{"_id":"5f6145768ebc3efbc22f0cb6","slug":"cpcb-and-ministry-of-environment-tell-whether-plastic-pens-are-covered-under-pwm-rules-2018-ngt","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीपीसीबी और पर्यावरण मंत्रालय बताए क्या प्लास्टिक पेन पीडब्ल्यूएम नियम 2018 के तहत आते हैं : एनजीटी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सीपीसीबी और पर्यावरण मंत्रालय बताए क्या प्लास्टिक पेन पीडब्ल्यूएम नियम 2018 के तहत आते हैं : एनजीटी
Wed, 16 Sep 2020 04:21 AM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 16 Sep 2020 04:21 AM IST
विज्ञापन
एनजीटी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने पर्यावरण मंत्रालय और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को निर्देश दिये हैं कि वे एक रिपोर्ट दाखिल कर बताएं कि क्या प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन (पीडब्ल्यूएम) नियम 2018 के तहत प्लास्टिक के पेन आते हैं कि नहीं। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने पाया कि इस मुद्दे को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है। पीठ ने इस मामले पर 14 अक्तूबर तक कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर)मांगी है। पीठ अवनी मिश्रा की याचिका में सुनवाई कर रही थी।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता ने कहा कि प्लास्टिक पेन के अनियंत्रित उपयोग से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने बताया कि इस 91 फीसदी उत्पन्न प्लास्टिक कचरे को रीसाइकिल नहीं किया जाता है। हर साल 160 से 240 करोड़ पेन बाजार में आते हैं। याचिका में आरोप लगाया गया कि विस्तारित उत्पादकों की देयता को विधिवत लागू नहीं किया जा रहा है। इसके साथ ही बाय बैक की नीति पेश किए जाने की सिफारिश की गई।
विज्ञापन
एनजीटी ने यह आदेश सीपीसीबी के एक जवाब में दिया। दरअसल सीपीसीबी ने अधिकरण को बताया कि पीडब्ल्यूएम नियम 2018 के ईपीआर के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं में बहुस्तरीय प्लास्टिक पाउच या पाउच या पैकेजिंग है। इस प्रकार, पेन और अन्य प्लास्टिक उत्पादों जैसी वस्तुओं को विस्तारित उत्पादकों के अंतर्गत नहीं रखा गया है। पीडब्ल्यूएम नियम, 2018 के तहत ईपीआर के लिए राष्ट्रीय ढांचा पर्यावरण एवं वन मंत्रायल (एमओईएफ) में विचाराधीन है। सीपीसीबी ने एमओईएफ को ईपीआर के अंतर्गत आने वाली वस्तुओं की स्पष्ट रूप से गणना करने के लिए सूचित किया है। वहीं एमओईएफ ने अधिकरण को बताया कि उसने निर्माता, निर्यातक और ब्रांड मालिकों को पेन समेत प्लास्टिक कचरे के निस्तारण के लिए तीन उपाय सुझाए हैं।
विज्ञापन