नेतृत्व पोलित ब्यूरो सदस्य के समर्थन में सामने आया।
अब इन नेताओं ने किया हमला
माकपा के राज्य सचिव एमवी गोविंदन ने कहा कि विजयराघवन ने जो कहा, वह सटीक था और आरोप लगाया कि एसडीपीआई और जमात-ए-इस्लामी जैसी सांप्रदायिक संस्थाएं UDF के चुनावी साझेदार के रूप में काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह गठजोड़ हाल के पलक्कड विधानसभा उपचुनाव के दौरान स्पष्ट था। उन्होंने यह भी कहा कि जमात-ए-इस्लामी के खिलाफ की गई आलोचना मुस्लिम समुदाय के खिलाफ नहीं है और आरएसएस के विरोध में खड़ा होना हिंदुओं के खिलाफ नहीं है। माकपा का उद्देश्य दोनों प्रकार की सांप्रदायिकता का विरोध करना है।
माकपा के वरिष्ठ नेता और एलडीएफ के संयोजक टीपी रामकृष्णन ने कहा कि विजयराघवन ने कांग्रेस पार्टी के उस रुख की आलोचना की है, जो चुनावों के दौरान सांप्रदायिक ताकतों के साथ गठबंधन करती है। वहीं, पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता पी के श्रीमति ने भी कहा कि विजयराघवन ने पार्टी की नीति और दृष्टिकोण के मुताबिक ही बयान दिया है। उन्होंने कहा कि केरल में सांप्रदायिक और चरमपंथी ताकतें मजबूत हो रही हैं, और इन ताकतों को बढ़ने नहीं दिया जा सकता। चाहे वह हिंदू सांप्रदायिकता हो या मुस्लिम चरमपंथ माकपा दोनों का विरोध करेगी।