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दस साल से बीमार है टॉप माओवादी नेता, इस 'युवा' को बनाया जा सकता है नया प्रमुख
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Wed, 27 Sep 2017 10:35 AM IST
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मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति सीपीआई (एम) प्रमुख है।
सीपीआई (एम) खुद को और मजबूत करने के लिए मुखिया बदलने की तैयारी कर रहा है। बता दें कि इस संगठन पर बैन लगा हुआ है। मिली जानकारी के मुताबिक, फिलहाल मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति संगठन का प्रमुख है। अब उसकी जगह नबाला केशव राव उर्फ बसावराज को चीफ बनाया जा सकता है।
इसके लिए माओवादी एक सीक्रेट मीटिंग करने की सोच रहे हैं। मीटिंग में संगठन की कार्यशैली पर भी विचार किया जाना है। इस रिपोर्ट को खुफिया एजेंसी भी नजरअंदाज नहीं कर रहीं क्योंकि गणपति की तबीयत अब ठीक नहीं रहती। उसे पिछले दस सालों से मधुमेह और गठिया सहित कई बीमारियां हैं।
यह भी पढ़ें: ...तो इस तरह से माओवादियों की चंगुल से बच निकली 13 साल की मासूम
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केशव राव गणपति से दस साल छोटा है और उसे कई तरह की नई तकनीकों की जानकारी है। उसे कथित रूप से आईईडी बम बनाने भी आते हैं।
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इसके लिए माओवादी एक सीक्रेट मीटिंग करने की सोच रहे हैं। मीटिंग में संगठन की कार्यशैली पर भी विचार किया जाना है। इस रिपोर्ट को खुफिया एजेंसी भी नजरअंदाज नहीं कर रहीं क्योंकि गणपति की तबीयत अब ठीक नहीं रहती। उसे पिछले दस सालों से मधुमेह और गठिया सहित कई बीमारियां हैं।
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केशव राव गणपति से दस साल छोटा है और उसे कई तरह की नई तकनीकों की जानकारी है। उसे कथित रूप से आईईडी बम बनाने भी आते हैं।
काफी वक्त से है मीटिंग की तैयारी
मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति सीपीआई (एम) प्रमुख है।
माओवादियों की मीटिंग कहां होनी है फिलहाल यह पता नहीं लग सका है। माओवादी काफी वक्त से ऐसी मीटिंग करने की प्लानिंग कर रहे हैं लेकिन उनको सफलता नहीं मिल रही।
खुफिया एजेंसियों की जानकारी में इससे पहले आखिरी बार 2007 में बड़ी मीटिंग हुई थी। उसके बाद 2012 में भी एक मीटिंग की जानकारी मिली थी। लेकिनन वह छोटे पैमाने की थी। माओवादी जब भी छिपकर जंगल आदि में मीटिंग की प्लानिंग करते हैं तब खुफिया एजेंसियों को पता लग जाता है जिसके चलते मीटिंग कैंसल हो जाती है।
खुफिया एजेंसियों की जानकारी में इससे पहले आखिरी बार 2007 में बड़ी मीटिंग हुई थी। उसके बाद 2012 में भी एक मीटिंग की जानकारी मिली थी। लेकिनन वह छोटे पैमाने की थी। माओवादी जब भी छिपकर जंगल आदि में मीटिंग की प्लानिंग करते हैं तब खुफिया एजेंसियों को पता लग जाता है जिसके चलते मीटिंग कैंसल हो जाती है।